Uttar Pradesh Prayagraj SC News: प्रयागराज में तोड़े गए 5 घर, इससे हमारी आत्मा हिल गई, 10 लाख का मुआवजा दिया जाए – सुप्रीम कोर्ट
प्रयागराज में अवैध मकानों को गिराने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने प्रयागराज विकास प्राधिकरण को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने मकानों को गिराने की प्रक्रिया को असंवैधानिक पाया और पांच पीड़ितों (एक वकील, एक प्रोफेसर और तीन अन्य) को 10-10 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया।
Uttar Pradesh Prayagraj SC News: देश में बुलडोजर कार्रवाई को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। इस कार्रवाई को लेकर सभी की अलग-अलग राय है, लेकिन कोर्ट इस पर सख्त रुख अपना रहा है। कोर्ट लगातार ऐसी कार्रवाई की निंदा कर रहा है और अधिकारियों को फटकार लगा रहा है। इसके साथ ही कई मामलों में मुआवजा देने का फैसला भी सुना रहा है। आज सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे ही एक मामले में अपना फैसला सुनाया है।
प्रयागराज में एक वकील, एक प्रोफेसर और तीन अन्य लोगों के घरों को ध्वस्त करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि घरों को ध्वस्त करने की प्रक्रिया असंवैधानिक है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह हमारी अंतरात्मा को झकझोरता है। आश्रय का अधिकार नाम की भी कोई चीज होती है। उचित प्रक्रिया नाम की भी कोई चीज होती है। इस तरह की कार्रवाई किसी भी तरह से सही नहीं है।
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SC ने किया पीड़ितों को मुआवजा देने का ऐलान
सुप्रीम कोर्ट ने प्रयागराज विकास प्राधिकरण को पांचों पीड़ितों को 10-10 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने पीड़ितों के खिलाफ की गई कार्रवाई को भी गलत बताया है और इसकी निंदा की है।
बुलडोजर चलाना कोई उपलब्धि नहीं – सीएम योगी
सीएम योगी ने हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में कहा कि बुलडोजर चलाना कोई उपलब्धि नहीं है। यह यहां की जरूरत थी और हमने उस जरूरत के हिसाब से जो सही लगा, वही किया।
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यूपी सरकार को सुप्रीम कोर्ट से पहले ही मिल चुकी फटकार
इससे पहले नवंबर में सुप्रीम कोर्ट ने बुलडोजर कार्रवाई को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार को फटकार लगाई थी। उस समय सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जिन लोगों के घर तोड़े गए हैं, उन्हें यूपी सरकार 25 लाख रुपए का मुआवजा दे। यह पूरी तरह से मनमानी है, उचित प्रक्रिया का पालन कहां किया गया? हमारे पास हलफनामा है, जिसमें कहा गया है कि कोई नोटिस जारी नहीं किया गया, आपने सिर्फ मौके पर जाकर लोगों को जानकारी दी।
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नवंबर में सुप्रीम कोर्ट ने बुलडोजर पर लगा दी रोक
बुलडोजर कार्रवाई पर रोक लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह भी बताया कि किन जगहों पर उसका फैसला लागू नहीं होगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि मनमाने तरीके से बुलडोजर चलाने वाली सरकारें कानून को अपने हाथ में लेने की दोषी हैं। घर बनाना संवैधानिक अधिकार है। आश्रय का अधिकार मौलिक अधिकार है। कोर्ट ने आगे कहा था कि घर सिर्फ संपत्ति नहीं बल्कि पूरे परिवार के लिए आश्रय होता है और इसे गिराने से पहले राज्य को इस बात पर विचार करना चाहिए कि क्या पूरे परिवार को आश्रय से वंचित करने के लिए यह अतिवादी कदम जरूरी है।
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