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किसान मोर्चा के महापंचायत में जान नहीं फूंक पा रहे टिकैत, नेतृत्व पर उठने लगे सवाल

लखीमपुर खीरी। किसान नेता राकेश टिकैत(Rakesh Tikait) की किसानों पर पकड़ कमजोर हो रही है। इसी का परिणाम है कि जेल में बंद किसानों के केस वापस लेने की मांग को लेकर दिये जा रहे महापड़ाव के 24 घंटे बीत जाने के बाद भी मंडी परिसर में जुटे किसानों में कोई उत्साह दिखायी नहीं दे रहा है। इससे टिकैत के नेतृत्व को लेकर अब तरह-तरह की चर्चाएं होने लगी हैं।

किसान मोर्चा के आह्ववान पर यहां 18 अगस्त से धरने के रुप में किसानों का महापड़ाव शुरु हो चुका है। यह धरना 72 घंटे का है, लेकिन यहां पहुंचे किसानों में वह उत्साह गायब है, जो तीन कृषि कानूनों को लेकर दिल्ली में देखने को मिला था। किसानों की यह महापंचायत काफी समय पहले तिकोनिया बनबीरपुर किसानों पर थार चढाकर की गयी हत्याकांड से संबंधित है।

धरनारत किसान इस कांड के लिए केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी को उनके पद से बर्खास्तगी, जेल में बंद चार किसानों पर केस वापस लेने समेत कई मांगों को लेकर है। इस धरने-महापंचायत में देश भर के बड़े किसान नेता शामिल होने का दावा किया जा रहा है। इन किसान नेताओं में मुख्य नेतृत्व राकेश टिकैत का है। टिकैत सहित सभी किसान नेता केन्द्रीय मंत्री अजय मिश्र टेनी को पद से हटाये जाने की मांग को लेकर मंडी परिसर में जमे हुए हैं, लेकिन शासन-प्रशासन इन्हें कोई महत्व नहीं दे रहा है।

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हालांकि जिला प्रशासन इस महापड़ाव को लेकर अलर्ट हैं और वहां पर धारा 144 लागू कर दी गयी है। पुलिस अधीक्षक संजीव सुमन ने मंडी पहुंच कर दूसरे दिन भी स्थल का निरीक्षण किया। किसानों द्वारा किसी तरह को कोई गड़बड़ी न हो, इसके लिए मंडी परिसर में भारी पुलिस फोर्स भी तैनात किया गया हैं।

शुक्रवार को मंडी परिसर में दूरदराज से ट्रेनों और बसों से हजारों की तादात में किसान मंडी परिसर पहुंचे। किसान नेता राकेश टिकैत की अगवाई में संयुक्त किसान मोर्चा का यह धरना 21 अगस्त तक जारी रहेगा, लेकिन धरने पर दूर दराज से आने वाले अधिकांश किसान इसे केवल मौज मस्ती करने की मंशा से ही इसमें शामिल हो रहे हैं। उन्हें पता है कि जिन मांगों को लेकर धरना किया जा रहा है, वह आम किसानों के हित में न होकर केवल आंदोलनजीवी नेताओं के लिए फायदेमंद है।

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