PM Modi at Gir Forest: गिर का जंगल कैसे बना एशियाई शेरों का गढ़? कभी शिकार के लिए मशहूर था यह जंगल, पीएम मोदी ने किया दौरा
पीएम मोदी सोमवार सुबह विश्व वन्यजीव दिवस पर गुजरात के गिर के जंगलों में पहुंचे। उन्होंने सफारी का लुत्फ़ उठाया। यह गुजरात के जूनागढ़ में स्थित है। यह एशियाई शेरों के निवास के रूप में पूरी दुनिया में मशहूर है। यह एकमात्र ऐसी जगह है जहाँ एशियाई शेर पाए जाते हैं। जानिए कैसे गिर के जंगल एशियाई शेरों का गढ़ बन गए, यहाँ कितने तरह के जानवर हैं और कितने एशियाई शेर हैं?
PM Modi at Gir Forest: विश्व वन्यजीव दिवस यानी 3 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने गृह राज्य गुजरात में हैं। वे सुबह-सुबह गिर के जंगलों में सफारी का लुत्फ़ उठा रहे हैं। इसके बाद वे यहां सासन में राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की बैठक की अध्यक्षता करेंगे। आइए इस मौके पर गिर के जंगलों, वहां के शेरों और अन्य विशेषताओं के बारे में जानें। गिर वन राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना वर्ष 1965 में हुई थी। यह गुजरात के जूनागढ़ में स्थित है। यह एशियाई शेरों के निवास स्थान के रूप में पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। यह एकमात्र ऐसी जगह है जहां एशियाई शेर पाए जाते हैं।
यह संरक्षित क्षेत्र है। एशियाई शेरों के अलावा यहाँ तेंदुए, जंगली सूअर, नीलगाय, चार सींग वाले हिरण और कई अन्य जानवर और पक्षी पाए जाते हैं। आज यह जंगल पूरी तरह विकसित हो चुका है। यह सुरक्षित है लेकिन हमेशा से ऐसा नहीं था। पहले इसकी हालत बहुत अच्छी नहीं थी।
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गिर के जंगल कभी अंग्रेजों के शिकार का केंद्र थे
उस समय अंग्रेज़ों ने पूरे देश पर कब्ज़ा कर लिया था। देश के अलग-अलग हिस्सों में छोटी-छोटी रियासतों के शासक अंग्रेजों की नज़र में आने के लिए लालायित रहते थे। अंग्रेज़ अधिकारियों की इच्छाओं को पूरा करना अपना कर्तव्य समझते थे। गिर के जंगलों समेत कई अभ्यारण्यों का इस्तेमाल शिकार आदि के लिए किया जाता था। राजा अपने इलाके के जंगलों में अपने आराम और शिकार की व्यवस्था करते थे। इस उद्देश्य के लिए गिर के जंगलों का भी बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता था।
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19वीं सदी के अंत तक यहां सिर्फ़ एक दर्जन एशियाई शेर बचे थे। फिर जूनागढ़ के शेरों की आबादी बढ़ाने के लिए कुछ ठोस प्रयास किए गए। इस इलाके के जंगलों को संरक्षित किया जाने लगा। कहा जाता है कि ब्रिटिश वायसराय ने जूनागढ़ के नवाब का ध्यान इस ओर दिलाया कि एशियाई शेर विलुप्त हो रहे हैं। फिर यहां शिकार बंद हो गया और धीरे-धीरे पूरे जंगल को सरकारी संरक्षण मिल सका।
जब भारत स्वतंत्र हुआ तो सबसे पहले 1965 में इसे वन्यजीव अभयारण्य तथा बाद में यानी 1975 में राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया। तब से लेकर अब तक राज्य और केंद्र सरकारों ने इस क्षेत्र को विकसित करने के लिए अपने-अपने स्तर पर प्रयास किए और आज गिर राष्ट्रीय उद्यान का नाम विश्व पटल पर लिया जाता है।
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एशियाई शेरों की संख्या पहुंची 523
सरकारी वेबसाइट के अनुसार गिर नेशनल पार्क में एशियाई शेरों की संख्या आज 523 पहुंच गई है, जो कभी एक दर्जन हुआ करती थी। सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 1913 में यह संख्या 20 तक पहुंच गई थी। सरकारी वेबसाइट पर जूनागढ़ के नवाब के योगदान का भी जिक्र किया गया है। आज यहां बड़ी संख्या में देशी-विदेशी पर्यटक आ रहे हैं। सीएम रहते हुए नरेंद्र मोदी ने पर्यटकों का ध्यान इस क्षेत्र की ओर खींचा था। क्षेत्र के विकास के लिए कई कदम उठाए गए।
नतीजा यह हुआ कि 2007-08 में जहां पर्यटकों की संख्या कुछ हजार थी, वहीं 2011-12 तक यह संख्या बढ़कर चार लाख से अधिक हो गई, जिसमें करीब नौ हजार विदेशी पर्यटक शामिल थे। पिछले पांच सालों में यहां 33 लाख से अधिक देशी-विदेशी पर्यटक आए।
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निकटतम हवाई अड्डा राजकोट
गिर पहुँचने के लिए निकटतम हवाई अड्डा राजकोट है। यहाँ से जूनागढ़ होते हुए 165 किलोमीटर की सड़क यात्रा के बाद गिर राष्ट्रीय उद्यान पहुँचा जा सकता है। जैसे-जैसे राष्ट्रीय उद्यान पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है, वैसे-वैसे यहाँ सरकारी और निजी क्षेत्र की सुविधाएँ भी तेज़ी से फैल रही हैं। यहाँ कई होटल और रिसॉर्ट स्थापित हैं। जंगल सफ़ारी के लिए वाहन उपलब्ध हैं। जंगल के अंदर घूमने के लिए सरकारी अनुमति की आवश्यकता होती है। शिकार करना दंडनीय अपराध है।
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मुख्यमंत्री के तौर पर नरेंद्र मोदी की गिर नेशनल पार्क में रुचि के बाद न सिर्फ वहां सुविधाएं विकसित हुई हैं बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी बड़े पैमाने पर बढ़े हैं। यहां महिला सुरक्षा गार्ड भी तैनात किए गए हैं, जो अपने आप में एक अनूठा प्रयोग है।
जूनागढ़ के नवाब से लेकर सरकार तक ने कई कदम उठाए
अक्सर यह सवाल उठता है कि देश के दूसरे सरकारी पार्कों की हालत गिर नेशनल पार्क जैसी क्यों नहीं है। यह किसी से छिपा नहीं है कि अधिकारी सत्ता के इशारे पर काम करते हैं। जब सीएम-पीएम किसी प्रोजेक्ट में दिलचस्पी लेने लगते हैं और जब वे दिलचस्पी नहीं लेते, तो फर्क नजर आता है। जब भी गिर नेशनल पार्क की तुलना दूसरे नेशनल पार्कों से की जाती है, तो उपरोक्त बात को ध्यान में रखना पड़ता है।
गिर के जंगलों और वहां रहने वाले प्रवासी पशु-पक्षियों और एशियाई शेरों के लिए जो प्रयास नरेंद्र मोदी ने अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल में किए, वो कितने अन्य मुख्यमंत्रियों ने किए हैं। आज जब प्रधानमंत्री वहां राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की बैठक की अध्यक्षता कर रहे हैं, तो यह अपने आप में महत्वपूर्ण है। जूनागढ़ के नवाब से लेकर तत्कालीन वायसराय तक, सभी ने गिर के जंगल और यहां रहने वाले एशियाई शेरों के संरक्षण पर ध्यान दिया। बाद में इसे राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया। इसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिले।
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