Stock Market Crash: सेंसेक्स 1,391 अंकों की गिरावट के साथ धड़ाम, निफ्टी 23,200 के नीचे, बाजार गिरने के 4 बड़े कारण
सेंसेक्स 1,391 अंक और निफ्टी 23,200 के नीचे गिरा, जिससे FY26 की शुरुआत कमजोर रही। वैश्विक कमजोरी, FII बिकवाली, तिमाही नतीजों की चिंता और महंगाई गिरावट के प्रमुख कारण रहे। निवेशकों को सतर्क रहने और मजबूत कंपनियों में अवसर तलाशने की सलाह दी जा रही है।
Stock Market Crash: वित्तीय वर्ष 2026 (FY26) की शुरुआत भारतीय शेयर बाजार के लिए खराब रही, क्योंकि सोमवार को भारी गिरावट देखने को मिली। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 1,391 अंक गिरकर बंद हुआ, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 23,200 के नीचे फिसल गया। इस तेज गिरावट ने निवेशकों की चिंताएं बढ़ा दी हैं और कई लोगों को बड़ा नुकसान हुआ है।
विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक और घरेलू स्तर पर कई कारकों के कारण बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ा, जिससे बाजार भारी गिरावट के साथ बंद हुआ।
कैसे रहा बाजार का हाल?
सोमवार को सेंसेक्स 1,391.26 अंक (2.03%) की गिरावट के साथ 66,875.32 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 414.55 अंक (1.76%) गिरकर 23,180.15 के स्तर पर आ गया।
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बैंकिंग, आईटी और ऑटो सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई।
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी भारी बिकवाली देखी गई।
रिलायंस, टीसीएस, इंफोसिस और एचडीएफसी बैंक जैसे दिग्गज शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई।
बाजार में गिरावट के 4 बड़े कारण
- वैश्विक बाजारों में कमजोरी
अमेरिका और यूरोप के बाजारों में भी गिरावट का रुख देखने को मिला। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती को लेकर अनिश्चितता के कारण वैश्विक बाजार कमजोर रहे। इसके अलावा, मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण निवेशकों की धारणा नकारात्मक बनी हुई है।
- विदेशी निवेशकों की बिकवाली
मार्च 2025 के बाद से ही विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) द्वारा भारी बिकवाली की जा रही है। अप्रैल की शुरुआत में भी एफआईआई ने भारतीय बाजार में अपना निवेश घटाया, जिससे बाजार में दबाव बना और सेंसेक्स-निफ्टी नीचे फिसल गए।
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- कंपनियों के तिमाही नतीजों को लेकर चिंता
अप्रैल महीने में कंपनियों के जनवरी-मार्च तिमाही के वित्तीय नतीजे आने वाले हैं। निवेशकों को आशंका है कि कई कंपनियों की कमाई उम्मीद से कमजोर रह सकती है, जिससे बाजार में गिरावट देखी गई। खासतौर पर आईटी और बैंकिंग सेक्टर पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ सकता है।
- कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और महंगाई
वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के चलते महंगाई बढ़ने की आशंका है। भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए तेल की ऊंची कीमतें महंगाई को बढ़ा सकती हैं, जिससे ब्याज दरों में कटौती की संभावना कम हो जाती है। इससे बाजार में निवेशकों की धारणा नकारात्मक हो गई।
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किन सेक्टरों में सबसे ज्यादा गिरावट?
इस गिरावट में सबसे ज्यादा नुकसान बैंकिंग, आईटी और ऑटोमोबाइल सेक्टर को हुआ।
आईटी शेयरों में गिरावट: इंफोसिस, टीसीएस और विप्रो के शेयरों में 2-3% तक की गिरावट आई।
बैंकिंग सेक्टर कमजोर: एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और एसबीआई के शेयरों में भारी गिरावट देखी गई।
ऑटो सेक्टर भी प्रभावित: मारुति, टाटा मोटर्स और महिंद्रा के शेयरों में गिरावट आई।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट अस्थायी हो सकती है, और दीर्घकालिक निवेशकों को घबराने की जरूरत नहीं है।
शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स को सतर्क रहना चाहिए, क्योंकि बाजार में अभी और उतार-चढ़ाव हो सकता है।
लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह गिरावट खरीदारी का मौका हो सकती है, खासकर मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों में।
बाजार के स्थिर होने तक निवेशकों को ज्यादा रिस्क लेने से बचना चाहिए।
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आगे क्या होगा?
आने वाले दिनों में बाजार की दिशा कई कारकों पर निर्भर करेगी:
वैश्विक बाजारों का रुझान और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियां।
कंपनियों के तिमाही नतीजे, जो अप्रैल में जारी होंगे।
विदेशी निवेशकों की गतिविधियां – क्या वे बाजार में फिर से निवेश बढ़ाते हैं या बिकवाली जारी रखते हैं।
कच्चे तेल की कीमतों का उतार-चढ़ाव और भारतीय अर्थव्यवस्था पर इसका असर।
FY26 की शुरुआत शेयर बाजार के लिए नकारात्मक रही, और सेंसेक्स-निफ्टी में तेज गिरावट देखने को मिली। वैश्विक कारक, विदेशी निवेशकों की बिकवाली, तिमाही नतीजों की चिंता और बढ़ती महंगाई बाजार पर दबाव बना रही हैं। हालांकि, दीर्घकालिक निवेशकों के लिए यह एक अवसर भी हो सकता है, लेकिन अल्पकालिक निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है।
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