Delhi Professor Murder Case: Tenant conspiracy and Satyam Apartment killing.
Delhi Professor Murder Case: राजनीति, सत्ता और पैसों की जंग में हमने कई कत्ल होते देखे हैं। लेकिन जब शिक्षा के मंदिर को रोशन करने वाली एक प्रोफेसर की चीखें, दिल्ली के एक पॉश सोसाइटी के फ्लैट में घुटकर दम तोड़ देती हैं… तो रूह कांप जाती है। 3 जून की वो रात… दिल्ली के वसुंधरा एन्क्लेव का सत्यम अपार्टमेंट। जहां दिल्ली विश्वविद्यालय की 39 साल की असिस्टेंट प्रोफेसर देबोस्मिता पॉल रहती थीं। एक ऐसी महिला, जिन्होंने अपनी मेहनत से समाज में सम्मान कमाया, जो अपनी बुद्धिमानी से सैकड़ों छात्रों का भविष्य संवार रही थीं।
लेकिन क्या कोई सोच सकता था कि जिस फ्लैट में वे सुकून की नींद सोती थीं, वही फ्लैट उनकी जिंदगी की आखिरी रात का गवाह बनने वाला था? वो हत्या कोई आम वारदात नहीं थी। वो एक ऐसी खौफनाक और सोची-समझी साजिश थी, जिसकी स्क्रिप्ट ढाई महीने पहले… दिल्ली से सैकड़ों किलोमीटर दूर पश्चिम बंगाल के बर्धवान में लिखी जा चुकी थी।
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2023 में शुरू हुई इस साजिश की पहली कड़ी
इस कहानी की शुरुआत होती है साल 2023 से। पश्चिम बंगाल के बर्धवान में प्रोफेसर देबोस्मिता पॉल (Delhi Professor Murder Case) का एक पुश्तैनी मकान था। कोई छोटा-मोटा मकान नहीं, बल्कि 1200 गज में फैला एक आलीशान, विशाल बंगला। इस बंगले की कीमत आज के बाजार भाव में करोड़ों रुपये है। चूंकि देबोस्मिता दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ाती थीं और दिल्ली में ही रहती थीं, इसलिए बर्धवान का वो विशाल मकान खाली पड़ा रहता था।
तभी देबोस्मिता की जिंदगी में एंट्री होती है राम प्रसाद दास नाम के एक शख्स की। राम प्रसाद सेनेटरी (Sanitary) का काम करता था और अक्सर सामान लेने दिल्ली आता-जाता रहता था। एक जानकार के जरिए राम प्रसाद ने प्रोफेसर देबोस्मिता से संपर्क किया और कहा कि उसे बर्धवान में रहने के लिए जगह चाहिए। प्रोफेसर देबोस्मिता ठहरीं एक सीधी-सादी शिक्षिका। उन्होंने इंसानियत के नाते साल 2023 में राम प्रसाद को अपने उस विशाल मकान के दो कमरे महज 5 हजार रुपये महीने के किराए पर दे दिए।
धीरे-धीरे राम प्रसाद ने देबोस्मिता का भरोसा जीता। उसने चिकनी-चुपड़ी बातें करके कुछ समय बाद वह पूरा का पूरा 1200 गज का मकान सिर्फ 11 हजार रुपये महीने के किराए पर अपने कब्जे में ले लिया। राम प्रसाद वहां अपनी पत्नी बनश्री दास और अपने बेटे के साथ रहने लगा।
करोड़ों की संपत्ति ने बदली किरायेदार की नीयत
लेकिन कहते हैं ना कि जब इंसान को बिना मेहनत के बड़ी चीज मिल जाती है, तो उसकी नीयत डोल जाती है। राम प्रसाद उस करोड़ों के बंगले में रहते-रहते खुद को उसका मालिक समझने लगा था। उसकी आंखों पर लालच का ऐसा चश्मा चढ़ चुका था, जिसे सिर्फ और सिर्फ दौलत दिखाई दे रही थी।
समय बीतता गया। कुछ समय पहले प्रोफेसर देबोस्मिता पॉल (Delhi Professor Murder Case) को किसी वजह से अपने उस पुश्तैनी मकान की जरूरत पड़ी। उन्होंने राम प्रसाद से बेहद शालीनता से कहा कि वे अब इस मकान को खाली कर दें, क्योंकि उन्हें इसकी जरूरत है।
बस, यही वो पल था जहां से राम प्रसाद का असली चेहरा सामने आया। जिस मकान को उसने किराए पर लिया था, उसे खाली करने के नाम पर उसके पैर पीछे खिंचने लगे। उसने साफ मना कर दिया कि वो मकान खाली नहीं करेगा। देबोस्मिता ने एक बार कहा, दो बार कहा, बार-बार मिन्नतें कीं, लेकिन राम प्रसाद की नीयत खराब हो चुकी थी। वह उस करोड़ों की संपत्ति को किसी भी कीमत पर छोड़ना नहीं चाहता था।
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कानूनी चेतावनी के बाद गहराया विवाद
जब पानी सिर से ऊपर चला गया, तो प्रोफेसर देबोस्मिता (Delhi Professor Murder Case) ने राम प्रसाद को आखिरी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अगर तुमने कानूनी तरीके से मकान खाली नहीं किया, तो मैं तुम्हारे खिलाफ कोर्ट जाऊंगी और पुलिस में शिकायत दर्ज कराकर तुम्हें बलपूर्वक बाहर निकलवाऊंगी।
प्रोफेसर की इस कानूनी कार्रवाई की धमकी ने राम प्रसाद के भीतर छिपे शैतान को जगा दिया। उसे लगा कि अगर कानूनी कार्रवाई हुई, तो यह करोड़ों का मकान उसके हाथ से हमेशा के लिए निकल जाएगा। और यहीं से शुरू हुई देबोस्मिता पॉल (Delhi Professor Murder Case) को रास्ते से हटाने की वो खौफनाक साजिश, जिसे सुनकर पुलिस के भी होश उड़ गए।
आरोपी राम प्रसाद ने पुलिस की पूछताछ में जो कबूला, वो किसी भी क्राइम थ्रिलर फिल्म से ज्यादा डरावना है। राम प्रसाद ने करीब डेढ़ से दो महीने पहले ही तय कर लिया था कि वो प्रोफेसर देबोस्मिता (Delhi Professor Murder Case) को जिंदा नहीं छोड़ेगा। उसका मकसद साफ था – अगर मालिक ही नहीं रहेगी, तो करोड़ों की इस संपत्ति पर अवैध कब्जा करना बेहद आसान हो जाएगा।
लेकिन राम प्रसाद कोई गलती नहीं करना चाहता था। वो इस कत्ल को इतना परफेक्ट बनाना चाहता था कि पुलिस उस तक कभी पहुंच ही न पाए। इसके लिए उसने अपनी पत्नी बनश्री दास को भी इस साजिश में शामिल किया।
दिल्ली में रेकी कर तैयार की गई पूरी योजना
आपको जानकर हैरानी होगी कि वारदात को अंजाम देने से पहले, यह दंपती दो बार पश्चिम बंगाल से दिल्ली आया। सिर्फ इसलिए? ताकि वो वसुंधरा एन्क्लेव के सत्यम अपार्टमेंट में प्रोफेसर देबोस्मिता (Delhi Professor Murder Case) के घर की रेकी (Reece) कर सकें। उन्होंने अपार्टमेंट की, फ्लैट की और वहां आने-जाने वाले रास्तों की गुपचुप तरीके से तस्वीरें खींचीं। उन्होंने CCTV कैमरों की पोजीशन देखी। उन्होंने यह नोट किया कि प्रोफेसर कब अकेली होती हैं, सोसाइटी में सिक्योरिटी गार्ड्स कब बदलते हैं और वारदात के बाद भागने का सबसे सुरक्षित रास्ता कौन सा होगा।
पूरी प्लानिंग मुकम्मल करने के बाद, तारीख चुनी गई जून की शुरुआत। 1 जून को राम प्रसाद, उसकी पत्नी बनश्री और उनका 13 साल का बेटा दिल्ली पहुंचते हैं। पुलिस से बचने के लिए वे सीधे प्रोफेसर (Delhi Professor Murder Case) के घर नहीं जाते, बल्कि 2 जून को दिल्ली के दल्लूपुरा इलाके के एक गुमनाम गेस्ट हाउस में कमरा लेते हैं। उनकी पीठ पर लटके बैग में सिर्फ कपड़े नहीं थे… बल्कि मौत का वो सामान था जिसे देखकर किसी भी इंसान का कलेजा कांप जाए।
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3 जून की रात सत्यम अपार्टमेंट में पहुंचा खौफ
3 जून की रात। सत्यम अपार्टमेंट… जहां प्रोफेसर देबोस्मिता (Delhi Professor Murder Case) अकेली थीं। राम प्रसाद अपनी पत्नी और बेटे के साथ उनके फ्लैट पर पहुंचता है। शायद बातचीत के बहाने या फिर सीधे फ्लैट के अंदर दाखिल होकर, उन्होंने प्रोफेसर को संभलने का एक मौका भी नहीं दिया।
राम प्रसाद अपने बैग से एक भारी-भरकम ‘मूसली’ (ओखली की मूसली) निकालता है। इससे पहले कि प्रोफेसर देबोस्मिता अपनी जान बचाने के लिए शोर मचा पातीं, राम प्रसाद ने उस भारी मूसली से उनके सिर पर एक के बाद एक… चार से पांच जोरदार वार किए। वार इतने भयानक थे, प्रहार इतना क्रूर था कि प्रोफेसर की एक आंख अपनी जगह से बाहर निकल आई। वो लहूलुहान होकर फर्श पर गिर पड़ीं।
लेकिन कातिल के सिर पर खून सवार था। उसे यह पक्का करना था कि देबोस्मिता (Delhi Professor Murder Case) किसी भी हाल में जिंदा न बचें। राम प्रसाद ने तुरंत अपने बैग से एक तेज धार वाला ‘उस्तरा’ निकाला और तड़पती हुई प्रोफेसर की दोनों कलाइयों की नसों को बेरहमी से काट दिया। खून का फव्वारा छूट पड़ा… और कुछ ही मिनटों में दिल्ली विश्वविद्यालय की एक होनहार प्रोफेसर का शरीर शांत हो गया।
और इस पूरे खौफनाक मंजर के दौरान, वहां कौन मौजूद था? उनका 13 साल का सगा बेटा। वो मासूम बच्चा अपनी आंखों के सामने अपने ही माता-पिता को एक महिला की बेरहमी से हत्या करते हुए देख रहा था। कातिलों ने ममता, इंसानियत और कानून… सबका कत्ल एक साथ कर दिया था।
हत्या के बाद सबूत मिटाने की कोशिश
कत्ल करने के बाद, कातिल दंपती ने सबूत मिटाने और पुलिस को गुमराह करने की शातिराना कोशिशें शुरू कीं। खून से सने कपड़ों को बदलने के लिए उन्होंने बैग से नए कपड़े निकाले। राम प्रसाद और बनश्री ने अपने कपड़े बदले, लेकिन चालाकी देखिए – उन्होंने अपने बेटे के कपड़े नहीं बदले ताकि किसी को शक न हो। वे लिफ्ट से नीचे उतरे, सोसाइटी से बाहर आए और एक कैब बुक की।
कैब (Delhi Professor Murder Case) से वे आनंद विहार पहुंचे। वहां कैब वाले को पैसे दिए, सड़क पार की और पुलिस को गच्चा देने के लिए वहां से नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के लिए एक ऑटो कर लिया। नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पहुंचने के बाद, उन्होंने फिर से अपने कपड़े बदले। इसके बाद जनरल टिकट काउंटर से टिकट कटाया और पूर्वा एक्सप्रेस में सवार होकर पश्चिम बंगाल के लिए रवाना हो गए।
उन्हें लगा कि वे बच निकले। उन्हें लगा कि दिल्ली पुलिस हाथ मलती रह जाएगी। लेकिन वो कहते हैं ना कि ‘कानून के हाथ लंबे होते हैं और मुजरिम कितनी भी चालाकी कर ले, कोई न कोई गलती जरूर करता है।’
सीसीटीवी फुटेज से खुला बड़ा सुराग
इस केस में कातिल बनश्री दास से एक गलती हो गई। रेलवे स्टेशन की घबराहट में उसने अपने चेहरे से मास्क हटा दिया था। जब दिल्ली पुलिस ने सत्यम अपार्टमेंट से लेकर आनंद विहार और नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के सैकड़ों सीसीटीवी कैमरों को खंगाला, तो पुलिस की पैनी नजर उस चेहरे पर जाकर टिक गई। बनश्री का वो चेहरा सीसीटीवी में कैद हो चुका था।
दिल्ली पुलिस की एक स्पेशल टीम तुरंत कातिलों के पीछे लग गई। पूर्वा एक्सप्रेस बंगाल की तरफ दौड़ रही थी और दिल्ली पुलिस की टीमें तकनीकी सर्विलांस और जमीनी नेटवर्क के जरिए उनका पीछा कर रही थीं। 4 जून की दोपहर 3 बजे, यह दंपती बंगाल (Delhi Professor Murder Case) के बर्धवान स्टेशन पहुंचता है। वहां से वे पैदल बाजार जाते हैं, अपनी स्कूटी उठाते हैं और अपने उसी घर पहुंचते हैं, जिस पर कब्जा करने के लिए उन्होंने मर्डर किया था।
उन्हें लगा कि वे सुरक्षित अपने ठिकाने पर आ गए हैं। लेकिन रविवार को दिल्ली पुलिस ने स्थानीय पुलिस की मदद से उस मकान को चारों तरफ से घेर लिया। राम प्रसाद और बनश्री को उनके बेटे के सामने ही धर दबोचा गया।
जब पुलिस ने राम प्रसाद और बनश्री की तलाशी ली, तो उनके पास से जो सामान मिला, उसने पुलिस को भी हैरान कर दिया। उनके पास से मृतका प्रोफेसर देबोस्मिता (Delhi Professor Murder Case) का मोबाइल फोन बरामद हुआ। इसके अलावा, फ्लैट से चुराई गई 25 महंगी घड़ियां मिलीं।
लेकिन सबसे चौंकाने वाली चीज थी – पश्चिम बंगाल पुलिस का एक ‘फर्जी पहचान पत्र’ (Fake ID Card) जो राम प्रसाद दास के नाम पर बना हुआ था। इसके साथ ही एक टीटी (TT) की नेमप्लेट भी मिली। शुरुआती जांच में पता चला है कि राम प्रसाद सिर्फ एक किरायेदार या सेनेटरी वर्कर नहीं था, बल्कि वह चोरी और ठगी जैसी वारदातों में पहले से शामिल रहा था। वह पुलिस से बचने के लिए इसी फर्जी पुलिस आईडी का इस्तेमाल करता था, लेकिन पहले कभी पकड़ा नहीं गया था।
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नाबालिग बेटे की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल
अब पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस पूरे हत्याकांड में उस 13 साल के नाबालिग बेटे की क्या भूमिका थी? क्या वह सिर्फ अपने मां-बाप के डर से उनके साथ खड़ा था, या उसे जानबूझकर एक ढाल (Shield) के रूप में इस्तेमाल किया गया था ताकि ट्रेन या कैब में सफर करते वक्त किसी को इस हंसते-खेलते ‘परिवार’ पर शक न हो? पुलिस फिलहाल कानूनी सलाह ले रही है कि उस बच्चे को इस मामले में सह-आरोपी बनाया जाए या नहीं।
दोस्तों, प्रोफेसर देबोस्मिता पॉल हत्याकांड (Delhi Professor Murder Case) हमें सोचने पर मजबूर करता है कि आज के समाज में किसी पर भरोसा करना कितना खतरनाक हो चुका है। जिस शख्स को उन्होंने सिर छुपाने की जगह दी, महज चंद पैसों के किराए पर अपना करोड़ों का बंगला रहने को दिया, उसी शख्स ने लालच में आकर उनकी जान ले ली।
दौलत और जमीन की भूख ने इंसान को किस कदर अंधा और वहशी बना दिया है कि वो एक महिला की दोनों कलाइयों की नसें काट देता है, सिर पर मूसली से वार करता है, और यह सब अपने 13 साल के बच्चे के सामने करता है। क्या वो माता-पिता अपने बच्चे को अपराधी बनने की ट्रेनिंग दे रहे थे?
दिल्ली पुलिस की मुस्तैदी ने खोली साजिश की परतें
आज प्रोफेसर देबोस्मिता (Delhi Professor Murder Case) हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन दिल्ली पुलिस की मुस्तैदी ने यह साफ कर दिया है कि कातिल चाहे कितनी भी दूर भाग जाए, कानून के शिकंजे से नहीं बच सकता। उम्मीद है कि अदालत इस मामले में राम प्रसाद और उसकी पत्नी बनश्री को ऐसी सख्त से सख्त सजा देगी, जो समाज के लिए एक मिसाल बने।
इस खौफनाक वारदात पर और आज के समय में किरायेदारों पर बढ़ते भरोसे को लेकर आपकी क्या राय है? क्या मकान मालिकों को और ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है? हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।

