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ज्ञानवापी मस्जिद सर्वे : सुप्रीम कोर्ट ने कहा- पहले निचली अदालत में सुनवाई हो पूरी फिर सुप्रीम कोर्ट में आएं

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस डीवाई चन्द्रचूड़ मंगलवार को वाराणसी की अंजुमन-ए-इंतेजामिया मस्जिद कमेटी द्वारा ज्ञानवापी मस्जिद सर्वे रुकवाने के सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका दायर करने वाले पक्ष के अधिवक्ताओं से कहा कि वे पहले निचली अदालत में इस मामले की सुनवाई पूरी हो जाने दें और यदि वे निचली अदालत के फैसले से असंतुष्ट होने हों, तो वे फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत या हाईकोर्ट में जा सकते हैं। मस्जिद कमेटी ने 13 मई को यह याचिका दाखिल की था, लेकिन उस दिन याचिका पर कोई आदेश नहीं दिया था।

सुप्रीम कोर्ट ने आज याचिका पर सुनवाई के बाद अंजुमन-ए-इंतेजामिया मस्जिद कमेटी के वकीलों से कहा कि जब इस मामले की सुनवाई निचली अदालत में चल रही है, पहले इसकी सुनवाई पूरी हो जाने दीजिए। यदि कोई पक्ष अदालत के फैसले से असतुंष्ट होता है तो वह फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत अथवा हाईकोर्ट में जा सकते हैं।

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सुप्रीम कोर्ट ने वाराणसी जिला प्रशासन को निर्देश दिया कि ज्ञानवापी मस्जिद में मिले शिवलिंग की सुरक्षा की जाए, लेकिन सुरक्षा के कारण नमाज पढने से रोका न जाए। इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए कि नमाज पढने वाले को परेशानी नहीं होनी चाहिए। याचिका में कहा गया था कि सर्वे का आदेश देने में द प्लेसेज आफ वर्शिप (स्पेशल प्रोविजन्स) एक्ट 1991 को उल्लंघन बताते हुए सर्वे तत्काल रोकने की मांग की गयी थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रकरण से जुड़े तथ्यों को देखे बगैर सर्वे रोकने के लिए कोई भी आदेश देने से इंकार कर दिया था।

मस्जिद कमेटी की इस याचिका के खिलाफ हिन्दू सेना ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर खुद को पक्षकार बनाये जाने की मांग की थी, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया था। आज हुई सुनवाई में हिन्दू सेना की ओर से वरिष्ठ वकील अश्वनी कुमार उपाध्याय उपस्थित हुए। हिन्दू पक्ष के वकीलों ने कहा कि ज्ञानवापी मस्जिद सर्वे के आदेश में किसी भी तरह से द प्लेसेज आफ वर्शिप (स्पेशल प्रोविजन्स) एक्ट 1991 को उल्लंघन न होने की बात बतायी। सुप्रीम कोर्ट द्वारा ज्ञानवापी मस्जिद-गौरी श्रंगार मंदिर प्रकरण में यथास्थिति बनाये रखने का आदेश देने से इंकार करने पर हिन्दू पक्ष को सारा मामला वाराणसी कोर्ट से ही निपट जाने की उम्मीद जाग गयी है।

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