Congress marched to Raj Bhavan, cornered the government on law and order and disaster management
Raj Bhawan March: उत्तराखंड कांग्रेस ने राज्य में बिगड़ती कानून-व्यवस्था, आपदा प्रभावित क्षेत्रों की अनदेखी और पंचायत चुनावों में धांधली के खिलाफ 26 अगस्त को राजभवन कूच का ऐलान किया है। पार्टी का कहना है कि भाजपा सरकार के संरक्षण में अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और आम जनता असुरक्षित महसूस कर रही है।
प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने प्रेस वार्ता में कहा कि राज्य में “कानून का राज खत्म हो गया है” और भाजपा नेताओं की संलिप्तता आपराधिक घटनाओं में साफ दिखाई दे रही है। उन्होंने दावा किया कि हत्या, दुष्कर्म और पॉक्सो जैसे संगीन मामलों में बार-बार भाजपा नेताओं के नाम सामने आ रहे हैं, लेकिन सरकार और संगठन औपचारिक कार्रवाई तक सीमित रह जाते हैं।
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महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल
धस्माना ने प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि अंकिता भंडारी प्रकरण से लेकर हरिद्वार की 13 वर्षीय बच्ची के साथ हुए दुष्कर्म जैसे मामलों ने सरकार की नीयत और नीति दोनों पर सवाल खड़े किए हैं। उनका आरोप है कि भाजपा महज दो लाइन का निष्कासन पत्र जारी कर मामले से पल्ला झाड़ लेती है।
उन्होंने पौड़ी गढ़वाल के हालिया आत्महत्या मामले का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें सामने आए नाम भाजपा से जुड़े हैं। आरोपितों पर भ्रष्टाचार और ठगी जैसे मामलों की लंबी सूची है। यहां तक कि एक पूर्व मुख्यमंत्री के रिश्तेदार को भी करोड़ों रुपए की धोखाधड़ी का शिकार बनाया गया।
अपराधियों के हौसले बुलंद
कांग्रेस नेता ने पंचायत चुनावों का उदाहरण देते हुए कहा कि नैनीताल और बेतालघाट में खुलेआम हथियार लहराए गए, पुलिस के सामने ही अपहरण और गोलीबारी हुई। उनका कहना था कि यह सब दर्शाता है कि भाजपा शासन में राज्य को “उत्तर प्रदेश और बिहार” जैसे हालात की ओर धकेला जा रहा है।
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पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत द्वारा प्रदेश के पुलिस महानिदेशक को लिखे गए पत्र का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा के अपने वरिष्ठ नेता भी कानून-व्यवस्था से असंतुष्ट हैं। यह स्थिति बताती है कि पुलिस तंत्र और प्रशासन पर दबाव के कारण निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हो पा रही है।
आपदा प्रबंधन पर भी सवाल
धस्माना ने कहा कि उत्तराखंड आज भीषण आपदा से जूझ रहा है। उत्तरकाशी के धराली और हर्षिल क्षेत्र में भारी नुकसान हुआ है, लेकिन सरकार अभी तक प्रभावित परिवारों का सही आंकड़ा तक जारी नहीं कर पाई है।
चारधाम यात्रा मार्ग, राष्ट्रीय राजमार्ग और सैकड़ों संपर्क मार्ग क्षतिग्रस्त हैं। हजारों लोग दुश्वारियों का सामना कर रहे हैं, लेकिन सड़क और पुल बहाली का काम बेहद धीमी गति से चल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि “आपदा प्रबंधन का सारा जोर केवल कागजों पर है, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और है।”
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कांग्रेस का राजभवन कूच
सूर्यकांत धस्माना ने घोषणा की कि 26 अगस्त को कांग्रेस पार्टी जनहित के मुद्दों पर निर्णायक लड़ाई लड़ने के लिए राजभवन कूच करेगी। इस आंदोलन में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष करन माहरा, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह और गणेश गोदियाल समेत तमाम वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता शामिल होंगे।
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार को जनता के गुस्से का सामना करना पड़ेगा क्योंकि उसने जनता के जीवन और सुरक्षा से खिलवाड़ किया है। कांग्रेस का लक्ष्य न सिर्फ भ्रष्टाचार और अपराध के खिलाफ आवाज उठाना है, बल्कि आपदा प्रभावितों की पीड़ा को भी सत्ताधारियों तक पहुंचाना है।
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जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने की चुनौती
कांग्रेस का यह आंदोलन प्रदेश की राजनीति में बड़ा मोड़ साबित हो सकता है। पार्टी नेतृत्व यह संदेश देना चाहता है कि वह केवल सत्ता विरोध तक सीमित नहीं, बल्कि जनता के मुद्दों पर भी गंभीर है। हालांकि, सवाल यह भी है कि क्या कांग्रेस इस कूच के जरिए जनता का भरोसा जीत पाएगी और क्या आंदोलन सरकार पर दबाव बना पाएगा।
राज्य में लगातार हो रही आपराधिक घटनाओं और आपदा प्रबंधन में ढिलाई ने विपक्ष को एक मजबूत मुद्दा दिया है। आने वाले समय में यह देखना होगा कि कांग्रेस का यह राजभवन कूच सरकार के लिए कितना चुनौतीपूर्ण साबित होता है और क्या इससे राज्य की राजनीति में हलचल मचती है।

