Haq Review: फिल्म ‘हक’ में दम तो है, पर परफेक्ट नहीं! इन 5 बातों ने बिगाड़ दिया यामी-इमरान का जादू

Haq Review: यामी गौतम और इमरान हाशमी स्टारर फिल्म ‘हक’ ने अपनी दमदार कहानी और साहसिक विषय के कारण दर्शकों का ध्यान तो खींचा है, लेकिन यह फिल्म पूरी तरह परफेक्ट साबित नहीं हुई। सुपर्णा वर्मा के निर्देशन में बनी यह फिल्म 7 नवंबर को रिलीज हुई और शाहबानो केस से प्रेरित बताई जा रही है। सामाजिक न्याय और महिला अधिकार जैसे संवेदनशील मुद्दे पर बात करती यह फिल्म हर मायने में चर्चाओं में है, मगर इसकी स्क्रिप्ट और ट्रीटमेंट में कुछ कमियां हैं, जो इसे एक “मास्टरपीस” बनने से रोक देती हैं।

जहां यामी गौतम ने अपनी एक्टिंग से दिल जीता है, वहीं इमरान हाशमी के किरदार से लेकर फिल्म की रफ्तार तक, कई पहलुओं पर दर्शकों ने सवाल उठाए हैं। आइए जानते हैं फिल्म ‘हक’ की वो 5 बड़ी कमियां, जिनकी वजह से यह फिल्म अपने असर को खोती नजर आती है.
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फिल्म की रफ्तार सबसे बड़ी कमजोरी
‘हक’ का विषय गंभीर और संवेदनशील है, लेकिन इसकी धीमी रफ्तार दर्शकों का धैर्य तोड़ देती है। कई सीक्वेंस इतने खिंचे हुए लगते हैं कि कहानी की धार कमजोर पड़ जाती है। फिल्म का रनटाइम अनावश्यक रूप से लंबा महसूस होता है, जिससे इसका प्रभाव फीका पड़ जाता है। एक समय के बाद कहानी में वो जुड़ाव नहीं रह जाता, जो शुरुआत में दिखता है।
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इमरान हाशमी के किरदार में स्पष्टता की कमी
इमरान हाशमी ने अब्बास खान के किरदार को निभाने की पूरी कोशिश की, लेकिन फिल्म की स्क्रिप्ट उनके साथ न्याय नहीं कर पाई। किरदार न तो पूरी तरह नकारात्मक लगता है, न ही नायक की तरह उभरता है। उसके इरादों और सोच में स्पष्टता की कमी है, जिससे दर्शक उसके साथ जुड़ नहीं पाते। बेहतर लेखन से अब्बास खान एक यादगार रोल बन सकता था।
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सपोर्टिंग कास्ट का अधूरा इस्तेमाल
हर मजबूत कहानी के लिए सहायक किरदारों की अहम भूमिका होती है, लेकिन ‘हक’ में यह पहलू कमजोर दिखा। वर्तिका सिंह जैसी प्रतिभाशाली अभिनेत्री को सीमित स्क्रीन टाइम दिया गया। दूसरी पत्नी ‘आयशा’ का किरदार प्रभावी होते हुए भी कहानी में गहराई नहीं पा सका। बाकी सहायक किरदारों का भी उपयोग अधूरा लगता है, जो फिल्म के भावनात्मक पहलू को कमजोर करता है।
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जरूरत से ज्यादा ड्रामा
फिल्म का सब्जेक्ट अपने आप में इतना मजबूत है कि उसे प्रभावशाली बनाने के लिए ऊंचे सुरों की जरूरत नहीं थी। लेकिन कई सीनों में मेकर्स ने जरूरत से ज्यादा ड्रामा डाल दिया जैसे शाजिया के पिता का सामाजिक बहिष्कार या पड़ोसियों की टिप्पणियां। ये सीक्वेंस कहानी की गंभीरता से ध्यान भटका देते हैं और फिल्म को बनावटी बना देते हैं।
अनावश्यक लव स्टोरी का ट्रैक
‘हक’ की कहानी सामाजिक मुद्दे पर केंद्रित है, लेकिन मेकर्स ने बीच-बीच में इसे लव स्टोरी की दिशा में मोड़ दिया। शाजिया का अपने पति के लिए बार-बार ‘मैं उससे प्यार करती हूं’ कहना, कहानी की गहराई को कम कर देता है। यह रोमांटिक एंगल कहानी के मूल विषय से भटकाता है और दर्शक को कन्फ्यूज करता है।
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