UP Varanasi News: काशी के पिशाच मोचन कुंड पर किन्नरों ने पिंडदान किया। दिल्ली, राजस्थान, एमपी, उड़ीसा, मुम्बई के साथ साउथ से भी किन्नर वहां पहुंचे। उन्होंने अकाल मृत्यु पाए अपने पुर्वजों की आत्माओं की शांति के लिए यह निर्णय लिया।
आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण के साथ पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए शनिवार को काशी के पिशाच मोचन कुंड पर किन्नरों ने पिंडदान किया।
कुंड पर किन्नरों ने त्रिपिंडी श्राद्ध किया। ताकि उनके ज्ञात-अज्ञात पूर्वजों की भटकती आत्मा को मुक्ति मिल सके।
त्रिपिंडी श्राद्ध अकाल मौत के चलते प्रेत योनि में भटकती आत्माओं की तृप्ति और शांति के लिए किया जाता है।
दिन के 11 बजे वेदियों पर तीन तीन कलश को क्रमशः लाल, काले और सफेद कपड़ों में अभिमंत्रित कर सस्वर मंत्रोच्चार के साथ श्राद्ध आरंभ हुआ। पुरोहितों ने श्राद्ध के समय बारिश को शुभ बताया। उनका कहना था कि किन्नरों के पुरखों कु आत्मओं के तृप्त होने का यह संकेत है।
श्राद्ध के बाद पिंडों को प्रेतकुंड मे अर्पित किया गया। पिंडदान करने वाले किन्नरों में मंडलेश्वर देवी भवानी, मंडलेश्वर देवी पवित्रा, दिल्ली से आईं मंडलेश्वर देवी खुशी सिंह, लखनऊ की देवी सुधा तिवारी, देवी ट्विंकल समेत कई दर्जन किन्नर शामिल थे।
आचार्य अनूप शर्मा के आचार्यत्व में 21 पुरोहितों ने पिंडदान कराया। इसके बाद दुर्गा कुंड स्थित हनुमान प्रसाद अंध विद्यालय में संन्यासियों, किन्नरों ने ब्राह्मण भोज कराया।

