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‘मेरी आवाज ही पहचान है’…..82 की उम्र में Bhupinder Singh का फानी दुनिया को अलविदा

नई दिल्ली: बॉलीवुड के जाने माने सिंगर Bhupinder Singh का 82 साल की उम्र में निधन हो गया. इसकी जानकारी खुद उनकी पत्नी और सिंगर मिताली सिंह ने दी है. उन्होंने बताया कि 18 जुलाई की शाम Bhupinder Singh ने मुंबई  के अंधेरी स्थित क्रिटिकेयर अस्पताल में शाम 7:45 में आखिरी सांस ली. गायक के निधन के बाद म्यूजिक इंडस्ट्री शोक में डूब गया. Bhupinder ने बॉलीवुड को अपनी रूहानी आवाज़ों में से कई हिट सांग दिए हैं. उनके गाए गीतों ने संगीत की दुनिया में एक अलग मुकाम बनाया है. उनके इस तरह अचानक चले जाने से संगीत जगत को बड़ा नुकसान हुआ है.

दरअसल, क्रिटिकेयर एशिया हॉस्पिटल के डॉयरेक्टर डॉ. दीपक नामजोशी ने कहा- Bhupinder को 10 दिन पहले अस्पताल में भर्ती करवाया गया था. उनके पेट में इंफेक्शन था. इसी दौरान उन्हें कोरोना भी हो गया. सोमवार सुबह उनकी हालत बिगड़ गई. उन्हें वेंटिलेटर पर रखना पड़ा. उन्हें कार्डियक अरेस्ट हुआ और शाम 7:45 बजे उनका निधन हो गया.

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दिग्गज गायक Bhupinder Singh का जन्म 6 फरवरी, 1940 को पंजाब के अमृतसर में हुआ था. उन्होंने गायकी की शुरुआती शिक्षा अपने पिता नाथा सिंह जी से प्राप्त की थी. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ऑल इंडिया रेडियो दिल्ली से की थी. इसके बाद उन्होंने दिल्ली स्थित दूरदर्शन में भी काम किया और बाद में मदन मोहन ने Bhupinder Singh को फिल्म हकीकत में मोहम्मद रफी साब के साथ होके मजबूर मुझे उसने बुलाया होगा गाने का मौका मिला, लेकिन उन्हें कुछ खास पहचान नहीं मिली. उन्हें पहचान साल 1978 में आई फिल्म वो जो शहर था से मिली थी. इसके बाद उन्होंने फिर कभी पीछे मुडकर कभी नहीं देखा.

उनके कुछ प्रसिद्ध गीत होके मजबूर मुझे, उसे बुलाया होगा, (मोहम्मद रफी, तलत महमूद और मन्ना डे के साथ), दिल ढूंढता है, दुकी पे दुकी हो या सत्ते पे सत्ता जैसे गानों को अपनी बेहतरीन आवाज दी है. 82 वर्षीय गायक को मौसम, सत्ते पे सत्ता, अहिस्ता अहिस्ता, दूरियां, हकीकत और कई अन्य फिल्मों में उनके गीतों के लिए याद किया जाता है. दिग्गज गायक भूपिंदर सिंह का अंतिम संस्कार देर रात मुंबई के ओशिवारा श्मशान घाट में हुआ.

उनके पिता प्रोफेसर नत्था सिंह सिख थे. वो खुद भी बहुत अच्छे संगीतकार थे, लेकिन संगीत सिखाने के मामले में बेहद सख्त उस्ताद थे. अपने पिता की सख्त मिजाजी देखकर शुरुआती दौर में भूपिन्दर को संगीत से नफरत सी हो गई थी. एक वह भी जमाना था, जब भूपिन्दर को संगीत को बिल्कुल पसंद नहीं था. भूपिंदर और पत्नी मिताली की गाई गजल, ‘राहों पर नजर रखना-होंठो पर दुआ रखना, आ जाए कोई शायद दरवाजा खुला रखना’ ऑलटाइम फेवरेट गजल्स में से एक है। भूपिंदर और मिताली के कई एलबम्स आए। इसमें से शाम-ए-गजल सबसे मशहूर रहा.

1980 के दशक में भूपिंदर सिंह ने बांग्लादेश की हिंदू गायिका मिताली मुखर्जी से शादी की थी. भूपिंदर ने एक कार्यक्रम में मिताली की आवाज सुनी. इसके बाद मुलाकात हुई, जो बाद में प्यार में बदल गई. कुछ वक्त बाद सात सुरों के हमराही असल जिंदगी में भी हमसफर हो गए. मिताली-भूपिंदर ने मिलकर सैकड़ों लाइव शो किए। उनका एक बेटा निहाल सिंह भी है जो संगीतकार हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बीजेपी चीफ जेपी नड्डा समेत कई बड़ी हस्तियों ने ट्वीट कर भूपिंदर सिंह के निधन पर शोक व्यक्त किया.

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