Uttarakhand Place Renaming: उत्तराखंड में 11 स्थानों के नाम बदले, औरंगजेबपुर बना ‘योगनगरी’
उत्तराखंड सरकार ने चार जिलों के 11 स्थानों के नाम बदलने का फैसला किया, जिनमें औरंगजेबपुर, खानपुर और अकबरपुर फाजिलपुर शामिल हैं। सरकार का दावा है कि यह बदलाव राज्य की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को पुनर्स्थापित करने के लिए किया गया है। हालांकि, विपक्ष और कुछ स्थानीय लोगों ने इसे गैर-जरूरी मुद्दा बताते हुए विकास कार्यों पर ध्यान देने की मांग की है।
Uttarakhand Place Renaming: उत्तराखंड सरकार ने चार जिलों के 11 स्थानों के नाम बदलने का फैसला लिया है। जिन जगहों के नाम बदले गए हैं, उनमें औरंगजेबपुर, खानपुर, अकबरपुर फाजिलपुर जैसे इलाके शामिल हैं। सरकार का कहना है कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को ध्यान में रखते हुए ये बदलाव किए गए हैं। नए नामों की आधिकारिक अधिसूचना जल्द जारी की जाएगी।
किन स्थानों के नाम बदले गए?
राज्य सरकार ने चार जिलों—हरिद्वार, देहरादून, उधमसिंह नगर और नैनीताल में स्थित 11 जगहों के नाम बदलने का निर्णय लिया है। इसमें शामिल प्रमुख स्थान और उनके नए नाम इस प्रकार हैं:
हरिद्वार जिले में बदले गए नाम:
- औरंगजेबपुर → शिवाजी नगर
- गाजीवाली (बहादराबाद ब्लॉक) → आर्य नगर
- चांदपुर → ज्योतिबा फुले नगर
- मोहम्मदपुर जट (नारसन ब्लॉक) → मोहनपुर जट
- खानपुर कुर्सली → आंबेडकर नगर
- इदरीशपुर (खानपुर ब्लॉक) → नंदपुर
- खानपुर → कृष्णपुर
- अकबरपुर फाजलपुर → विजयनगर
देहरादून जिले में बदले गए नाम:
- मियांवाला (देहरादून नगर निगम) → रामजीवाला
- पीरवाला (विकासनगर ब्लॉक) → केसरी नगर
- चांदपुर खुर्द → पृथ्वीराज नगर
- अब्दुल्लापुर (सहसपुर ब्लॉक) → दक्षनगर
नैनीताल जिले में बदले गए नाम:
- नवाबी रोड → अटल मार्ग
- पनचक्की से आईटीआई मार्ग → गुरु गोवलकर मार्ग
उधम सिंह नगर जिले में बदला गया नाम:
नगर पंचायत सुल्तानपुर पट्टी → कौशल्या पूरी
सरकार ने इन नामों को स्थानीय जनता की मांग और ऐतिहासिक महत्व को ध्यान में रखकर बदला है।
नाम बदलने के पीछे सरकार की मंशा
उत्तराखंड सरकार का कहना है कि ऐसे स्थानों के नाम, जो विदेशी आक्रांताओं से जुड़े हैं, उन्हें बदलना जरूरी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कदम राज्य की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को पुनर्स्थापित करने की दिशा में उठाया गया है।
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एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया,”लोगों की लंबे समय से मांग थी कि जिन स्थानों के नाम विदेशी शासकों से जुड़े हैं, उन्हें बदलकर भारतीय परंपरा और संस्कृति से जोड़ा जाए। इसी को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है।”
सरकार का मानना है कि इस कदम से स्थानीय इतिहास और धार्मिक आस्था को मजबूती मिलेगी।
विपक्ष ने उठाए सवाल
हालांकि, इस फैसले पर विपक्षी दलों ने आपत्ति जताई है। कुछ नेताओं का कहना है कि यह राजनीतिक उद्देश्य से किया गया फैसला है, जो विकास कार्यों से ध्यान भटकाने की कोशिश हो सकता है।
विपक्षी नेता हर्ष चौहान ने कहा,”सरकार को नाम बदलने से ज्यादा ध्यान शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं पर देना चाहिए। क्या नाम बदलने से लोगों की समस्याएं खत्म हो जाएंगी?”
कुछ सामाजिक संगठनों ने भी सरकार से पूछा है कि क्या नाम बदलने से स्थानीय लोगों की जीवनशैली पर कोई सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा?
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स्थानीय लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रिया
इस फैसले को लेकर स्थानीय लोगों की राय बंटी हुई है। कुछ लोगों ने सरकार के इस कदम का समर्थन किया है, तो कुछ ने इसे गैर-जरूरी मुद्दा बताया है।
हरिद्वार के एक निवासी वेद प्रकाश शर्मा ने कहा,”यह एक अच्छा कदम है। हमें अपनी सांस्कृतिक विरासत को पुनः स्थापित करना चाहिए। यह बदलाव हमें हमारे गौरवशाली अतीत से जोड़ेगा।”
वहीं, देहरादून के एक स्थानीय व्यापारी रफीक अहमद ने कहा,”सरकार को पहले सड़कों, बिजली और पानी जैसी सुविधाओं पर ध्यान देना चाहिए। नाम बदलने से कुछ हासिल नहीं होगा।”
भारत में नाम बदलने की बढ़ती प्रवृत्ति
उत्तराखंड में नाम बदलने का यह फैसला भारत में चल रही एक व्यापक प्रवृत्ति का हिस्सा है। पिछले कुछ वर्षों में कई शहरों और स्थानों के नाम बदले गए हैं, जिनमें शामिल हैं:
इलाहाबाद → प्रयागराज
मुगलसराय स्टेशन → पं. दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन
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फैज़ाबाद → अयोध्या
हैदराबाद के कुछ इलाकों में भी नाम बदलने की चर्चा हो रही है
ऐसे में उत्तराखंड सरकार का यह कदम भी उसी दिशा में बढ़ाया गया एक और प्रयास माना जा रहा है।
उत्तराखंड सरकार के इस फैसले ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बहस छेड़ दी है। जहां एक ओर कुछ लोग इसे संस्कृति और इतिहास को पुनः स्थापित करने का प्रयास मान रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कई लोग इसे विकास के वास्तविक मुद्दों से ध्यान हटाने की रणनीति मान रहे हैं।
अब देखने वाली बात होगी कि आगे और किन स्थानों के नाम बदले जाते हैं और इस फैसले का स्थानीय जनता पर क्या असर पड़ता है।
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