Delhi New CM: रेखा गुप्ता बनी दिल्ली की नई सीएम, इन बड़े फैक्टर्स की वजह से मारी बाजी
भाजपा ने शालीमार बाग से विधायक रेखा गुप्ता को दिल्ली का नया मुख्यमंत्री बनाने का फैसला किया है। प्रवेश वर्मा, वीरेंद्र सचदेवा, अभय वर्मा, आशीष सूद, रवींद्र राज और पवन शर्मा जैसे दिग्गज भी मुख्यमंत्री पद की दौड़ में थे, लेकिन पार्टी ने महिला नेतृत्व को प्राथमिकता दी। इस खबर में हम जानेंगे कि वो कौन से बड़े फैक्टर रहे, जिनकी वजह से रेखा गुप्ता ने दूसरे नेताओं को पीछे छोड़ दिया।
Delhi New CM: दिल्ली चुनाव के नतीजों के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर अटकलें खत्म हो गई हैं। भाजपा ने शालीमार बाग से विधायक रेखा गुप्ता के नाम पर मुहर लगाई है। हालांकि, उनकी राह आसान नहीं थी। मुख्यमंत्री पद की दौड़ में कई मजबूत नाम थे, जिनमें पार्टी के वरिष्ठ और प्रभावशाली नेताओं के साथ-साथ ऐसे चेहरे भी शामिल थे जो जातिगत और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रख सकें। लेकिन आखिरकार महिला नेतृत्व को प्राथमिकता देते हुए पार्टी ने रेखा गुप्ता को दिल्ली की कमान सौंप दी।
मुख्यमंत्री पद के लिए कई बड़े नाम चर्चा में थे। सबसे पहला नाम प्रवेश वर्मा का था जिन्होंने नई दिल्ली सीट से अरविंद केजरीवाल को हराया था। इसके अलावा भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा, लक्ष्मी नगर से विधायक अभय वर्मा, जनकपुरी से विधायक आशीष सूद, बवाना से विधायक रविंद्र राज और उत्तम नगर से विधायक पवन शर्मा भी इस दौड़ में थे। सबके अपने-अपने प्लस फैक्टर थे, लेकिन आखिर में रेखा गुप्ता को सीएम की कुर्सी मिल गई।
इन नामों पर भी हुई चर्चा
मुख्यमंत्री पद को लेकर चर्चा सिर्फ इन पांच नामों तक सीमित नहीं थी। 11 फरवरी को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने 10 नवनिर्वाचित विधायकों से मुलाकात की थी। इनमें विजेंद्र गुप्ता, अरविंदर सिंह लवली, अजय महावर, सतीश उपाध्याय, शिखा राय, अनिल शर्मा, डॉ. अनिल गोयल, कपिल मिश्रा और कुलवंत राणा शामिल थे। इनमें से तीन से चार चेहरे मुख्यमंत्री पद के लिए संभावित माने जा रहे थे। लेकिन जब अंतिम निर्णय लिया गया तो पार्टी नेतृत्व ने रेखा गुप्ता को सबसे उपयुक्त उम्मीदवार माना।
जाति और संगठनात्मक संतुलन एक महत्वपूर्ण कारक बन गया
भाजपा नेतृत्व ने मुख्यमंत्री के चयन में कई बातों को ध्यान में रखा। रेखा गुप्ता का बनिया समुदाय से आना, महिला होना और संगठन में उनकी मजबूत पकड़ ने उनके पक्ष में काम किया। वहीं, अभय वर्मा पूर्वांचल समुदाय का प्रतिनिधित्व कर रहे थे, आशीष सूद पंजाबी समुदाय से थे और लंबे समय से संगठन से जुड़े हुए थे। बवाना के विधायक रविंद्र राज दलित समुदाय से थे, जिसकी वजह से सामाजिक संतुलन बना रहा। संगठन में बड़े कद और नरेंद्र मोदी के करीबी होने की वजह से पवन शर्मा भी मजबूत दावेदार थे।
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राजनीति में लंबा अनुभव, संगठन में मजबूत पकड़
तेजतर्रार नेता रेखा गुप्ता को दिल्ली की कमान सौंपकर बीजेपी ने संकेत दिया है कि पार्टी राजधानी में महिला नेतृत्व को प्राथमिकता दे रही है। रेखा गुप्ता का राजनीतिक सफर लंबा और प्रभावशाली रहा है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी पढ़ाई पूरी की, जहां उन्होंने कॉमर्स में स्नातक किया। इसके बाद उन्होंने प्रबंधन और कला में मास्टर डिग्री हासिल की।
छात्र राजनीति से पार्षद और अब मुख्यमंत्री तक
रेखा गुप्ता का राजनीतिक करियर 1993 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) में शामिल होने से शुरू हुआ। 1996-97 में वे दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) की अध्यक्ष बनीं, जिसने छात्र राजनीति से लेकर मुख्यधारा की राजनीति तक उनके प्रभाव को बढ़ाया। इसके बाद उन्होंने स्थानीय राजनीति में प्रवेश किया और 2007 और 2012 में उत्तरी पीतमपुरा से नगर पार्षद चुनी गईं।
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संगठन में उनकी सक्रियता और अनुभव को देखते हुए बीजेपी ने उन्हें 2022 में दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के मेयर पद का उम्मीदवार बनाया था। हालांकि, उस समय वह यह चुनाव नहीं जीत पाई थीं। लेकिन 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में उन्होंने बड़ी जीत हासिल की। शालीमार बाग सीट से चुनाव लड़ते हुए उन्होंने आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार को 29,595 वोटों से हराया और विधानसभा में अपनी जगह बनाई।
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