Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का बिगुल बजने के साथ ही सियासी हलचलें तेज हो गई हैं। एनडीए में सीट बंटवारे को लेकर जो माथापच्ची चल रही है, उसने एक नया मोड़ ले लिया है। इस बार चुनौती कोई और नहीं, बल्कि युवा नेता चिराग पासवान हैं। उनकी पार्टी, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), ने सीटों की ऐसी डिमांड रख दी है कि बीजेपी के रणनीतिकार भी असमंजस में पड़ गए हैं।
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चिराग की पार्टी ने पहले 243 सीटों पर लड़ने की बात कही थी, लेकिन अब उनके सांसद अरुण भारती ने एक नया दांव खेला है। उन्होंने कहा है कि उनकी पार्टी को 43 से 135 सीटों के बीच सीटें मिलनी चाहिए। यह मांग सुनते ही जेडीयू की भी चिंताएं बढ़ गई हैं।
क्यों बढ़ी मुश्किलें?
चिराग की इस मांग के पीछे ठोस तर्क है। उन्होंने कहा कि 2015 में उनकी पार्टी ने 43 सीटों पर चुनाव लड़ा था, जबकि 2020 में 137 पर। उनका दावा है कि अब चिराग पासवान की लोकप्रियता और बढ़ गई है। इसके अलावा, हाल ही में लोकसभा चुनाव में उनकी पार्टी ने 100% सफलता हासिल की है, जिसमें हाजीपुर, जमुई, समस्तीपुर, खगड़िया और वैशाली जैसी महत्वपूर्ण सीटें शामिल हैं।
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मजबूरी का खेल
दरअसल, एनडीए के लिए चिराग पासवान को नजरअंदाज करना अब आसान नहीं है। बिहार की दलित राजनीति में उनकी मजबूत पकड़ है। लेकिन साथ ही, बीजेपी को अपने दूसरे सहयोगी दलों, खासकर जेडीयू को भी साथ लेकर चलना है। ऐसे में चिराग का अड़ियल रुख एनडीए के लिए मुश्किलें खड़ी कर रहा है।
दूसरी ओर, चिराग के लिए भी महागठबंधन में जाना आसान नहीं है, जहां उन्हें मन मुताबिक सीटें मिलें। अब सबकी नजर इस बात पर है कि एनडीए इस गुत्थी को कैसे सुलझाता है। एक बात तो साफ है, बिहार की राजनीति में चिराग पासवान का कद अब काफी बड़ा हो चुका है और वह एक ऐसी पहेली बन गए हैं जिसे सुलझाना एनडीए के लिए आसान नहीं होगा।
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