CM Pushkar Singh Dhami at Pipalkoti tunnel accident site during rescue operation in Chamoli.(pc-ai)
Pipalkoti Tunnel Rescue Operation: उत्तराखंड के चमोली जिले में पीपलकोटी के पास निर्माणाधीन टनल में हुआ हादसा बेहद दर्दनाक रूप ले चुका है। टनल में अचानक मलबा और पानी घुसने के बाद कई श्रमिक अंदर फंस गए थे। ताजा रिपोर्टों में मृतकों की संख्या 9 बताई गई है, जबकि कई श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है। अलग-अलग समय पर प्रशासन से मिलने वाली सूचनाओं में आंकड़ों में बदलाव हुआ है, इसलिए रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा होने तक अंतिम संख्या की आधिकारिक पुष्टि का इंतजार जरूरी है।
खराब मौसम के बीच पीपलकोटी पहुंचे CM धामी
हादसे की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खुद पीपलकोटी पहुंचे और घटनास्थल पर चल रहे Pipalkoti Tunnel Rescue Operation का जायजा लिया। खराब मौसम के कारण मुख्यमंत्री के हेलीकॉप्टर की लैंडिंग भी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में हुई। मौके पर पहुंचकर उन्होंने प्रशासन, पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और अन्य बचाव एजेंसियों के अधिकारियों से रेस्क्यू की स्थिति की जानकारी ली।
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मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि टनल में फंसे प्रत्येक श्रमिक को सुरक्षित बाहर निकालना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। साथ ही घायल श्रमिकों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने और जरूरत पड़ने पर गंभीर घायलों को उच्च चिकित्सा केंद्र भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
कैसे हुआ पीपलकोटी टनल हादसा?
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार यह हादसा चमोली जिले के मायापुर-पीपलकोटी क्षेत्र में विष्णुगाड़-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना की निर्माणाधीन टनल में हुआ। गुरुवार शाम टनल के भीतर अचानक बड़ी मात्रा में पानी, मलबा और पत्थर घुस आए। इससे वहां काम कर रहे श्रमिकों को बाहर निकलने का पर्याप्त मौका नहीं मिल पाया और कई लोग सुरंग के अंदर फंस गए।
रिपोर्टों के अनुसार हादसा उस समय हुआ जब श्रमिक निर्माण संबंधी काम में जुटे थे। अचानक मलबा और पानी आने से टनल के अंदर हालात बेहद खतरनाक हो गए। प्रत्यक्षदर्शी श्रमिकों ने भी हादसे के दौरान पानी और मलबे के तेज बहाव की जानकारी दी है।
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कई श्रमिकों को सुरक्षित निकाला गया
Pipalkoti Tunnel Rescue Operation के तुरंत बाद जिला प्रशासन ने बचाव अभियान शुरू किया। एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, आईटीबीपी, पुलिस, सेना और अन्य एजेंसियों की टीमें मौके पर पहुंचीं। बचावकर्मियों ने टनल के अंदर पहुंचकर फंसे लोगों को बाहर निकालने का अभियान शुरू किया।
शुरुआती जानकारी में टनल के अंदर 22 लोगों के फंसे होने की बात सामने आई थी। बाद में अलग-अलग अपडेट में रेस्क्यू किए गए लोगों की संख्या बदलती रही। उपलब्ध ताजा रिपोर्टों के मुताबिक कई श्रमिकों को बाहर निकालकर अस्पताल भेजा गया है, जबकि कुछ लोगों की तलाश जारी रही।
मृतकों और घायलों की जानकारी
हादसे में कई श्रमिकों की जान चली गई। उपलब्ध रिपोर्टों में मृतकों की संख्या 9 तक पहुंचने की जानकारी दी गई है। वहीं बड़ी संख्या में श्रमिक घायल हुए हैं और उन्हें अलग-अलग अस्पतालों में उपचार के लिए भर्ती कराया गया है। मृतकों और घायलों की पहचान तथा संख्या को लेकर प्रशासन की ओर से समय-समय पर अपडेट जारी किए जा रहे हैं।
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आपके उपलब्ध विवरण में मृतकों में प्रदीप पंवार, मुकेश, दुर्लभ शर्मा, विजय, जितेंद्र, लोकेश्वर और घुनेश्वर के नाम शामिल हैं। हालांकि, मृतकों की अंतिम सूची में बदलाव संभव है और आधिकारिक सूची जारी होने के बाद ही सभी नामों की पुष्टि की जा सकेगी।
अस्पतालों में घायलों का इलाज जारी
टनल से बाहर निकाले गए घायल श्रमिकों को जिला अस्पताल गोपेश्वर समेत अन्य स्वास्थ्य केंद्रों में भर्ती कराया गया है। चिकित्सकों और स्वास्थ्य विभाग की टीमें घायलों की स्थिति पर लगातार नजर रख रही हैं।
मुख्यमंत्री धामी ने भी घायलों से मुलाकात कर उनका हाल जानने और उन्हें हर संभव चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने पर जोर दिया। गंभीर स्थिति वाले श्रमिकों को जरूरत पड़ने पर बेहतर उपचार के लिए बड़े चिकित्सा संस्थानों में भेजने की व्यवस्था भी की जा रही है।
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रेस्क्यू टीमों के सामने बड़ी चुनौती
Pipalkoti Tunnel Rescue Operation के दौरान सबसे बड़ी चुनौती टनल के भीतर मौजूद मलबा और पानी है। पहाड़ी इलाकों में खराब मौसम के बीच लगातार बदलती परिस्थितियां बचाव अभियान को और मुश्किल बना रही हैं। बचावकर्मी अत्यधिक सावधानी के साथ अंदर पहुंचकर मलबा हटाने और फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।
प्रशासन की ओर से मौके पर आवश्यक मशीनरी, चिकित्सा संसाधन और बचाव उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। अधिकारियों के बीच लगातार समन्वय बनाया जा रहा है ताकि अभियान को तेजी से आगे बढ़ाया जा सके।
444 मेगावाट की परियोजना से जुड़ी है टनल
पीपलकोटी में जिस परियोजना की निर्माणाधीन टनल में हादसा हुआ, वह विष्णुगाड़-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना है। इस परियोजना की क्षमता 444 मेगावाट बताई गई है। परियोजना के निर्माण कार्य में बड़ी संख्या में श्रमिक लगे हुए हैं।
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इस हादसे ने एक बार फिर उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में बड़े निर्माण और सुरंग परियोजनाओं के दौरान श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े किए हैं। राज्य पहले भी सुरंग हादसों और भूस्खलन जैसी गंभीर घटनाओं का सामना कर चुका है।
CM धामी ने दिए सुरक्षा को लेकर सख्त निर्देश
मुख्यमंत्री धामी ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि बचाव अभियान में किसी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। उनका फोकस फिलहाल टनल में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने और घायलों को तत्काल चिकित्सा सुविधा देने पर है।
पीपलकोटी टनल हादसे के बाद प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है। रेस्क्यू ऑपरेशन अंतिम व्यक्ति के सुरक्षित बाहर निकलने तक जारी रखने की बात कही गई है। फिलहाल पूरे उत्तराखंड की नजर इस अभियान पर टिकी है और लोगों को उम्मीद है कि बचाव दल जल्द से जल्द बाकी फंसे श्रमिकों तक पहुंचने में सफल होगा।

