Waqf Amendment Bill Update : वक्फ संशोधन विधेयक 2025 पास, अब बदल जायेगा इतना कुछ,भारत के भविष्य को होगा बहुत बड़ा फायदा.
इसके बावजूद ऐसा दावा किया जा रहा है कि यूपी में बड़ी संख्या में खलिहान, तालाब, पोखर जैसा सार्वजनिक संपत्तियों को वक्फ घोषित करने के मामले सामने आए थे. अब जरा ये भी समझ लिजिए कि, वक्फ संशोधन विधेयक 2025 में संसोधन के बाद के बाद देश में बो तीन चीजे बदल जायेंगी जिनका देशवासियों को सदियों से इंतजार था.
Waqf Amendment Bill Passed: संसद से वक्फ संशोधन विधेयक 2025 पास होने के बाद उत्तर प्रदेश में वक्फ संपत्तियों की पारदर्शिता को लेकर बड़ा कदम उठाया गया है. सरकार ने अवैध रूप से वक्फ घोषित की गई संपत्तियों की पहचान और कार्रवाई के लिए जिलाधिकारियों को विशेष अभियान चलाने के निर्देश दे डाले.यह कार्रवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि,सरकारी और ग्राम समाज की जमीनों को वक्फ घोषित नहीं किया जा सकता. इसके बावजूद ऐसा दावा किया जा रहा है कि यूपी में बड़ी संख्या में खलिहान, तालाब, पोखर जैसा सार्वजनिक संपत्तियों को वक्फ घोषित करने के मामले सामने आए थे. अब जरा ये भी समझ लिजिए कि, वक्फ संशोधन विधेयक 2025 में संसोधन के बाद के बाद देश में बो तीन चीजे बदल जायेंगी जिनका देशवासियों को सदियों से इंतजार था.
वक्फ बोर्ड में बदलेगी तीन चीजें ?
1-सही मायने में भारत आजाद हो जायेगा
2.भू माफियाओं का कब्जा हटेगा
3.साथ में भारत के भविष्य को बहुत बड़ा फायदा होगा.
नहीं तो ये होता ?
वक्फ बोर्ड 50 साल बाद कैसे नासूर बन जाता ?
वक्फ बोर्ड की जमीनों पर पाकिस्तान चलाता प्रयोगशाला
370 की तरह मोदी शाह को वक्फ बोर्ड अमर कर देगा
देश की सत्ता पर मौजूद बीजेपी ने अपना ऐसा वादा पूरा कर दिया है.जिसका इंतजार आजादी के बाद पूरे देश की जनता को था.भारत जब 1947 में आजाद होता है तो, लोकतंत्र की व्यवस्था को चुनता.कुछ समय बाद पंडित नेहरू की सरकार में कानून आता है .मुसलमानों को अधिकार दिए जाते हैं कि जो जमीन आपको अच्छी लगे वो आप ले लिजिये.कभी एक जमीन का टुकड़ा नहीं था.लेकिन देखते ही देखते 9 लाख हेक्टेयर जमीन वक्फ बोर्ड के नाम हो जाती है.ये सब कैसे होता है उस समय की मौजूदा सरकारों का इस पर कोई एक्शन नहीं होता क्योंकि आजादी के बाद से ही इस देश में वोटबैंक की राजनीति रोटियां सेंकी जाती रहीं है.लेकिन मौजूदा सरका में मोदी-शाह की जोड़ी वक्फ बोर्ड को कमजोर करने के लिये, किसी भी तुफान से टकराने को तैयार है…ऐसे में सवाल ये है कि, जब मोदी सरकार दूसरों की बैसाखी पर टिकी है. तो वो मुसलमानों के खिलाफ खुलकर एक्शन लेने की तैयारी में क्यों है ?.
चलिये आपको यह भी बताते हैं.
साल 1947 में जब भारत का बंटवारा होता है,तो
पाकिस्तान में जो जमीन थी उस पर वहां की सरकार ने अधिग्रहण कर लिया
यानि जो हिंदू भारत से पाकिस्तान की और लौट आये.उनकी जमीन पर पाकिस्तानी सरकार ने दावा ठोक दिया. जबकि, जो मुसलमान भारत से पाकिस्तान चले गये.उनकी भारत की जमीनों पर भी असली खेल हो गया.1954 पंडित नेहरू की सरकार ने भारत से पाकिस्तान के मुसलमानों के खाली पड़ी जमीन को मुसलमानों को सौंप दिया.इसी के लिये वक्फ बोर्ड का गठन होता है.उसके एक साल बाद ही.वक्फ बोर्ड को कानून ताक पर रखकर इतनी ताकत दी गई कि,कोई विरोध तक नहीं कर सका.अब वक्फ बोर्ड संसोधन बिल दोनों सदनों में पास हो गया.अब कोई कितना भी विरोध करे इस बार मोदी सरकार झुकने के मूड़ में नहीं है.
इधर यूपी में योगी आदित्यनाथ फायर मूड़ में नजर आते हैं. जैसे ही वक्फ बोर्ड पर कानून पास हुआ वैसे ही उत्तर प्रदेश में बुल्डोजर एक्शन भी सख्त हो गया. क्योंकि सरकारी संपत्ति पर बना कोई भी धर्मिक स्थल बचेगा नहीं.हालांकि वक्फ बोर्ड मुसलमानों के हक छीन लेगा. ऐसा नरेटिव सिर्फ इसलिये गढ़ा जा रहा है.ताकि मुसमान विरोध करने के लिये रोड़ पर आ जाये.और मोदी सरकार की कुर्सी हिल जाये.अब देश की कोई जमीन होगी वक्फ बोर्ड तभी ले पायेगा जब देने वाले के नाता इस्लाम धर्म होगा.
यूपी में वक्फ संपत्ती का ब्यौरा ?
प्रदेश में सुन्नी वक्फ बोर्ड की 1,24,355 और शिया वक्फ बोर्ड की 7,785 संपत्तियां दर्ज हैं. लेकिन इन संपत्तियों को लेकर बड़ा विवाद तब खड़ा हुआ जब यूपी राजस्व विभाग के अभिलेखों में मात्र 2,533 सुन्नी वक्फ और 430 शिया वक्फ संपत्तियां ही आधिकारिक रूप से दर्ज पाई गईं. आपको बता दें कि दान में दी गई संपत्तियों को ही वक्फ माना जा सकता है, लेकिन सरकारी भूमि को नहीं.
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वक्फ संशोधन विधेयक 2025 समझिए
वक्फ संपत्तियों को पारदर्शी तरीके से प्रबंधित करने के लिए हाल ही में राज्यसभा में वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 पास किया गया. इस बिल के मुताबिक,
अब कोई सरकारी या ग्राम समाज की जमीन को वक्फ घोषित कर सकता.
वक्फ संपत्तियों की निगरानी परमार्थ आयुक्त (चैरिटी कमिश्नर) करेगी.
वक्फ बोर्ड के प्रशासन और उसकी संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता लाने के लिए एक केंद्रीयकृत पोर्टल तैयार होगा.
वक्फ संपत्तियों से गैर-कानूनी कब्जे हटाने और विवाद निपटाने के लिए वक्फ न्यायाधिकरण को मजबूत होगा.
विधवा, तलाकशुदा महिलाओं और अनाथ बच्चों की संपत्तियों को वक्फ घोषित नहीं किया जा सकेगा.
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यूपी में वक्फ संपत्तियों पर क्यों बढ़ा विवाद?
पिछले कुछ सालों में यूपी में वक्फ संपत्तियों के नाम पर बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां सामने आई हैं. कई मामलों में सरकारी और सार्वजनिक संपत्तियों को अवैध रूप से वक्फ घोषित कर दिया गया, जिससे सरकार को सख्त कदम उठाने पड़े. अब जिलाधिकारियों को आदेश दिया गया है कि अवैध रूप से वक्फ घोषित संपत्तियों की पहचान कर उन्हें जब्त किया जाए. इसके अलावा, वक्फ बोर्ड की संपत्तियों की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सभी संपत्तियों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा.
आपको बता दें कि कांग्रेस के नेतृत्व में पूरा विपक्ष वक्फ संशोधन बिल का विरोध कर रहा है. विपक्ष ने कहा है कि सरकार मुस्लिमों की संपत्ति कब्जा करने के उद्देश्य से यह संशोधन लेकर आई है. यूपी में समाजवादी पार्टी के चीफ अखिलेश यादव ने संसद में सरकार को घेरते हुए कहा है कि बीजेपी अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए ये बिल लाई है. अखिलेश यादव और सपा ने वक्फ संशोधन बिल को धर्मनिरपेक्षता और संविधान में निहित मूल तत्वों के खिलाफ बकाया है.
वक्फ बोर्ड के नाम पर जो भी अवैध संपत्ति है.उनको तोड़ा जायेगा.सरकार उनपर अपना कंट्रोल लेगी.यानि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार.मोदी सरकार खुद बुल्डोजर नीती से भी माफियाओं को खदेडने वाली है.अब आपको एक ऐसी कहानी बताते हैं. जो आपके होश उड़ा देगी.वक्फ बोर्ड के नाम पर जो मनमानी हिदुस्तान में चल रही है. वो मनमानी किसा भी मुस्लिम देश में नहीं है..यहांतक कि तुर्की और लीबीया जैसे देशों तक में वक्फ बोर्ड की जमीन का कोई ड्रामा नहीं है.हालांकि आजादी के बाद से ही.पंडित नेहरू का झुकाओं.एक मुसमानों के प्रति ज्यादा देखा गया. ये इसारे साफ दावा करते हैं कि,पंडित नेहरू की सरकार में कई हिंदू विरोधी कानून पारित करावाए गये. जैसे 370 से पहले कश्मीर भारत का होकर भी भारत का नहीं लगता था.ठीक वैसे ही वक्फ बोर्ड भी ऐसे ही है. लेकिन हिदुस्तान में चुनी हुई सरकार होती है. न्यायपालिका और कानून व्यवस्था है.फिर भी वक्फ बोर्ड कैसे बनाया गया.और इतनी ताकत क्यों दी गई ?.किसी की जमीन कोई एक इंच नहीं कब्जा कर सकता है.तो फिर वक्फ बोर्ड़ ने कैसे कई लाख करोड़ की जमीन पर कब्जा जमा लिया. वक्फ बोर्ड के कूनून में अगर बदलाव नहीं किए जाते तो एक दिन वक्फ बोर्ड हिंदुस्तान की ज्यादातर जमीनों पर कब्जा जमाता और हिंदुस्तानी ये सोचकर माथा पीटते कि, पंडित नेहरू ने मुसमानों के वक्फबोर्ड क्यों दिया. इसलिये सियासी तौर पर मोदी-शाह का ये फैसला हमेशा याद रखा जाने वाला है.
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