Bihar Mahagathbandhan: सीटों का झगड़ा और सीएम का चेहरा…राहुल-तेजस्वी के बीच दूरी से महागठबंधन में बढ़ी बेचैनी
Bihar Mahagathbandhan:बिहार की राजनीति में विपक्षी महागठबंधन (INDIA) ने वोटर अधिकार यात्रा के जरिए माहौल बनाने की कोशिश तो पूरी कर ली, लेकिन असली जंग अब सामने है। यात्रा के समापन के बाद लगातार बैठकों का दौर जारी है, मगर अभी भी तीन अहम मुद्दों सीएम चेहरा, सीटों का बंटवारा और संख्या का समीकरण पर सहमति नहीं बन पाई है। यही तीनों सवाल तय करेंगे कि महागठबंधन NDA को कितनी चुनौती देगा।
कांग्रेस, आरजेडी, सीपीआई-एमएल और वीआईपी समेत कई दलों में मतभेद अब भी गहराए हुए हैं। खासकर सीटों के बंटवारे और मुख्यमंत्री पद के चेहरे को लेकर खींचतान खुलकर सामने आ चुकी है। छोटे दल भी अपनी दावेदारी बढ़ा रहे हैं, जिससे तालमेल और पेचीदा होता जा रहा है।
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सीट बंटवारे पर सबसे बड़ा विवाद
महागठबंधन के भीतर सबसे बड़ा पेंच सीटों के बंटवारे का है। कांग्रेस का कहना है कि पिछली बार उसके खाते में ज्यादातर “डेड सीटें” आईं, जिन्हें कांग्रेस और आरजेडी दोनों पिछले कई चुनावों से नहीं जीत पा रहे थे। इस बार कांग्रेस की रणनीति है कि उन्हें केवल “जिताऊ सीटें” मिलें।
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किसके हिस्से कितनी सीटें?
सीपीआई-एमएल ने इस बार 40 सीटों की मांग कर दी है। वहीं, वीआईपी पार्टी की एंट्री ने समीकरण और मुश्किल बना दिया है। अनुमानित फार्मूले के मुताबिक आरजेडी को 135-140, कांग्रेस को 50-60, सीपीआई-एमएल को 20-25, वीआईपी को 18-20 और सीपीएम व सीपीआई को 2-2 सीटें मिल सकती हैं। हालांकि, इस पर अभी तक कोई अंतिम सहमति नहीं बनी है।
2020 विधानसभा चुनाव में आरजेडी 144, कांग्रेस 70, सीपीआई-एमएल 19, सीपीएम 4 और सीपीआई 6 सीटों पर लड़ी थी। इस बार के समीकरण बदलना तय है और कांग्रेस इसे लेकर दबाव बढ़ा रही है।
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राहुल-तेजस्वी के बीच अनकहा अंतर
महागठबंधन में यह बात मान ली गई है कि आरजेडी सबसे बड़ी पार्टी है और मुख्यमंत्री का चेहरा तेजस्वी यादव होंगे। लेकिन वोटर अधिकार यात्रा के दौरान राहुल गांधी का इस सवाल को टाल जाना और तेजस्वी का राहुल की मौजूदगी में खुद को मुख्यमंत्री बताना, दोनों दलों की सोच में फर्क दिखाता है। कांग्रेस लगातार दोहराती रही है कि “चेहरे का सवाल मीडिया का है”, लेकिन असलियत यही है कि पार्टी चाहती है कि राहुल की मौजूदगी में तेजस्वी का प्रोजेक्शन सीमित रहे। यह बारीक खींचतान आगे चलकर बड़ा विवाद बन सकती है।
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छोटे दलों की दावेदारी से मुश्किलें
वीआईपी की एंट्री के बाद छोटे दलों की दावेदारी और मजबूत हो गई है। आरजेडी अपनी स्थिति को देखते हुए बड़े हिस्से की मांग कर रही है, लेकिन सहयोगियों को साधना भी उसके लिए जरूरी है। जितनी पार्टियां बढ़ेंगी, तालमेल उतना ही पेचीदा होगा।
NDA से मुकाबले के लिए जरूरी ‘एकता’
महागठबंधन वोटर अधिकार यात्रा के बाद जरूर उत्साहित है, लेकिन दबी जुबान में नेता मान रहे हैं कि अगर सीट बंटवारे, संख्या के तालमेल और सीएम चेहरे पर समय रहते सहमति नहीं बनी, तो NDA को टक्कर देना मुश्किल होगा। वहीं, अगर इन तीनों मुद्दों पर एकजुटता बन गई, तो सत्ता की राह उनके लिए आसान हो सकती है।
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तेजस्वी के घर हुई अहम बैठक
इसी बीच, सीट शेयरिंग को लेकर इंडिया गठबंधन की अहम बैठक तेजस्वी यादव के सरकारी आवास एक फूल रोड, पटना में हुई। इस बैठक में कांग्रेस और वीआईपी के नेताओं ने तेजस्वी के साथ गहन मंथन किया। बैठक के बाद बिहार कांग्रेस प्रभारी कृष्ण लवरु और प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने कहा कि “आज की बैठक कई महीनों में सबसे सार्थक रही”। इस बैठक में यह भी तय हुआ कि झारखंड मुक्ति मोर्चा और लोक जनशक्ति पार्टी (पारस गुट) इंडिया गठबंधन के साथ चुनाव लड़ेगी।

