Sanatan Hindu Ekta Padyatra 2.0: जो सनातनी नहीं, वह तनातनी है… धीरेंद्र शास्त्री ने दिल्ली से सनातन हिंदू एकता पदयात्रा 2.0 का किया शुभारंभ

Sanatan Hindu Ekta Padyatra 2.0: 7 नवंबर को बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने दिल्ली में सनातन हिंदू एकता पदयात्रा 2.0 का भव्य शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और समर्थकों को संबोधित किया और इस पदयात्रा के उद्देश्य, महत्व और इसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि भारत में रहने वाला प्रत्येक व्यक्ति सनातनी है और जो व्यक्ति सनातनी नहीं है, वह मानसिक और सामाजिक रूप से तनावग्रस्त है। उन्होंने अपने संबोधन में कहा, “जो सनातनी नहीं है, वह तनातनी है। हमें अपने संस्कारों, धर्म और संस्कृति को पहचानना होगा और इसके लिए हमें एकजुट होना होगा।”
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पदयात्रा का उद्देश्य और महत्व

सनातन हिंदू एकता पदयात्रा 2.0 का मुख्य उद्देश्य भारत में फैले जातिवाद को समाप्त करना और एकता व भाईचारे को बढ़ावा देना है। धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि यह यात्रा केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक वैचारिक क्रांति है। उन्होंने बताया कि यह पदयात्रा लगभग 150 किलोमीटर लंबी होगी और इसे 16 नवंबर तक सफलतापूर्वक पूरा किया जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि पदयात्रा के माध्यम से हिंदुओं में डर और भय का नाश होगा और उन्हें एकजुट होकर अपने धर्म, संस्कृति और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी निभाने की प्रेरणा मिलेगी। इस यात्रा के दौरान गली-गली, मोहल्ला-मोहल्ला जागरूकता फैलाने के साथ ही सनातन धर्म की ताकत और एकता का संदेश भी साझा किया जाएगा।
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जातिवाद और राष्ट्रवाद
धीरेंद्र शास्त्री ने पदयात्रा के संदर्भ में कहा कि भारत में जातियां रह सकती हैं, लेकिन जाति का अभिमान नहीं होना चाहिए। उनका यह भी मानना है कि अगर हिंदू एकजुट नहीं होंगे, तो भारत को हिंदू राष्ट्र के रूप में स्थापित करना संभव नहीं होगा। उन्होंने कहा, “7 नवंबर वह दिन है जब वैचारिक क्रांति की यात्रा शुरू होगी, और यह यात्रा केवल हिंदुओं के डर को दूर करने और उनकी एकता बढ़ाने के लिए है।”
धर्मनिरपेक्ष दृष्टिकोण
धीरेंद्र शास्त्री ने साफ शब्दों में कहा कि यह पदयात्रा किसी धर्म या समुदाय के खिलाफ नहीं है। उन्होंने उल्लेख किया कि “हमें मुसलमानों से कोई समस्या नहीं है, हमें ईसाइयों से कोई समस्या नहीं है। हमारी चिंता केवल उन लोगों से है जो गजवा-ए-हिंद का आह्वान करते हैं। ऐसे में हम अपने धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए भगवा-ए-हिंद के रूप में खड़े होंगे।”
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर फ्रांस और इंग्लैंड जैसे देशों के लोग अपने देश और संस्कृति की रक्षा के लिए सड़कों पर उतर सकते हैं, तो भारतीय क्यों अपने भारत और सनातन धर्म की रक्षा के लिए जागरूक और सक्रिय नहीं होंगे।
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श्रद्धालुओं की भागीदारी और उत्साह
इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे और उन्होंने धीरेंद्र शास्त्री के संदेश को गले लगाया। पदयात्रा में शामिल लोग इस यात्रा को केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि देशभक्ति और संस्कृति की जागरूकता के रूप में मानते हैं।
पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने समापन में कहा कि यह यात्रा न केवल हिंदुओं की एकता को मजबूत करेगी बल्कि भारत की सनातन संस्कृति और उसकी ताकत को भी दुनिया के सामने प्रदर्शित करेगी। उन्होंने सभी को एकजुट होने और इस यात्रा में शामिल होने का आह्वान किया।

