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जन्माष्टमी पर्व अधर्म के नाश व धर्म के स्थापना के लिए माना जाता हैः कृष्णा चटर्जी

गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शिक्षा परिषद के महाराणा प्रताप बालिका इंटर कॉलेज में भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव बड़ी धूमधाम से मनाया गया।

जन्माष्टमी पर्व भगवान श्री कृष्ण के जन्मदिन के रूप में हर साल के भाति इस साल भी रक्षाबंधन के बाद भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को  मनाया गया है। महाराणा प्रताप बालिका इंटर कालेज में प्रधानाचायार्य सुश्री कृष्णा चटर्जी ने कहा कि कृष्ण देवकी और वासुदेव के 8वें पुत्र थे। मथुरा नगरी का राजा कंस था, जो कि बहुत अत्याचारी था। उसके अत्याचार दिन-प्रतिदिन बढ़ते ही जा रहे थे। एक समय आकाशवाणी हुई कि उसकी बहन देवकी का 8वां पुत्र उसका वध करेगा। यह सुनकर कंस ने अपनी बहन देवकी को उसके पति वासुदेवसहित काल-कोठारी में डाल दिया। कंस ने देवकी के कृष्ण से पहले के 7 बच्चों को मार डाला।

जब देवकी ने श्री कृष्ण को जन्म दिया, तब भगवान विष्णु ने वासुदेव को आदेश दिया कि वे श्री कृष्ण को गोकुल में यशोदा माता और नंद बाबा के पास पहुंचा आएं, जहां वह अपने मामा कंस से सुरक्षित रह सकेगा। श्री कृष्ण का पालन-पोषण यशोदा माता और नंद बाबा की देखरेख में हुआ।  भगवान जी की आगमन सभी इंसान के लिए संत जनों के लिए खुशी की माहौल पैदा करती है क्योंकि जब जब इस धरती पर इंसान, अच्छे आदमी अत्याचारीत हुए, तभी भगवान श्री कृष्ण अवतार लेकर इसी धरती पर आए। भगवान श्री कृष्ण के 10वें अवतार की आज के दिन हम पूजन करते हैं।

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श्री कृष्ण जन्माष्टमी के दिन मंदिरों को खासतौर पर सजाया जाता है। जन्माष्टमी पर पूरे दिन व्रत का विधान है। जन्माष्टमी पर सभी 12 बजे तक व्रत रखते हैं। इस दिन मंदिरों में झांकियां सजाई जाती हैं और भगवान श्रीकृष्ण को झूला झुलाया जाता है और रासलीला का आयोजन होता है। जन्माष्टमी के दिन देश में अनेक जगह दही-हांडी प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है। दही-हांडी प्रतियोगिता में विजेता टीम को उचित इनाम दिए जाते हैं।

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