22 year old record broken in Himachal, monsoon rains, 942.9 mm rain recorded
Heavy Rainfall: हिमाचल प्रदेश इस बार मानसून की झड़ी में पूरी तरह भीग गया है। 5 सितंबर तक प्रदेश में 942.9 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई, जो पिछले 22 सालों में किसी भी मानसून सीजन में दर्ज की गई सबसे अधिक वर्षा है। छोटे पहाड़ी राज्य में बादलों की यह झड़ी न केवल मौसम का मिज़ाज बदल रही है, बल्कि आपदा और राहत दोनों के नए किस्से गढ़ रही है।
किसानों और बागवानों की मिली-जुली प्रतिक्रिया
मानसून की इस प्रचुर वर्षा ने जहां खेतों और बागानों में नमी बढ़ाकर किसानों व बागवानों को उम्मीद दी, वहीं लगातार कई दिनों तक हुई तेज बारिश ने फसलों को बर्बाद भी किया है। कई इलाकों में मक्की और सेब की फसलें प्रभावित हुई हैं। किसानों का कहना है कि बारिश से खेतों में पानी भर गया, जिससे पैदावार पर असर पड़ा है।
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आपदा और चुनौतियों से घिरा प्रदेश
भारी वर्षा से प्रदेश का प्राकृतिक सौंदर्य जरूर निखरा है, लेकिन इसके साथ ही भूस्खलन, सड़कों का बंद होना और नदियों-नालों का जलस्तर बढ़ना लोगों की मुश्किलें बढ़ा रहा है। कई पहाड़ी ढलानों के खिसकने से गांवों का संपर्क टूट गया है। प्रशासन लगातार अलर्ट पर है, लेकिन लोगों की दिक्कतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं।
जिलावार बारिश के आंकड़े
बिलासपुर: 1276.1 मिमी बारिश (77% अधिक)
चंबा: 1021.8 मिमी (35% अधिक)
हमीरपुर: 1330.1 मिमी (51% अधिक)
कांगड़ा: 1691.3 मिमी (16% अधिक)
कुल्लू: 1020.5 मिमी (117% अधिक)
शिमला: 1157.4 मिमी (113% अधिक)
सिरमौर: 1545 मिमी (47% अधिक)
सोलन: 1359.8 मिमी (78% अधिक)
ऊना: 1475.1 मिमी (73% अधिक)
किन्नौर: 281.1 मिमी (41% अधिक)
लाहौल-स्पीति: 280.6 मिमी (11% कम)
मंडी: 1680.2 मिमी (70% अधिक)
इन आंकड़ों से साफ है कि अधिकतर जिलों में बारिश सामान्य से कहीं अधिक दर्ज की गई है।
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22 साल का रिकॉर्ड
अगर पिछले दो दशकों के आंकड़े देखें तो हिमाचल ने अब तक इतनी बारिश नहीं देखी थी।
2004: 423.0 मिमी (45% कम)
2005: 568.6 मिमी (26.5% कम)
2006: 579.5 मिमी (25.1% कम)
2007: 495.7 मिमी (35.9% कम)
इसके मुकाबले 2025 का आंकड़ा लगभग दोगुना है।
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मानसून की विदाई में अभी वक्त
आमतौर पर प्रदेश से मानसून की विदाई 30 सितंबर के आसपास होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि अभी बारिश का दौर पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। आने वाले दिनों में भी रुक-रुक कर वर्षा जारी रहेगी।
हिमाचल में इस बार का मानसून किसानों, बागवानों और आम लोगों के लिए दोहरी तस्वीर लेकर आया है। जहां यह जलस्रोतों को संजीवनी दे रहा है और भविष्य की फसलों के लिए जमीन को उपजाऊ बना रहा है, वहीं भूस्खलन, आपदाओं और सड़क बंद होने जैसी समस्याएं भी बढ़ा रहा है। आने वाले दिनों में मानसून की विदाई से पहले प्रदेश को और नई चुनौतियों के लिए तैयार रहना होगा।

