UMARANGSO COAL MINE TRAGEDY: असम खनन त्रासदी: दीमा हसाओ में उमरंगसो कोयला खदान में फंसे श्रमिकों का बचाव अभियान 7वें दिन भी जारी
UMARANGSO COAL MINE TRAGEDY: असम के दीमा हसाओ जिले के उमरंगसो क्षेत्र में स्थित 3 किलो रैट-होल कोयला खदान में पानी घुसने के बाद कुल 9 श्रमिक खदान के अंदर फंस गए। यह घटना तब हुई जब खदान में अचानक पानी भर गया, जिससे खदान में काम कर रहे श्रमिकों के लिए बाहर निकलना असंभव हो गया। बचाव अभियान शुरू होते ही विभिन्न एजेंसियां और टीमों ने इन श्रमिकों को निकालने के लिए प्रयास तेज़ कर दिए हैं।
UMARANGSO COAL MINE TRAGEDY: असम के दीमा हसाओ जिले के उमरंगसो क्षेत्र में एक गंभीर खनन त्रासदी का सामना करना पड़ा है, जिसमें बाढ़ग्रस्त रैट-होल कोयला खदान के अंदर फंसे हुए श्रमिकों के बचाव के प्रयास लगातार जारी हैं। 6 जनवरी, 2025 को खदान में पानी घुसने के बाद कुल नौ श्रमिक फंस गए थे, जिनमें से अब तक चार शव बरामद किए जा चुके हैं। इन श्रमिकों में पांच अन्य अभी भी लापता हैं। इस घटना को लेकर सरकार और विभिन्न एजेंसियों के बीच बचाव अभियान तेज़ी से जारी है, जबकि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के आदेश भी दिए गए हैं।
बचाव अभियान का 7वां दिन
खदान के अंदर पानी घुसने के कारण पूरा क्षेत्र जलमग्न हो गया, जिससे श्रमिकों के लिए बाहर निकलना संभव नहीं हो पा रहा था। भारतीय सेना, भारतीय नौसेना, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और अन्य बचाव एजेंसियां लगातार रैट-होल खदान से शवों को निकालने का काम कर रही हैं। अब तक बचाव दल ने चार शवों को निकाल लिया है, जिनमें नेपाल के गंगा बहादुर श्रेठ (पहला शव), लिजेन मगर (27 वर्ष, कलामाटी गांव), खुशी मोहन राय (57 वर्ष, मगरगांव) और सरत गोयरी (37 वर्ष, थाइलापारा) शामिल हैं। हालांकि, पांच श्रमिकों का अभी तक कोई पता नहीं चल सका है।
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कांग्रेस सांसद का पत्र
इस घटना के बारे में गहरी चिंता व्यक्त करते हुए, कांग्रेस के लोकसभा सांसद गौरव गोगोई ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। उन्होंने पत्र में दीमा हसाओ में अवैध रैट-होल कोयला खदान में हुई इस त्रासदी के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित करने की मांग की है। गोगोई ने लिखा कि यह घटना एक अवैध खनन गतिविधि के कारण हुई है, और सरकार को इसकी गहन जांच करनी चाहिए ताकि इस प्रकार की घटनाओं को भविष्य में रोका जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि बचाव अभियान को लगातार पांच दिन हो चुके हैं, लेकिन श्रमिकों की स्थिति अभी भी असमंजस में है।
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मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का बयान
इस घटना के बारे में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने भी गंभीर चिंता व्यक्त की और कहा कि खनन की इस त्रासदी के लिए संबंधित अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने इस मामले में एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया और बताया कि खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 की धारा 21 (1) के तहत और खान एवं खनिजों के अवैध उत्खनन की धारा 3 (5) / 105 बीएनएस के तहत जांच की जा रही है। इसके साथ ही, पुलिस ने इस मामले में पुनीश नुनिसा नामक एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है, जो संभवतः खदान की अवैध गतिविधियों से जुड़ा हुआ है।
अवैध खनन और सुरक्षा की चिंता
यह घटना असम में अवैध खनन गतिविधियों के एक गंभीर रूप को उजागर करती है। रैट-होल खदानों में अक्सर श्रमिकों की सुरक्षा की अनदेखी होती है, और इस प्रकार की खदानों में कार्यरत श्रमिकों के लिए कोई औपचारिक सुरक्षा प्रोटोकॉल नहीं होते हैं। यह खदानें बिना किसी नियमन के चलती हैं और श्रमिकों को अत्यधिक खतरों का सामना करना पड़ता है। इस घटना ने राज्य सरकार और केंद्रीय एजेंसियों के लिए इस अवैध खनन पर नियंत्रण पाने की आवश्यकता को उजागर किया है।
कोल इंडिया की विशेष बचाव टीम का योगदान
इस घटना के बाद, कोल इंडिया की 12 सदस्यीय विशेष बचाव टीम को दीमा हसाओ भेजा गया, जो खदान की तबाही वाली जगह पर पहुंची और आठ अन्य श्रमिकों को बचाने में सफल रही। इस बचाव कार्य में सेना और एनडीआरएफ की टीमों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
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