UP Ghaziabad News: The sting of dowry and the silence of the law! Victim awaits justice in Ghaziabad
UP Ghaziabad News: गाजियाबाद के मुरादनगर के नेकपुर गांव में दहेज प्रताड़ना का एक शर्मनाक मामला सामने आया है। यह घटना समाज में फैले लालच और पुलिस प्रशासन की उदासीनता की एक और भयावह तस्वीर पेश करती है। साहिबा, पुत्री काजिम अली, जिसने अपने सपनों का घर बसाने के लिए कदम बढ़ाया, ससुराल में दहेज के दानवों और पुलिस की अनदेखी का शिकार बन गई।
निकाह से निराशा तक: एक बेटी का संघर्ष
18 जून 2023 को साहिबा का निकाह मुस्लिम रीति-रिवाज से जावेद के साथ हुआ। साहिबा के परिवार ने अपनी हैसियत से अधिक दहेज और ₹7 लाख नकद देकर बेटी को विदा किया। लेकिन ससुराल पहुंचते ही यह रिश्ता लालच और अत्याचार की भेंट चढ़ गया। शादी के बाद से साहिबा पर लगातार दहेज के लिए दबाव बनाया गया। 14 महीने बाद जब वह अपने ससुराल लौटी, तो उसके गहने छीन लिए गए और उसके साथ बेरहमी से मारपीट की गई। साहिबा ने हिम्मत दिखाते हुए 112 नंबर पर कॉल कर पुलिस को सूचना दी।
पुलिस की बेरुखी: न्याय की राह में बाधा
साहिबा और उसके परिवार ने जब अरावली चौकी में शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की, तो पुलिस ने “सुबह देखेंगे” कहकर मामले को टाल दिया। अगले दिन सुबह 9 बजे साहिबा और उसके परिजन मुरादनगर थाने पहुंचे, लेकिन वहां भी पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। जब साहिबा के भाई ने पुलिस से मीडिया की मदद लेने की बात कही, तो थाने में मौजूद अधिकारी ने तंज कसते हुए कहा, “यहां हजार पत्रकार आते हैं, जो करना है करो।”
समाज और कानून के सवाल
यह घटना केवल साहिबा की त्रासदी नहीं है, बल्कि समाज में गहराई तक जमी दहेज प्रथा और कानून-व्यवस्था की लापरवाही का पर्दाफाश करती है। साहिबा और उसके परिवार ने अब प्रशासन से निष्पक्ष जांच और दोषियों को कड़ी सजा दिलाने की मांग की है।
न्याय की उम्मीद और प्रशासन की परीक्षा
साहिबा जैसी बेटियां समाज का आईना हैं, जिनकी कहानियां इंसाफ की जरूरत और सामाजिक बदलाव की मांग को सामने लाती हैं। अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस पीड़िता की पुकार सुनेगा, या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?

