Economic inequality in India: आधी आबादी के पास ₹3.5 लाख से भी कम संपत्ति
भारत में संपत्ति असमानता बढ़ती जा रही है, जहां देश की 50% आबादी के पास ₹3.5 लाख से भी कम संपत्ति है। वहीं, अरबपतियों की संख्या और उनकी संपत्ति लगातार बढ़ रही है, जिससे आर्थिक विभाजन गहरा हो रहा है। इस असमानता को कम करने के लिए शिक्षा, कर सुधार और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं पर ध्यान देना जरूरी है।
Economic inequality in India: हाल ही में जारी एक रिपोर्ट ने भारत में बढ़ती आर्थिक असमानता को उजागर किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, देश की 50% आबादी के पास व्यक्तिगत संपत्ति ₹3.5 लाख से कम है। यह आंकड़ा बताता है कि देश में संपत्ति का बड़ा हिस्सा एक छोटे से वर्ग के पास केंद्रित है, जबकि लाखों लोग बुनियादी आर्थिक सुरक्षा से जूझ रहे हैं।
संपत्ति वितरण में असमानता का खुलासा
आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में संपत्ति का असमान वितरण एक गंभीर मुद्दा है। जहां आधी आबादी के पास ₹3.5 लाख से भी कम की संपत्ति है, वहीं देश के शीर्ष अरबपतियों की संपत्ति लगातार बढ़ रही है। इस असमानता की वजह से समाज में आर्थिक विभाजन बढ़ रहा है, जिससे मध्यम और निम्न वर्ग के लोगों के लिए वित्तीय स्थिरता पाना मुश्किल होता जा रहा है।
भारत के अरबपतियों की बढ़ती संपत्ति
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में अमीरों की संपत्ति लगातार बढ़ रही है। कुछ प्रमुख आंकड़े इस प्रकार हैं:
एचसीएल टेक्नोलॉजीज की चेयरपर्सन रोशनी नादर की कुल संपत्ति ₹3.5 लाख करोड़ के करीब पहुंच गई है, जिससे वह दुनिया की सबसे अमीर महिलाओं में शामिल हो गई हैं।
रिलायंस इंडस्ट्रीज के प्रमुख मुकेश अंबानी की संपत्ति ₹8.6 लाख करोड़ है, जो उन्हें एशिया का सबसे अमीर व्यक्ति बनाती है।
भारत में कुल अरबपतियों की संख्या 284 के पार पहुंच चुकी है, और इनकी कुल संपत्ति देश की जीडीपी का एक बड़ा हिस्सा है।
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आर्थिक असमानता के दुष्प्रभाव
संपत्ति के इस असमान वितरण से कई गंभीर चुनौतियां पैदा होती हैं:
शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित पहुंच: निम्न और मध्यम वर्ग के लोग गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित रह जाते हैं।
रोजगार के अवसरों में असमानता: बड़े उद्योगों और कॉर्पोरेट सेक्टर में अवसर सीमित होने से आर्थिक असंतुलन बढ़ता है।
गरीबी और सामाजिक असंतोष: जब संपत्ति का बड़ा हिस्सा कुछ लोगों तक सीमित होता है, तो समाज में असंतोष और असमानता बढ़ती है।
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संतुलन लाने के लिए संभावित समाधान
शिक्षा और कौशल विकास: सरकार को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और तकनीकी प्रशिक्षण को प्राथमिकता देनी चाहिए ताकि निम्न वर्ग के लोगों को बेहतर रोजगार मिल सके।
न्यायसंगत कर प्रणाली: उच्च आय वाले व्यक्तियों और कंपनियों पर प्रभावी कर प्रणाली लागू करनी चाहिए, जिससे गरीबों के लिए कल्याणकारी योजनाएं चलाई जा सकें।
स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा: सभी नागरिकों को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करानी चाहिए।
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स्टार्टअप और लघु उद्योगों को बढ़ावा: छोटे और मध्यम उद्यमों को सहयोग देकर आर्थिक असमानता को कम किया जा सकता है।
भारत में संपत्ति की असमानता एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। जहां एक ओर अरबपतियों की संख्या बढ़ रही है, वहीं आधी आबादी के पास ₹3.5 लाख से भी कम की संपत्ति है। इस अंतर को कम करने के लिए सरकार, उद्योग जगत और समाज को मिलकर काम करना होगा, ताकि आर्थिक विकास सभी वर्गों तक पहुंच सके और भारत एक संतुलित और समावेशी अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ सके।
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