Attari Border Retreat Ceremony: अब समय पर पहुंचना होगा जरूरी! अटारी बॉर्डर रिट्रीट सेरेमनी के समय में बड़ा बदलाव

Attari Border Retreat Ceremony: अगर आप अटारी बॉर्डर पर देशभक्ति से लबरेज बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी देखने का प्लान बना रहे हैं, तो ये खबर आपके जरूरी है। अब यह भव्य परेड पहले से आधे घंटे पहले शुरू होगी। सीमा पर रोज़ाना होने वाली इस रोमांचक सेरेमनी का समय बदल दिया गया है और इसके पीछे वजह है मौसम की चाल।
अटारी बॉर्डर रिट्रीट सेरेमनी भारत और पाकिस्तान के बीच वाघा-अटारी सीमा पर प्रतिदिन होने वाला एक अत्यंत लोकप्रिय और रोमांचक सैन्य समारोह है। यह केवल एक सैन्य परंपरा नहीं, बल्कि राष्ट्रभक्ति, अनुशासन और गौरव का प्रतीक बन चुका है।
अब 16 सितंबर से पहले शुरू होगी रिट्रीट सेरेमनी
प्रोटोकॉल ऑफिसर अरुण महल ने जानकारी देते हुए बताया कि 16 सितंबर 2025 से अटारी बॉर्डर पर आयोजित होने वाली बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी का नया समय शाम 05:30 बजे से 06:00 बजे तक निर्धारित किया गया है। पहले यह सेरेमनी 06:00 से 06:30 बजे तक होती थी।
उन्होंने बताया कि यह बदलाव मौसमी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए किया गया है, ताकि पर्यटकों और जवानों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
Latest News Update Uttar Pradesh News, उत्तराखंड की ताज़ा ख़बर
रोज़ाना का राष्ट्रभक्ति से भरा रोमांच
बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी हर दिन भारत-पाकिस्तान अटारी सीमा पर आयोजित की जाती है। इस दौरान सीमा सुरक्षा बल (BSF) के जवान अपने अनुशासन, जोश और सैन्य पराक्रम का अनोखा प्रदर्शन करते हैं।
यह आयोजन न सिर्फ देशवासियों को गर्व की अनुभूति कराता है, बल्कि दुनियाभर से पर्यटक इस आयोजन को देखने के लिए खिंचे चले आते हैं।
पंजाब की तमाम बड़ी खबरें देखने के लिये क्लिक करे
पर्यटकों से विशेष अनुरोध
प्रोटोकॉल ऑफिसर ने देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों से अपील की है कि वे समय परिवर्तन को गंभीरता से लेते हुए नए निर्धारित समय से पहले स्थल पर पहुंचें, ताकि वे इस अद्भुत आयोजन का पूरा आनंद ले सकें।
अटारी बॉर्डर रिट्रीट सेरेमनी क्या है?
बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी एक सांकेतिक सैन्य परेड है जो भारत के सीमा सुरक्षा बल (BSF) और पाकिस्तान के रेंजर्स द्वारा रोज़ाना सूर्यास्त से पहले आयोजित की जाती है।
इस समारोह का उद्देश्य दोनों देशों के जवानों द्वारा राष्ट्रीय ध्वज को सम्मानपूर्वक उतारना होता है।
पढ़े ताजा अपडेट: Newswatchindia.com: Hindi News, Today Hindi News, Breaking
सेरेमनी में शामिल होता है:
- एक साथ कदमताल करते हुए मार्चिंग
- जोश और शौर्य से भरे नारे
- सीमा गेट पर दोनों पक्षों की ऊर्जा से भरी सैन्य गतिविधियाँ
- ध्वज को उतारने की एक विशेष, समन्वित प्रक्रिया
अटारी रिट्रीट सेरेमनी का इतिहास
शुरुआत कब और क्यों हुई?
यह परंपरा 1959 में शुरू हुई थी। इसका उद्देश्य भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य सम्मान और सहयोग का प्रतीक स्थापित करना था, भले ही दोनों देशों के बीच राजनीतिक संबंध तनावपूर्ण रहे हों।
दोनों पक्षों ने निर्णय लिया कि रोज़ाना सूर्यास्त के समय एक संयुक्त और समन्वित परेड आयोजित की जाएगी जिसमें झंडा उतारा जाएगा।

