स्लोवाकिया के पीएम को मारी गई गोली, क्यों कहा जा रहा है कि यूरोप में युद्ध बढ़ने वाला है?
Slovakia’s PM Shooting News Update: स्लोवाकिया (Slovakia) के प्रधानमंत्री को एक पब्लिक मीटिंग के दौरान गोली मार दी गई। फिलहाल उन्हें जख्मी हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उनके ऊपर यह गोली तब चली है जब रूस और यूक्रेन का युद्ध बढ़ रहा है। वह यूक्रेन को हथियार सप्लाई करने के खिलाफ थे। हमलावर गिरफ्तार कर लिया गया है।

जानकारी के मुताबिक आपको बता दें स्लोवाकिया (Slovakia) के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको (Pm robert fico) पर 15 मई यानि बुधवार को एक अज्ञात हमलावर ने कई गोलियां बरसा दीं। घायल अवस्था में उन्हें हेलीकॉप्टर के जरिए बंस्का बायस्ट्रिका के एक ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया, जहां वह अपनी जिंदगी के लिए लड़ रहे हैं। फिलहाल उनकी हालत की जानकारी नहीं है। रॉबर्ट फिको यूक्रेन को सैन्य समर्थन देने के सबसे बड़े विरोधी हैं। सुरक्षाबलों ने हमलावर को पकड़ लिया, जिसके बारे में कुछ डिटेल सामने आई है। हमला करने वाले शख्स की उम्र 71 साल है। उसने गोलीबारी के लिए अपनी लाइसेंसी बंदूक का इस्तेमाल किया था।
हैंडलोवा में एक निजी सरकारी ऑफ-साइट बैठक में गोलीबारी हुई। हमलावर वहां कैसे पहुंचा यह अभी भी रहस्य बना हुआ है। 1986 में स्वीडिश प्रधान मंत्री ओलाफ पाल्मे की हत्या के बाद यह यूरोप में किसी देश के पीएम पर गोलीबारी का पहला मामला है। पहले भी दो बार वह प्रधानमंत्री रह चुके हैं। अपनी डायरेक्शन-सोशल डेमोक्रेसी पार्टी और दो अन्य पार्टियों के बीच गठबंधन में 2023 में कार्यकाल में लौटे।
हथियार भेजने का किया था विरोध
स्लोवाकिया (Slovakia) यूक्रेन से घिरा हुआ है. वह स्लोवाक भूमि के माध्यम से पश्चिमी हथियारों को यूक्रेन में स्थानांतरित करने के खिलाफ रहे हैं। इसके अलावा वह यूक्रेन को हथियार देने के भी ख़िलाफ़ रहे हैं. बल्कि, फ़िको ने सितंबर 2023 के एक साक्षात्कार में कहा, “हम यूरोपीय संघ और अमेरिका के दबाव के माध्यम से युद्धरत पक्षों को बैठकर कुछ ऐसा समझौता करने के लिए मजबूर क्यों नहीं करते जो यूक्रेन के लिए अच्छा हो?” सुरक्षा सुनिश्चित करो।
प्रथम विश्वयुद्ध में भी हुआ कुछ ऐसा
बंदूक की गोली 31 जुलाई, 1914 को फ्रांसीसी समाजवादी नेता जीन जौरेस की हत्या की याद दिलाती है। ऑस्ट्रिया के आर्चड्यूक फर्डिनेंड की हत्या के बाद प्रथम विश्व युद्ध (First world war) छिड़ गया। वह भी युद्ध के विरोधी थे और उन्हें पेरिस के एक कैफे में गोली मार दी गई थी। फिको पर हुए हमले को लेकर हमारे पास सिर्फ सवाल हैं, लेकिन कोई जवाब नहीं। वहीं यूक्रेन की सैन्य स्थिति की बात करें तो वह गंभीर है। सैनिकों की कमी है और जो बचे हैं वह लगातार युद्ध से थके हैं।
युद्ध हार जाएगा यूक्रेन?
नाटो देशों के पास पर्याप्त वायु रक्षा मिसाइलों और गोले की कमी है, और यूक्रेन (Ukrain) के पास रूस के साथ चल रहे संघर्ष में रूसी सेना को पीछे हटाने के लिए जनशक्ति की कमी है। वियतनाम युद्ध के बाद से यह संयुक्त राज्य अमेरिका (America) के लिए सबसे महत्वपूर्ण संघर्ष है। यह तथ्य कि इसमें एक भी अमेरिकी सैनिक की जान नहीं गई, सबसे ज्यादा मायने रखता है। दो साल पहले पश्चिमी देशों का मानना था कि उसके हथियार रूसी सेना को हरा देंगे और प्रतिबंध अर्थव्यवस्था बर्बाद कर देगा। लेकिन पश्चिमी देश इसमें कामयाब नहीं हुए। बाइडेन के लिए आने वाला चुनाव भी इस कारण मुश्किल हो सकता है। इस युद्ध में यूरोप (Europe) और दुनिया भर में अमेरिकी नेतृत्व की विश्वसनीयता दांव पर है।
अमेरिका के पास, उसके सहयोगियों के पास, बहुत सारे विकल्प हैं। हालाँकि, इनमें से कोई भी मददगार नहीं होगा। यूक्रेन के रास्ते रूस के भीतर महत्वपूर्ण ठिकानों पर हमला करना एक संभावना है। दूसरा यह कि यूक्रेन में नाटो सेना की सीधी तैनाती आवश्यक है। हालांकि बाइडेन जानते हैं कि इससे युद्ध की आंच अमेरिका तक आ सकती है, जिस कारण उन्होंने ऐसा कदम उठाने से मना कर दिया है। युद्ध के बीच रॉबर्ट फिको (Robert fico) पर हुए हमले को एक्सपर्ट्स पूरे क्षेत्र के लिए खतरा मान रहे हैं। साथ ही उनका मानना है कि यह Europe में अस्थिरता ला सकता है।

