
Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राजनीति में हलचल लगातार तेज हो रही है। हर दिन कोई न कोई नेता पाला बदल रहा है। इस बार कैमूर जिले से भारतीय जनता पार्टी (BJP) को बड़ा झटका लगा है। पार्टी के दो कद्दावर पूर्व विधायक चैनपुर से बृज किशोर बिंद और मोहनियां से निरंजन राम ने बीजेपी छोड़कर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की सदस्यता ग्रहण कर ली है।
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तेजस्वी यादव का मिला साथ
पूर्व उपमुख्यमंत्री और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने इन दोनों नेताओं का स्वागत किया। सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीरें भी साझा की गईं, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई। माना जा रहा है कि इन दोनों नेताओं के आने से कैमूर जिले में आरजेडी की पकड़ मजबूत हो जाएगी और बीजेपी को चुनावी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
क्यों नाराज थे बृज किशोर बिंद?
बृज किशोर बिंद का नाम चैनपुर क्षेत्र में काफी प्रभावशाली माना जाता है। वे लगातार तीन बार विधायक रह चुके हैं और दो बार मंत्री पद भी संभाल चुके हैं। 2020 में जब चैनपुर सीट बीजेपी से छिनकर जेडीयू के खाते में चली गई, तभी से बृज किशोर बिंद पार्टी से खफा थे। उन्हें डर था कि इस बार भी यह सीट उनके हाथ से निकल सकती है। यही कारण है कि उन्होंने आरजेडी का दामन थाम लिया। अब चर्चा है कि वे चैनपुर से आरजेडी के टिकट पर चुनाव लड़ सकते हैं।
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निरंजन राम का नया दांव
मोहनियां सीट से दो बार विधायक रह चुके निरंजन राम ने भी बीजेपी छोड़ दी। पिछली बार वह आरजेडी की संगीता कुमारी से हार गए थे। लेकिन हाल ही में संगीता कुमारी बीजेपी में शामिल हो गईं। इससे निरंजन राम को अपनी दावेदारी कमजोर लगने लगी। उन्होंने आरजेडी में लौटकर अपने राजनीतिक भविष्य को सुरक्षित करने की कोशिश की है। अगर उन्हें टिकट मिलता है, तो मोहनियां में मुकाबला दिलचस्प होगा।
बीजेपी की प्रतिक्रिया
इस दलबदल पर अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री जमा खान ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि एनडीए बहुत बड़ा गठबंधन है और इन नेताओं को पार्टी में पूरा सम्मान दिया गया था। उनके जाने से पार्टी पर कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा। लेकिन राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि कैमूर की दोनों सीटों पर इसका असर साफ दिखाई देगा।
चुनावी समीकरण बदल सकते हैं
चैनपुर क्षेत्र बिंद समाज का गढ़ माना जाता है। बृज किशोर बिंद अगर आरजेडी से मैदान में उतरते हैं, तो बीजेपी के लिए सीट बचाना मुश्किल हो सकता है। वहीं मोहनियां में निरंजन राम की लोकप्रियता आज भी कायम है। अगर आरजेडी ने उन्हें टिकट दिया, तो बीजेपी और आरजेडी के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिलेगा।
नतीजा क्या होगा?
बिहार चुनाव से पहले नेताओं के इस दलबदल ने साफ कर दिया है कि इस बार चुनावी जंग और भी रोमांचक होगी। आरजेडी को दो मजबूत चेहरों का सहारा मिल गया है, वहीं बीजेपी को अब नए सिरे से रणनीति बनानी होगी। कैमूर जिले की दोनों सीटों पर नजरें टिकी रहेंगी, क्योंकि यहीं से दोनों दलों की ताकत का अंदाजा लगेगा।
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