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Hathras Stampede: उत्तर प्रदेश के हाथरस में हुआ सत्संग कांड हादसे में 122 लोगों की मौत के बाद पूरा देश सदमे में है जिसे लेकर अब सर्च वारंट भी जारी कर दिया गया है। पुलिस इस मामले में FIR दर्ज कर चुकी है। इस पुरे मामले में गुनहगार को खोजने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। दरअसल सूरजपाल उर्फ भोले बाबा के आश्रम में अचानक से आधी रात को मैनपुरी पुलिस ने छापेमारी की, इस छापेमारी के दौरान एसपी सिटी के साथ कई पुलिस अधिकारी और पुलिस टीम आश्रम में पहुंची थी। पुलिस करीबन 1 घंटे से ज्यादा वक्त तक आश्रम में रही और सही से जांच पड़ताल की। पुलिस आश्रम से बाहर निकली तो उन्होंने एक ही बात कहा कि वह सुरक्षा व्यवस्था को लेकर वहां देखने गई थी और बाबा अंदर नहीं है। अंदर से 50-60 महिलाएं और पुरुष है, जो बाबा के भक्त हैं और उनका सेवा करते हैं।
एक घंटे तक चली इस तलाशी को लेकर अब पुलिस भी कटघरे में खड़ी है क्योंकि पुलिस से भी लोग काफी सवाल पूछ रहे हैं। जैसे की आप क्या बाबा से पूछताछ करने के लिए आश्रम में आए थे, तो पुलिस में सीधे तौर पर इंकार कर दिया है जिसे लेकर और भी कई सवाल खड़े हो गए हैं। एक सवाल तो यह भी सामने आ रहा है कि हाथरस घटना के बाद बाबर के आश्रम के चारों तरफ पुलिस की चौकीदार है लेकिन फिर भी आधी रात को पुलिस को तत्काल में किस लिए आश्रम में जायजा लेना आना पड़ा और इस पर पुलिस कोई विशेष टिप्पणी क्यों नहीं कर रही है।
पुलिस ने यह भी माना है कि आश्रम के अंदर महिला भी थी, फिर पुलिस के साथ कोई भी महिला कर्मचारी क्यों नहीं थी। हालांकि हाथरस कांड में पुलिस ने जो FIR दर्ज किया है उसमें लिखा गया है कि बाबा की सुरक्षा गार्ड ने पब्लिक पर पहले धक्का मारना शुरू किया था जिस वजह से पूरी भीड़ मची। इसके बाद ही इतना बड़ा हादसा हुआ है।
बाबा के बारे में विस्तार से जाना जाए तो सन 2000 में बाबा को आगरा से पुलिस ने गिरफ्तार किया था। दिसंबर 2000 में एक मामले में सूरजपाल सहित 7 लोगों को पुलिस ने अरेस्ट किया था लेकिन कोर्ट ने सबको छोड़ दिया था। इसके साथ बाबा ने एक बच्ची को गोद लिया था जो कैंसर से पीड़ित थी उसकी एक जिन बीमारी की वजह से मौत हो गई। इस घटना के बाद चार थाने की फोर्स मौके पर पहुंची थी और लाठीचार्ज कर बाबा को गिरफ्तार भी कर लिया था।

