Healthy Diet Cost: Fresh fruits, vegetables, grains, and dairy products displayed at a market, highlighting the rising cost of a healthy diet in India.
Healthy Diet Cost: दुनिया में भुखमरी कम करने की दिशा में पिछले कुछ वर्षों में सकारात्मक प्रगति जरूर हुई है, लेकिन Healthy Diet Cost लगातार बढ़ने के कारण करोड़ों लोग अब भी संतुलित और पौष्टिक भोजन से वंचित हैं। संयुक्त राष्ट्र की ताजा रिपोर्ट बताती है कि विश्वभर में लगभग 269 करोड़ लोग ऐसा भोजन खरीदने में सक्षम नहीं हैं, जो उनके शरीर की पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा कर सके। भारत की स्थिति भी चिंता बढ़ाने वाली है, जहां करीब 52 करोड़ लोग आर्थिक कारणों से हेल्दी डाइट का खर्च नहीं उठा पा रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, भोजन की उपलब्धता में सुधार हुआ है, लेकिन भोजन की गुणवत्ता और पोषण तक समान पहुंच सुनिश्चित करना अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। महंगाई, कमजोर आपूर्ति श्रृंखला, जलवायु परिवर्तन और वैश्विक संघर्षों ने Healthy Diet Cost को लगातार बढ़ाया है।
UN की पांच एजेंसियों ने जारी की वैश्विक रिपोर्ट
यह रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र की पांच प्रमुख एजेंसियों—FAO, IFAD, UNICEF, WFP और WHO—ने संयुक्त रूप से तैयार की है। रिपोर्ट का शीर्षक The State of Food Security and Nutrition in the World: Understanding and Addressing the High Cost of a Healthy Diet है।
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इस अध्ययन में दुनिया भर में खाद्य सुरक्षा, पोषण, भूख, भोजन की लागत और भविष्य की चुनौतियों का व्यापक विश्लेषण किया गया है। रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि केवल पेट भरने की व्यवस्था पर्याप्त नहीं है, बल्कि हर व्यक्ति तक संतुलित और पौष्टिक भोजन पहुंचाना भी उतना ही आवश्यक है।
भुखमरी में लगातार तीसरे साल सुधार
रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक स्तर पर भूख की समस्या में धीरे-धीरे कमी दर्ज की जा रही है। वर्ष 2022 में जहां दुनिया की 8.6 प्रतिशत आबादी भुखमरी से प्रभावित थी, वहीं 2024 में यह आंकड़ा घटकर 8.1 प्रतिशत और 2025 में 7.8 प्रतिशत तक पहुंच गया।
एशिया और लैटिन अमेरिका में इस दिशा में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। वहीं अफ्रीका में लंबे समय बाद स्थिति स्थिर होती दिखाई दे रही है, हालांकि वहां अब भी भुखमरी का संकट सबसे गंभीर बना हुआ है।
भारत में 52 करोड़ लोग नहीं खरीद पा रहे Healthy Diet
रिपोर्ट के सबसे महत्वपूर्ण आंकड़ों में भारत की स्थिति भी शामिल है। अनुमान के मुताबिक देश में लगभग 52 करोड़ लोग ऐसे हैं जो रोजाना संतुलित और पौष्टिक भोजन खरीदने की आर्थिक क्षमता नहीं रखते।
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विशेषज्ञों का कहना है कि भारत ने खाद्यान्न उत्पादन और सार्वजनिक वितरण प्रणाली में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है, लेकिन अब नीति का फोकस केवल अनाज उपलब्ध कराने से आगे बढ़कर पोषण सुरक्षा पर होना चाहिए। फल, दूध, दाल, अंडे, हरी सब्जियां और अन्य पोषक खाद्य पदार्थ आम लोगों की पहुंच में लाना अगली बड़ी चुनौती है।
महंगाई और सप्लाई चेन बनी बड़ी वजह
रिपोर्ट बताती है कि Healthy Diet Cost बढ़ने के पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं। खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतें, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान, जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक आपदाएं और अंतरराष्ट्रीय संघर्षों ने भोजन की लागत में लगातार वृद्धि की है।
आज एक पौष्टिक भोजन की कीमत सामान्य न्यूनतम भोजन की तुलना में लगभग 43 प्रतिशत अधिक हो चुकी है। यही कारण है कि कम आय वाले परिवारों के लिए संतुलित आहार खरीदना दिन-ब-दिन मुश्किल होता जा रहा है।
हर चौथा व्यक्ति भोजन की चिंता में जी रहा है
रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025 में दुनिया के लगभग 210 करोड़ लोग इस चिंता में जीवन बिता रहे थे कि उन्हें अगला भोजन मिलेगा या नहीं। यह वैश्विक आबादी का लगभग 25.8 प्रतिशत हिस्सा है।
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हालांकि यह आंकड़ा पिछले वर्षों की तुलना में कम हुआ है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि भोजन की असुरक्षा अभी भी वैश्विक विकास के लिए गंभीर चुनौती बनी हुई है।
महिलाएं और ग्रामीण आबादी सबसे ज्यादा प्रभावित
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं को भोजन की कमी का अधिक सामना करना पड़ा। कई परिवारों में महिलाएं स्वयं कम भोजन खाकर परिवार के अन्य सदस्यों को प्राथमिकता देती हैं।
इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के सामने पौष्टिक भोजन की उपलब्धता और खरीद क्षमता दोनों बड़ी समस्या बनी हुई हैं। कमजोर परिवहन व्यवस्था और सीमित बाजार पहुंच भी इस स्थिति को और कठिन बना रही है।
Healthy Diet Cost में सुधार के बावजूद चुनौती बरकरार
वर्ष 2021 में दुनिया के लगभग 297 करोड़ लोग हेल्दी डाइट खरीदने में सक्षम नहीं थे। वर्ष 2025 तक यह संख्या घटकर 269 करोड़ हो गई है, जो सकारात्मक संकेत जरूर है, लेकिन अभी भी दुनिया की एक बड़ी आबादी संतुलित भोजन से दूर है।
रिपोर्ट बताती है कि कई देशों में लोगों की आय बढ़ी है, लेकिन खाद्य महंगाई की गति भी तेज रही है। इस वजह से वास्तविक सुधार सभी क्षेत्रों में समान रूप से दिखाई नहीं देता।
2030 तक भूख खत्म करने का लक्ष्य खतरे में
संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2030 तक दुनिया से भुखमरी समाप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। हालांकि रिपोर्ट चेतावनी देती है कि यदि कृषि नीतियों और पोषण संबंधी योजनाओं में व्यापक बदलाव नहीं किए गए तो यह लक्ष्य हासिल करना मुश्किल होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल गेहूं और चावल जैसी फसलों पर आधारित योजनाओं से आगे बढ़कर फल, डेयरी, दालें, बागवानी और प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों को भी सरकारी पोषण कार्यक्रमों में प्रमुखता देनी होगी।
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छोटे किसानों में निवेश बढ़ाने की जरूरत
रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि खेत से लेकर उपभोक्ता की थाली तक पूरी खाद्य श्रृंखला को मजबूत बनाया जाए। छोटे किसानों को आधुनिक तकनीक, बेहतर भंडारण, परिवहन और बाजार उपलब्ध कराने से खाद्य नुकसान कम होगा और कीमतों पर नियंत्रण रखा जा सकेगा। इसके साथ ही स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देकर पोषक खाद्य पदार्थों की उपलब्धता और पहुंच दोनों बेहतर बनाई जा सकती हैं।
संतुलित आहार क्यों है जरूरी?
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार स्वस्थ जीवन के लिए शरीर को पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, स्वस्थ वसा, विटामिन, खनिज और कैलोरी की आवश्यकता होती है। दूध, दही, दालें, फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज और प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ संतुलित आहार का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि अच्छा पोषण केवल कुपोषण से ही नहीं बचाता, बल्कि मधुमेह, हृदय रोग, स्ट्रोक, मोटापा और कई प्रकार के कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के जोखिम को भी कम करता है।
UN की ताजा रिपोर्ट यह स्पष्ट करती है कि दुनिया ने भूख कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की है, लेकिन Healthy Diet Cost अब भी करोड़ों लोगों के लिए सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है। भारत सहित कई देशों के सामने चुनौती केवल लोगों का पेट भरने की नहीं, बल्कि हर नागरिक तक पौष्टिक और संतुलित भोजन पहुंचाने की है। यदि सरकारें कृषि, पोषण और खाद्य वितरण से जुड़ी नीतियों में समय रहते सुधार करती हैं, तो 2030 तक भूख और कुपोषण को काफी हद तक कम करने का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

