NCRB Crime Report: हर दिन हो रही बेटियों की मौत, लेकिन सजा से कैसे बच जाते हैं आरोपी?
Dowry Death cases in India: भारत में दहेज प्रथा आज भी महिलाओं के लिए बड़ी समस्या बनी हुई है। हर साल हजारों महिलाएं दहेज की मांग, मानसिक प्रताड़ना और घरेलू हिंसा का शिकार होती हैं। कई मामलों में उनकी मौत तक हो जाती है। हाल ही में भोपाल और नोएडा से सामने आए दहेज हत्या के मामलों ने पूरे देश को झकझोर दिया है। इन घटनाओं के बाद एक बार फिर सवाल उठ रहा है कि आखिर इतने सख्त कानून होने के बावजूद दहेज हत्या के मामलों में दोषियों को सजा क्यों नहीं मिल पाती। (Dowry Harassment Cases)
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दहेज हत्या कानून क्या कहता है
भारत में दहेज से जुड़े अपराधों को रोकने के लिए कई कानून बनाए गए हैं। भारतीय न्याय संहिता की धारा 80, जो पहले आईपीसी की धारा 304-B थी, दहेज हत्या के मामलों पर लागू होती है। अगर शादी के सात साल के अंदर महिला की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत होती है और उसे दहेज के लिए परेशान किया गया हो, तो इसे दहेज हत्या माना जाता है। इसके अलावा धारा 85 यानी पुरानी धारा 498-A महिलाओं को दहेज प्रताड़ना से सुरक्षा देती है। दहेज प्रतिषेध अधिनियम 1961 में दहेज लेना और देना दोनों अपराध माना गया है।
NCRB आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता देशभर
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो यानी NCRB के आंकड़े बताते हैं कि देश में हर साल हजारों दहेज हत्या के मामले दर्ज होते हैं। साल 2019 में देशभर में 7,141 मामले दर्ज किए गए थे। इसके बाद 2020 में 6,966 और 2021 में 6,753 मामले सामने आए। आंकड़ों में थोड़ी कमी जरूर दिखी, लेकिन यह संख्या अब भी बेहद गंभीर है। हर दिन कई महिलाएं दहेज की वजह से अपनी जान गंवा रही हैं। (Dowry Death Cases NCRB)
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आधे मामलों में नहीं मिलती सजा
सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि दहेज हत्या के अधिकतर मामलों में दोषियों को सजा नहीं मिल पाती। NCRB के मुताबिक 2021 में देशभर में दर्ज 6,753 मामलों में से सिर्फ 2,252 मामलों की सुनवाई पूरी हो सकी। यानी करीब 67 प्रतिशत मामले अभी भी अदालतों में लंबित हैं। इनमें से केवल 964 मामलों में दोषियों को सजा मिली। इससे साफ है कि बड़ी संख्या में पीड़ित परिवार आज भी इंसाफ का इंतजार कर रहे हैं। (India Dowry Death News)
यूपी बिहार में सबसे ज्यादा मामले
दहेज हत्या के सबसे ज्यादा मामले उत्तर प्रदेश और बिहार से सामने आते हैं। उत्तर प्रदेश में 2021 में 2,222 मामले दर्ज किए गए थे। वहीं बिहार में लगभग 1,000 मामले सामने आए। इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और पश्चिम बंगाल भी उन राज्यों में शामिल हैं जहां दहेज हत्या के मामले लगातार सामने आते रहते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सामाजिक दबाव, पुरानी सोच और आर्थिक लालच इसकी बड़ी वजह हैं। (Dowry deaths in Uttar Pradesh)
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बिहार में सबसे ज्यादा सजा दर
हालांकि मामलों की संख्या ज्यादा होने के बावजूद कुछ राज्यों में सजा की दर बेहतर रही। NCRB के अनुसार बिहार में दहेज हत्या के मामलों में सबसे ज्यादा 71.5 प्रतिशत सजा दर दर्ज की गई। झारखंड दूसरे स्थान पर रहा जहां लगभग 58 प्रतिशत मामलों में दोषियों को सजा मिली। उत्तर प्रदेश में भी करीब 58 प्रतिशत मामलों में सजा सुनाई गई। वहीं कई राज्यों में यह दर काफी कम रही, जिससे यह साफ होता है कि जांच और अदालत की प्रक्रिया में कई कमियां हैं। (Dowry cases in Bihar)
कमजोर सबूत बनते बड़ी परेशानी वजह
विशेषज्ञों के मुताबिक दहेज हत्या के मामलों में सजा नहीं मिलने की सबसे बड़ी वजह कमजोर सबूत होते हैं। कई बार परिवार और गवाह अदालत में बयान बदल देते हैं। कुछ मामलों में पुलिस जांच भी सही तरीके से नहीं हो पाती। लंबे समय तक केस चलने के कारण गवाह टूट जाते हैं और पीड़ित परिवार आर्थिक व मानसिक रूप से कमजोर हो जाता है। इसी कारण कई आरोपी कानून से बच निकलते हैं। (IPC 304B dowry death)
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भोपाल नोएडा केस ने मचाई हलचल
हाल ही में भोपाल और नोएडा से सामने आए दहेज हत्या के मामलों ने देशभर में चर्चा छेड़ दी। नोएडा की एक महिला की शादी के करीब डेढ़ साल बाद संदिग्ध मौत हो गई। परिवार ने ससुराल वालों पर दहेज प्रताड़ना और हत्या का आरोप लगाया। वहीं भोपाल में एक मॉडल और अभिनेत्री की मौत के मामले में भी दहेज उत्पीड़न के आरोप लगे हैं। पुलिस ने जांच के लिए विशेष टीम बनाई है और मामले की जांच जारी है।
समाज बदलने से ही रुकेगी दहेज प्रथा
कानून सख्त होने के बावजूद दहेज प्रथा पूरी तरह खत्म नहीं हो पाई है। केवल कानून बनाने से समस्या खत्म नहीं होगी, इसके लिए समाज की सोच बदलनी जरूरी है। बेटियों को बोझ समझने की मानसिकता खत्म करनी होगी। परिवारों को दहेज लेने और देने दोनों का विरोध करना होगा। जब समाज मिलकर इस बुराई के खिलाफ खड़ा होगा तभी दहेज हत्या जैसी घटनाओं पर रोक लग सकेगी और महिलाओं को सुरक्षित जीवन मिल पाएगा। (NCRB crime against women)

