Avimukteshwaranand on Champat Rai: Shankaracharya Avimukteshwarananda Saraswati giving a statement regarding Champat Rai on the Ram Temple offering controversy.
Avimukteshwaranand on Champat Rai: अयोध्या में राम मंदिर को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इस बार चर्चा का केंद्र शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती हैं, जिन्होंने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय पर तीखा निशाना साधा है। चंपत राय पर अविमुक्तेश्वरानंद (Avimukteshwaranand on Champat Rai) के बयान ने राजनीतिक और धार्मिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है।
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चंपत राय के नाम का मतलब समझाकर कसा तंज
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि चोरी के आरोप नए नहीं हैं, शिला पूजन समारोह के बाद से ऐसे आरोप सामने आ रहे हैं। चंपत राय के नाम पर कमेंट करते हुए उन्होंने कहा कि ‘चंपत’ शब्द ‘चंप’ मूल से बना है, जिसका मतलब है कुछ लेकर भागना। उन्होंने कहा, ‘वह भाग गया, वह कुछ लेकर भाग गया।’ अविमुक्तेश्वरानंद के चंपत राय (Avimukteshwaranand on Champat Rai) पर बयान के बाद इस मुद्दे पर सोशल मीडिया पर कड़ी प्रतिक्रिया आई है।
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भूमि पूजन के बाद से गड़बड़ी के आरोप?
अविमुक्तेश्वरानंद ने दावा किया कि अयोध्या में भूमि पूजन और शिला पूजन समारोह के बाद से कई गड़बड़ियों की खबरें आई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ जमीनों की कीमतें कुछ ही मिनटों में कई गुना बढ़ गईं और पूरे मामले की पूरी जांच होनी चाहिए। उनके बयान के बाद, चंपत राय पर अविमुक्तेश्वरानंद (Avimukteshwaranand on Champat Rai) पूरे देश में चर्चा का विषय बन गए हैं। समर्थक और विरोधी दोनों ही अपने तर्क पेश कर रहे हैं।
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महंत कमल नयन दास ने भी उठाए सवाल
राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष के उत्तराधिकारी महंत कमल नयन दास ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि लगाए जा रहे सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जो भी दोषी पाया जाए उसे सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस मामले से राम मंदिर की छवि खराब हो रही है, इसलिए न्यायिक जांच जरूरी है। उनके इस बयान ने चंपत राय पर अविमुक्तेश्वरानंद (Avimukteshwaranand on Champat Rai) विवाद को और बढ़ा दिया है।
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क्या है पूरा विवाद?
दरअसल, समाजवादी पार्टी के प्रेसिडेंट अखिलेश यादव ने हाल ही में आरोप लगाया था कि राम मंदिर में भक्तों द्वारा दान किए गए करोड़ों रुपये का पूरा हिसाब पब्लिक में उपलब्ध नहीं है। उन्होंने ट्रांसपेरेंसी पर सवाल उठाए थे। हालांकि, चंपत राय ने इन आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि ट्रस्ट के सभी फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन का रेगुलर ऑडिट होता है और हर प्रोसेस ट्रांसपेरेंट तरीके से होता है। इसके बावजूद विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है।
सरकार की नजर, जांच की मांग तेज
मामले की सेंसिटिविटी को देखते हुए, केंद्र और उत्तर प्रदेश दोनों सरकारें पूरे डेवलपमेंट पर करीब से नजर रख रही हैं। राम मंदिर लाखों भक्तों की आस्था का प्रतीक है, इसलिए दान और फाइनेंशियल ट्रांसपेरेंसी से जुड़े किसी भी आरोप को गंभीरता से लिया जा रहा है। इसी वजह से, चंपत राय पर अविमुक्तेश्वरानंद (Avimukteshwaranand on Champat Rai) विवाद अब सिर्फ धार्मिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक बहस का एक बड़ा मुद्दा बन गया है।
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संतों के बयानों से गरमा गया मुद्दा
राम मंदिर को लेकर लग रहे आरोप और तीखे बयान आने वाले दिनों में एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकते हैं। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और महंत कमल नयन दास के उठाए सवालों ने मामले को नई दिशा दे दी है। अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि जांच एजेंसियां और संबंधित संगठन इन आरोपों पर क्या कार्रवाई करते हैं। फिलहाल, अविमुक्तेश्वरानंद-चंपत राय विवाद (Avimukteshwaranand on Champat Rai) पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है।

