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उद्धव ठाकरे के हाथ से सत्ता और पार्टी दोनों फिसलीं, एनसीपी-कांग्रेस के साथ से भी ‘खाली हाथ’


मुंबई: शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे इस समय बेहद असहज और असहाय हैं। उनके हाथों से अपनी ही पार्टी के विधायकों ने सत्ता छीन ली गयी है, बल्कि पार्टी भी उनते हाथ से फिसलती जा रही है। उद्धव ठाकरे को अभी भी एनसीपी-कांग्रेस का पूरा साथ मिल रहा है, लेकिन इसके बावजूद उनके ‘खाली हाथ’ ही हैं। दावा किया जा रहा है कि उद्धव ठाकरे के साथ शिवसेना के 55 विधायकों में से गिनती के ही विधायक रह गये हैं। महाराष्ट्र के बदले हुए वर्तमान राजनीति परिदृश्य में अधिकांश विधायक अब शिंदे का ही अपना नेता मान रहे हैं और शिंदे का अपना समर्थन देने गुवाहाटी पहुंचे गये हैं।

हालांकि उद्धव ठाकरे को महाराष्ट्र में पिछले तीन दिन से गहराये सियासी महासंकट से उबारने का रास्ता खोजने के लिए एनसीपी-कांग्रेस में बैठकों का दौर जारी है, लेकिन उनकी सारी बैठकें बेनतीजा ही साबित हो रही हैं। इन दलों के नेताओं ने उद्धव ठाकरे को हर स्थिति में साथ खड़ा होने की बात दोहरायी है, लेकिन इसके बावजूद उद्धव ठाकरे अब किसी भी राजनेता पर कोई भरोसा नहीं कर पा रहे हैं।

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उधर शिवसेना प्रमुख और मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से नाराज होकर एकाएक बागी हुए कैबिनेट मंत्री एकनाथ शिंदे महाराष्ट्र की राजनीति के बड़ा चेहरा बन गये हैं। उनके समर्थन में शिवसेना के चालीस से अधिक विधायक तो हैं ही, शिवसेना के अधिकांश सांसदों ने भी शिंदे से संपर्क करके अपना समर्थन दिया है। भाजपा के विधायक और सांसदों के दम पर ही एकनाथ शिंदे महाराष्ट्र में सरकार बदलने और नई सरकार में प्रभावी नेता होने की रणनीति पर काम कर रहे हैं और इसमें उन्हें सफलता मिलती भी दिख रही है। कुल मिलाकर कई दिन से चल रहे इस सियासती घटनाक्रम में हर रोज अलग-अलग स्थिति बन रही है। माना जा रहा है कि जल्द ही महाराष्ट्र सरकार का परिवर्तित स्वरुप देखने को मिलेगा और राजनीति उलटफेर का पटाक्षेप होगा।

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