Bihar Election 2025: महागठबंधन के गढ़ में NDA की रणनीति, औवैसी की पार्टी से समीकरण बदलने की संभावना
Bihar Election 2025: बिहार के किशनगंज जिले में विधानसभा चुनाव से पहले सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं। पिछले चुनावों में महागठबंधन का गढ़ माने जाने वाले इस जिले में इस बार एनडीए पूरी ताकत से मैदान में है। एआइएमआइएम के चुनाव लड़ने की संभावना से महागठबंधन के वोट बंटने का डर भी बना हुआ है, जिसका सीधा फायदा NDA को हो सकता है। ठाकुरगंज और बहादुरगंज जैसी सीटों पर कांग्रेस का ऐतिहासिक दबदबा रहा है, लेकिन पिछली बार के चुनाव परिणाम इस समीकरण को बदल चुके हैं।
किशनगंज जिले की चार विधानसभा सीटों में से दो पर महागठबंधन ने पिछली बार जीत दर्ज की थी, जबकि दो सीटें एआइएमआइएम के खाते में गई थीं। बाद में एआइएमआइएम के दो विधायक राजद में शामिल हो गए, जिससे महागठबंधन का प्रभाव चारों सीटों पर बन गया। लेकिन इस बार स्थिति बदल सकती है, क्योंकि एनडीए अब पूरी ताकत से चुनाव मैदान में उतर रहा है और औवेसी की पार्टी के स्वतंत्र चुनाव लड़ने से महागठबंधन के समीकरणों में सेंध लग सकती है।
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किशनगंज में एआइएमआइएम का प्रभाव
पिछले चुनाव में किशनगंज सदर सीट से कांग्रेस के इजहारूल हुसैन ने भाजपा प्रत्याशी स्वीटी सिंह को केवल 1381 वोट से हराया था। एआइएमआइएम के कमरूल होदा तीसरे स्थान पर रहे थे। वहीं ठाकुरगंज सीट पर कांग्रेस का वर्चस्व 1952 से रहा है, लेकिन 2020 में राजद के सऊद आलम ने स्वतंत्र प्रत्याशी गोपाल कुमार अग्रवाल को करीब 23 हजार वोटों से हराया। एआइएमआइएम के महबूब आलम चौथे स्थान पर रहे थे।
ठाकुरगंज में एनडीए की तैयारी
ठाकुरगंज में जदयू के नौशाद आलम तीसरे स्थान पर रहे थे। इस बार एनडीए ने इस सीट पर पूरी ताकत झोंक दी है। पूर्व विधायक गोपाल कुमार अग्रवाल, जो पहले सपा से चुनाव जीत चुके हैं, हाल ही में जदयू में शामिल हुए हैं और यहां से अपनी मजबूत दावेदारी पेश कर रहे हैं। हाल ही में ठाकुरगंज के गांधी मैदान में एनडीए के कार्यकर्ता सम्मेलन में नेताओं ने कार्यकर्ताओं को जोश से भर दिया।
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बहादुरगंज का कांग्रेस गढ़
बहादुरगंज विधानसभा सीट पर कांग्रेस का ऐतिहासिक दबदबा रहा है। 16 में से 10 बार कांग्रेस ने यहां जीत दर्ज की है। हालांकि 2020 में एआइएमआइएम के मोहम्मद अंजार नईमी ने विकासशील इंसान पार्टी के लखन लाल पंडित को हराकर कांग्रेस का गढ़ तोड़ दिया। नईमी अब राजद में शामिल हो चुके हैं और इस बार राजद से उम्मीदवार हो सकते हैं। एनडीए भी यहां से मजबूत प्रत्याशी उतारने की रणनीति बना रहा है।
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कोचाधामन में बदलते समीकरण
कोचाधामन विधानसभा सीट 2008 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई थी। अब तक तीन चुनाव हुए हैं और हर बार नए चेहरे को जीत मिली है। 2010 में राष्ट्रीय जनता दल के अख्तारुल ईमान ने जदयू के मुजाहिद आलम को हराया। 2014 के उपचुनाव में मुजाहिद आलम ने जदयू के टिकट से जीत दर्ज की, जबकि 2015 में भी विधायक बने। अब उन्होंने जदयू छोड़कर राजद का दामन थामा है। एनडीए इस सीट को अपनी संभावित जीत के अवसर के रूप में देख रहा है।

