Awarapan 2 Movie Review: Emraan Hashmi Returns as Shivam, Story, Action, Acting and Rating (pic-x)
Awarapan 2 Movie Review: इमरान हाशमी एक बार फिर अपने उसी पुराने अंदाज में लौटे हैं, जिसमें दर्द, गुस्सा, मोहब्बत और बदले की आग एक साथ नजर आती है। ‘आवारापन 2’ में एक बार फिर शिवम पंडित का किरदार कहानी के केंद्र में है। लंबे बाल, चेहरे पर दर्द और हाथों में बंदूक लिए यह घायल हीरो इस बार बैंकॉक की गलियों में एक नई मुसीबत से भिड़ता दिखाई देता है।
फिल्म की शुरुआत से ही इमरान हाशमी अपने किरदार पर मजबूत पकड़ बनाए रखते हैं। कहानी में एक्शन, क्राइम, इमोशन और सूफी रंग का संगीत है, जो पहले हाफ को काफी दिलचस्प बनाता है। हालांकि फिल्म जैसे-जैसे आगे बढ़ती है, कहानी की कमियां सामने आने लगती हैं और लंबा खिंचा तीसरा एक्ट इसकी रफ्तार (Awarapan 2 Movie Review) को काफी प्रभावित करता है।
क्या है ‘आवारापन 2’ की कहानी?
‘आवारापन 2‘ में इमरान हाशमी एक बार फिर शिवम पंडित के किरदार में नजर आते हैं। अगर आपने पहली फिल्म नहीं देखी है, तब भी कहानी समझने में ज्यादा परेशानी नहीं होगी। फिल्म में फ्लैशबैक के जरिए बताया जाता है कि शिवम ने अपने गैंगस्टर बॉस के साथ विश्वासघात क्यों किया था और जिस महिला से वह प्यार करता था, उसने उसकी जान बचाने के लिए अपनी जिंदगी कुर्बान कर दी थी।
इस बार शिवम का सामना मानव तस्करी करने वाले एक गिरोह से होता है। वह एक छोटी बच्ची को इस गिरोह के चंगुल से बचाने के मिशन पर निकलता है। रास्ते में उसका सामना कई खतरनाक अपराधियों से होता है। कहानी में पुराने दर्द और नए मिशन को जोड़कर शिवम के किरदार को आगे बढ़ाया (Awarapan 2 Movie Review) गया है।
बैंकॉक की लोकेशन और शानदार एक्शन
फिल्म का बड़ा हिस्सा बैंकॉक में सेट किया गया है और निर्देशक ने शहर की लोकेशन का अच्छा इस्तेमाल किया है। पहले हाफ में बैंकॉक की गलियां, एक्शन सीक्वेंस और अपराध की दुनिया कहानी को एक अलग (Awarapan 2 Movie Review) माहौल देते हैं।
फिल्म की सिनेमैटिक प्रस्तुति काफी स्टाइलिश है। कई एक्शन सीन और विजुअल सीक्वेंस आंखों को आकर्षित करते हैं। यही वजह है कि कहानी में कुछ कमियां होने के बावजूद फिल्म का पहला हिस्सा (Awarapan 2 Movie Review) दर्शकों को जोड़े रखने में कामयाब रहता है।
इमरान हाशमी फिर बने घायल हीरो
शिवम पंडित के किरदार में इमरान हाशमी एक बार फिर सहज नजर आते हैं। उम्र बढ़ने के बावजूद उनके किरदार का दर्द और अंदाज पहले जैसा ही रखा गया है। शिवम सिर्फ एक खतरनाक शूटर नहीं है, बल्कि उसके अंदर एक भावुक और घायल इंसान भी छिपा है। इमरान इस विरोधाभास को अपने अभिनय से अच्छी तरह सामने लाते हैं। एक्शन दृश्यों में उनका अंदाज दमदार है, वहीं भावुक पलों में भी वह किरदार की गंभीरता बनाए रखते हैं। फिल्म को लगातार आगे बढ़ाने में उनकी मौजूदगी सबसे बड़ी (Awarapan 2 Movie Review) वजहों में से एक है।
विलेन के रूप में पूरन गैब्बी का असर
फिल्म में पूरन गैब्बी ने जोरावर का किरदार निभाया है। वह एक बेहद हिंसक और बेरहम गैंगस्टर के रूप में सामने आते हैं। लंबा ट्रेंच कोट, अलग हेयरस्टाइल और आंखों में खतरनाक चमक उनके किरदार को एक खास लुक देती है। उनका किरदार भले ही अपराधी दुनिया के पुराने फार्मूले पर बना हो, लेकिन गैब्बी इसे प्रभावशाली बनाने में कामयाब रहते हैं।
सुविंदर विक्की भी गैंगस्टर की भूमिका में नजर आते हैं। हालांकि उनका अभिनय शानदार है, लेकिन किरदार को उनकी वास्तविक अभिनय क्षमता के हिसाब से ज्यादा गहराई नहीं दी गई है। विजयंत कोहली भी विलेन के रूप में ध्यान खींचते हैं। उन्हें पहली बार (Awarapan 2 Movie Review) देखने वाले दर्शकों के लिए उनका किरदार खासा दिलचस्प हो सकता है।
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शबाना आजमी और दिशा पाटनी की भूमिका
शबाना आजमी फिल्म में नफीसा के किरदार में दिखाई देती हैं। उनका किरदार कहानी में एक मजबूत प्रतिद्वंद्वी के तौर पर आता है। हालांकि फिल्म के दूसरे हिस्से में कहानी कमजोर पड़ने लगती है और यहीं यह महसूस होता है कि शबाना आजमी जैसे शानदार कलाकार के किरदार को और ज्यादा जगह मिलनी चाहिए थी।
दिशा पाटनी जोरावर की बहन जारा का किरदार निभाती हैं। उनका किरदार अपने अपराधी अतीत से बाहर निकलना चाहता है। इमरान हाशमी के साथ उनके कुछ भावनात्मक सीन भी हैं। इसके अलावा उन्हें सेलो बजाते हुए दिखाया गया है, जो किरदार को (Awarapan 2 Movie Review) एक अलग रंग देता है।
संगीत कहानी को कितना मजबूत करता है?
फिल्म में सूफी रंग का संगीत लगातार सुनाई देता है। हालांकि यह संगीत कहानी का अहम हिस्सा बनने के बजाय ज्यादातर बैकग्राउंड में ही रहता है। फिर भी फिल्म के माहौल के साथ यह संगीत अच्छी तरह फिट (Awarapan 2 Movie Review) बैठता है और शिवम के दर्द भरे किरदार को सपोर्ट करता है।
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सेकेंड हाफ में क्यों कमजोर पड़ती है फिल्म?
फिल्म का पहला हिस्सा काफी बेहतर तरीके से चलता है। एक्शन, क्राइम, बैंकॉक की लोकेशन और किरदारों का परिचय कहानी को रफ्तार देते हैं। लेकिन सेकेंड हाफ में कहानी की कमियां धीरे-धीरे सामने आने लगती हैं। स्क्रीनप्ले में कुछ जगह लॉजिक कमजोर पड़ता है और कहानी की गति भी प्रभावित होती है। सबसे बड़ी समस्या फिल्म का तीसरा एक्ट है। यह हिस्सा जरूरत से ज्यादा लंबा और उबाऊ महसूस होता है। यही लंबा क्लाइमैक्स फिल्म के पहले हिस्से में बनाए गए प्रभाव को काफी (Awarapan 2 Movie Review) हद तक कम कर देता है।
कैसी है ‘आवारापन 2’?
कुल मिलाकर ‘आवारापन 2’ इमरान हाशमी के फैंस को शुरुआत में अच्छा अनुभव देती है। फिल्म में स्टाइलिश एक्शन, क्राइम थ्रिलर का माहौल, दमदार लोकेशन और इमरान का जाना-पहचाना दर्द भरा किरदार मौजूद है। पहला हाफ फिल्म की सबसे मजबूत कड़ी है, जबकि सेकेंड हाफ में स्क्रीनप्ले कमजोर होने लगता है। खासकर लंबा तीसरा एक्ट फिल्म की (Awarapan 2 Movie Review) सबसे बड़ी कमजोरी बन जाता है।
इमरान हाशमी पूरी फिल्म को संभालकर रखते हैं और उनका शिवम पंडित एक बार फिर दर्शकों को अपने दर्द से जोड़ने में सफल होता है। लेकिन अगर क्लाइमैक्स ज्यादा छोटा और असरदार होता, तो फिल्म का प्रभाव कहीं बेहतर हो सकता था।
कुल मिलाकर, ‘आवारापन 2’ एक स्टाइलिश क्राइम एक्शन फिल्म है, जो अपने दमदार पहले हाफ और इमरान हाशमी के अभिनय के कारण देखने लायक बनती है, लेकिन कमजोर और लंबा तीसरा एक्ट इसकी चमक (Awarapan 2 Movie Review) फीकी कर देता है।

