PM Modi's mention brightens luck, Vicharpur players will reach GermanyPM Modi's mention brightens luck, Vicharpur players will reach Germany
Sports Opportunity: मध्य प्रदेश का आदिवासी बहुल जिला शहडोल इन दिनों चर्चा में है। यहां के विचारपुर गांव, जिसे लोग प्यार से मिनी ब्राजील कहते हैं, से अब चार फुटबॉल खिलाड़ी जर्मनी में ट्रेनिंग लेने जा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में अपने “मन की बात” कार्यक्रम में इसका जिक्र करते हुए गांव और यहां के बच्चों के जज्बे की सराहना की।
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पीएम मोदी की नज़र में आया विचारपुर
जुलाई 2023 में जब प्रधानमंत्री मोदी पहली बार शहडोल दौरे पर आए थे, तब उन्होंने यहां कई कार्यक्रमों में भाग लिया। इसी दौरान पकरिया गांव में स्थानीय प्रतिभाओं से मुलाकात हुई, लेकिन उनका ध्यान सबसे ज्यादा विचारपुर के बच्चों की फुटबॉल प्रतिभा ने खींचा। इसके बाद से ही पीएम कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बार-बार इस गांव का उल्लेख करते रहे हैं।
मार्च 2025 में अमेरिकी पॉडकास्टर लेक्स फ्रिडमैन के साथ बातचीत के दौरान भी उन्होंने विचारपुर का जिक्र किया था। हाल ही में मन की बात के 31 अगस्त के एपिसोड में उन्होंने बताया कि जर्मनी के कोच डाइटमार बेयर्सडॉर्फर इस गांव की प्रतिभा से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने चार खिलाड़ियों और एक कोच को जर्मनी बुलाने का फैसला किया।
जर्मनी में ट्रेनिंग का सुनहरा अवसर
इस पहल के तहत विचारपुर से दो बालक, दो बालिकाएं और एक कोच जर्मनी जाएंगे। यह अवसर उनके लिए न केवल खेल कौशल निखारने का मौका है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गांव और प्रदेश की पहचान भी बनेगा।
गांव की खिलाड़ी यशोदा सिंह ने कहा, “मैं छह बार नेशनल खेल चुकी हूं और अभी कंचनपुर में कोचिंग दे रही हूं। रिलायंस फाउंडेशन से भी जुड़ी हूं, लेकिन विचारपुर के बच्चों को सिखाना मेरे लिए हमेशा गर्व की बात रही है। जर्मनी में ट्रेनिंग पाना हमारे लिए बड़ा अचीवमेंट है।”
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मिनी ब्राजील की पहचान
विचारपुर गांव की लगभग 90 प्रतिशत आबादी आदिवासी है। यहां फुटबॉल का जुनून इतना गहरा है कि बच्चे छोटी उम्र से ही मैदान में उतर जाते हैं। लगभग हर दूसरे घर से कोई न कोई नेशनल स्तर का खिलाड़ी निकलता है। इसी वजह से इस गांव को “मिनी ब्राजील” कहा जाता है।
फुटबॉल खिलाड़ी रजनी सिंह ने बताया कि उन्होंने 2003 में खेलना शुरू किया और अब तक 11 नेशनल टूर्नामेंट्स में हिस्सा लिया है। वह कहती हैं, “प्रधानमंत्री ने बार-बार हमारे गांव का नाम लिया, जिससे हमें पहचान मिली। यही हमारे लिए टर्निंग प्वाइंट रहा।”
संघर्ष और उम्मीदों की कहानी
गांव के खिलाड़ी शंकर दाहिया ने कहा कि उन्होंने 5 साल की उम्र में खेलना शुरू किया था और 2010 में नेशनल तक पहुंचे। लेकिन सुविधाओं की कमी ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। अब वह कोच बन चुके हैं और कहते हैं कि आने वाले समय में मिनी ब्राजील के खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नाम कमाएंगे।
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गांव के पूर्व सरपंच शीतल सिंह टेकाम ने बताया कि यह परंपरा पुरानी है, लेकिन कभी नहीं सोचा था कि इतनी दूर तक पहुंचेगी। प्रधानमंत्री के लगातार जिक्र और सरकार की मदद से अब बच्चों के भविष्य को लेकर गांव में नई उम्मीद जगी है।
लड़कियां भी नहीं पीछे
विचारपुर की खासियत यह है कि यहां सिर्फ लड़के ही नहीं, बल्कि लड़कियां भी फुटबॉल में कमाल कर रही हैं। कई लड़कियां पहले ही नेशनल टूर्नामेंट्स खेल चुकी हैं और अभी भी निरंतर मेहनत कर रही हैं। यह इस ट्राइबल गांव की सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है।
विचारपुर की यह कहानी केवल खेल की नहीं, बल्कि मेहनत, संघर्ष और अवसर मिलने पर सफलता की मिसाल है। प्रधानमंत्री के मंच से मिली पहचान और जर्मनी की ट्रेनिंग अब इन बच्चों के जीवन की दिशा बदलने वाली है। आने वाले समय में जब मिनी ब्राजील के खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय मंच पर खेलेंगे, तो यह केवल एक गांव की नहीं बल्कि पूरे देश की जीत होगी।

