Uttarakhand Crime News: अंकिता भंडारी हत्याकांड, विवादित ऑडियो क्लिप मामले में पूर्व विधायक सुरेश राठौर ने कोर्ट में दिए वॉयस सैंपल
Ankita Bhandari Case: उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े विवादित ऑडियो क्लिप प्रकरण में जांच एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। शनिवार को इस मामले से जुड़े पूर्व विधायक सुरेश राठौर हरिद्वार की अदालत में पेश हुए, जहां उन्होंने पुलिस के समक्ष अपने वॉयस सैंपल दिए। यह कार्रवाई न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम की निगरानी में की गई, ताकि जांच प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और कानूनी दायरे में रह सके। इस मामले को लेकर राज्यभर में पहले से ही राजनीतिक और सामाजिक हलकों में गहरी चर्चा चल रही है। ऐसे में वॉयस सैंपल की यह प्रक्रिया जांच के लिए बेहद अहम मानी जा रही है।
न्यायिक मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में हुई प्रक्रिया
शनिवार को पूर्व विधायक सुरेश राठौर न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम रोहित जोशी की अदालत में निर्धारित समय पर पेश हुए। अदालत की अनुमति के बाद पुलिस की फोरेंसिक टीम ने उनकी आवाज के नमूने रिकॉर्ड किए। यह पूरी प्रक्रिया अदालत परिसर में, तय कानूनी मानकों के तहत संपन्न कराई गई। फोरेंसिक टीम ने निर्धारित वाक्यों और शब्दों के माध्यम से सैंपल रिकॉर्ड किए, ताकि उनकी तुलना वायरल ऑडियो क्लिप में मौजूद आवाज से की जा सके। इन नमूनों को सील कर सुरक्षित किया गया है, जिससे किसी भी तरह की छेड़छाड़ की आशंका न रहे।
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चंडीगढ़ फोरेंसिक लैब भेजे जाएंगे सैंपल
एसआईटी (विशेष जांच टीम) के अनुसार, सुरेश राठौर के वॉयस सैंपल अब केंद्रीय विधि विज्ञान प्रयोगशाला (CFSL), चंडीगढ़ भेजे जाएंगे। वहीं इन सैंपल्स का वैज्ञानिक परीक्षण किया जाएगा। फोरेंसिक जांच के जरिए यह स्पष्ट करने का प्रयास किया जाएगा कि वायरल ऑडियो क्लिप में सुनाई दे रही आवाज वास्तव में सुरेश राठौर की है या नहीं। विशेषज्ञों द्वारा स्पेक्ट्रोग्राफिक एनालिसिस समेत आधुनिक तकनीकों का प्रयोग किया जाएगा, जिससे निष्कर्ष अदालत में प्रमाण के तौर पर प्रस्तुत किया जा सके।
इससे पहले अभिनेत्री उर्मिला सनावर दे चुकी हैं सैंपल
इस प्रकरण में इससे पहले अभिनेत्री उर्मिला सनावर भी जांच के दायरे में आ चुकी हैं। शुक्रवार को उन्होंने अदालत में पेश होकर न सिर्फ अपने वॉयस सैंपल दिए थे, बल्कि जांच के लिए अपना मोबाइल फोन भी कोर्ट में जमा कराया था। एसआईटी का मानना है कि वायरल ऑडियो क्लिप में जिन दो आवाजों का दावा किया जा रहा है, उनकी पुष्टि वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर ही की जा सकती है। इसी कारण दोनों पक्षों के वॉयस सैंपल अनिवार्य माने गए।
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चार अलग-अलग मुकदमे दर्ज, जांच में जुटी एसआईटी
अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े इस ऑडियो विवाद को लेकर हरिद्वार और देहरादून में कुल चार अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए गए हैं। इन मामलों की जांच एसपी सिटी हरिद्वार अभय प्रताप सिंह के नेतृत्व में गठित विशेष जांच टीम कर रही है। एसआईटी न केवल ऑडियो क्लिप की सत्यता की जांच कर रही है, बल्कि यह भी पता लगाने में जुटी है कि यह क्लिप किस उद्देश्य से वायरल की गई, इसके पीछे किसकी भूमिका थी और क्या इससे न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की गई।
एक दिन पहले मांगा था समय
गौरतलब है कि सुरेश राठौर को पहले ही अदालत में पेश होकर वॉयस सैंपल देने के लिए बुलाया गया था। हालांकि शुक्रवार को उन्होंने अस्वस्थता का हवाला देते हुए एक दिन का समय मांगा था, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया था। शनिवार को वे निर्धारित समय पर अदालत पहुंचे और जांच में पूरा सहयोग किया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण और सहयोगात्मक माहौल में संपन्न हुई।
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एसआईटी की जांच कई पहलुओं पर केंद्रित
एसआईटी इस मामले में केवल आवाज की पुष्टि तक सीमित नहीं है। जांच टीम यह भी देख रही है कि—
- ऑडियो क्लिप कब और कहां रिकॉर्ड की गई
- क्या क्लिप से छेड़छाड़ की गई है
- इसे सोशल मीडिया पर किसने और क्यों वायरल किया
- क्या इसका उद्देश्य जनभावनाएं भड़काना या केस की दिशा मोड़ना था
इन सभी पहलुओं की अलग-अलग तकनीकी और कानूनी जांच चल रही है।
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अंकिता भंडारी मामला पहले ही रहा है संवेदनशील
अंकिता भंडारी हत्याकांड उत्तराखंड के सबसे संवेदनशील मामलों में से एक रहा है। इस केस ने न केवल प्रदेश की राजनीति को झकझोरा, बल्कि न्याय व्यवस्था पर भी जनता की नजरें टिक गई थीं। पहले ही इस मामले में तीन आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई जा चुकी है, लेकिन समय-समय पर सामने आ रहे नए दावे और वायरल सामग्री एक बार फिर मामले को चर्चा के केंद्र में ले आते हैं। ऐसे में ऑडियो क्लिप की सच्चाई सामने आना बेहद जरूरी माना जा रहा है, ताकि भ्रम, अफवाह और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप पर विराम लग सके।
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क्या कहती है पुलिस
एसआईटी प्रभारी और एसपी सिटी हरिद्वार अभय प्रताप सिंह ने बताया कि वॉयस सैंपल विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजे जा रहे हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही अगली कार्रवाई तय की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष और तथ्य आधारित है तथा किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले वैज्ञानिक प्रमाणों का इंतजार किया जाएगा।
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अब रिपोर्ट पर टिकी निगाहें
फिलहाल पूरे मामले में अब सभी की नजरें फोरेंसिक रिपोर्ट पर टिकी हैं। यह रिपोर्ट तय करेगी कि वायरल ऑडियो क्लिप में किए गए दावे कितने वास्तविक हैं और कितने भ्रामक। एसआईटी का मानना है कि जांच के इस चरण के बाद मामले की दिशा काफी हद तक स्पष्ट हो जाएगी।

