Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखें अभी भले ही घोषित न हुई हों, लेकिन राजनीतिक पारा पूरी तरह चढ़ चुका है। दिल्ली से लेकर पटना तक सियासी हलचल तेज हो गई है। एक तरफ, बीजेपी के बड़े नेता दिल्ली में बैठक कर चुनावी रणनीति को आखिरी रूप दे रहे हैं, तो दूसरी तरफ, आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने भी पटना में अपने विधायकों की अचानक मीटिंग बुलाकर सबको चौंका दिया है।
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तेजस्वी की ‘अचानक’ मीटिंग का मतलब
माना जा रहा है कि तेजस्वी यादव की यह बैठक सिर्फ एक रूटीन मीटिंग नहीं है। इसका असली मकसद सीटों के बंटवारे और महागठबंधन में अपनी पकड़ को मजबूत दिखाना है। हाल ही में राहुल गांधी की ‘वोटर अधिकार यात्रा’ के दौरान तेजस्वी ने खुद को सीएम उम्मीदवार बताया था, लेकिन कांग्रेस की तरफ से इसे लेकर कोई स्पष्ट सहमति नहीं दिखी थी। ऐसे में तेजस्वी के लिए यह जरूरी है कि वह अपनी पार्टी को एकजुट रखें और गठबंधन में अपनी भूमिका साफ करें।
बीजेपी की रणनीति पर नजर
उधर, बीजेपी भी पूरी तरह से एक्शन मोड में है। दिल्ली में अमित शाह की अध्यक्षता में हो रही इस बैठक में बिहार चुनाव को लेकर पार्टी की सर्वे रिपोर्ट पर चर्चा की जाएगी। पार्टी मजबूत और कमजोर सीटों की पहचान कर रही है। साथ ही, सहयोगी दलों के साथ सीट बंटवारे का फॉर्मूला तय करने की चुनौती पर भी बात होगी। माना जा रहा है कि बीजेपी उन विधायकों के टिकट काट सकती है, जिनकी परफॉर्मेंस अच्छी नहीं है।
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अब होगा असली खेल
इन बैठकों के बाद बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। दोनों ही गठबंधन में सीटों के बंटवारे को लेकर खींचतान चल रही है। इंडिया गठबंधन में जहां आरजेडी और कांग्रेस के बीच सीटों को लेकर बात होनी बाकी है, वहीं एनडीए में बीजेपी को अपने सहयोगी दलों जैसे जेडीयू और लोजपा (रामविलास) को साधने की चुनौती है।
राजनीतिक पंडितों का मानना है कि इन बैठकों के बाद ही उम्मीदवारों के नामों और चुनाव के मुद्दों पर तस्वीर साफ हो पाएगी। आने वाले दिन बिहार की राजनीति के लिए बेहद खास रहने वाले हैं।
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