The risk of lightning strikes is increasing in cities, concerns have increased in Raipur, know the reasons and preventive measures

Lightning Safety: अब तक बिजली गिरने की घटनाएं प्रायः गांवों और जंगलों तक सीमित थीं, लेकिन बदलते मौसम और बढ़ती असंतुलित जलवायु के कारण अब शहरी इलाकों में भी यह खतरा तेजी से बढ़ने लगा है। राजधानी रायपुर में हाल ही में कई दर्दनाक हादसे सामने आए हैं, जिसने लोगों और प्रशासन दोनों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि आने वाले दिनों में आकाशीय बिजली का यह खतरा और बढ़ सकता है, इसलिए सावधानी और समय पर चेतावनी ही बचाव का सबसे बड़ा उपाय है।
राजधानी में बढ़ती घटनाएं
पिछले दो महीनों में छत्तीसगढ़ में आकाशीय बिजली गिरने से 160 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। केवल रायपुर में ही चार लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। हालिया मामलों में सबसे दर्दनाक घटना मुजगहन थाना क्षेत्र के महामाईपारा में हुई, जहां 27 वर्षीय सुशीला साहू की खेत से घर लौटते समय बिजली गिरने से मौत हो गई। इसी तरह राजेंद्र नगर थाना क्षेत्र में 10वीं कक्षा के छात्र प्रभात साहू की स्कूल के मैदान में फ्रिसबी खेलते समय बिजली की चपेट में आने से मौत हो गई।
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दस साल का डरावना रिकॉर्ड
राज्य के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। बीते दस वर्षों में छत्तीसगढ़ में दो हजार से ज्यादा लोग और करीब साढ़े आठ हजार पशु आकाशीय बिजली का शिकार हो चुके हैं। सबसे ज्यादा जनहानि और पशुहानि सरगुजा जिले में हुई, जहां 240 लोगों और 833 पशुओं की मौत दर्ज की गई। वहीं जांजगीर-चांपा जिले में 10 साल में 136 लोगों और 4 पशुओं की मौत हुई। यह बढ़ता हुआ आंकड़ा इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में खतरा और गंभीर हो सकता है।
क्यों गिरती है बिजली
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, बादलों में होने वाली तीव्र घर्षण प्रक्रिया और वातावरण में बढ़ते प्रदूषण व नमी के कारण बिजली का निर्माण होता है। बादलों में इलेक्ट्रॉन और प्रोटॉन के बीच ऊर्जा का असंतुलन होने पर यह ऊर्जा धरती तक आकर विस्फोटक रूप में गिरती है। खुले मैदान, ऊंची जगहें और अकेले खड़े पेड़ इस ऊर्जा का सबसे बड़ा लक्ष्य बनते हैं। यही वजह है कि खेतों और ग्रामीण इलाकों में बिजली गिरने की संभावना अधिक रहती है।
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सबसे ज्यादा जोखिम वाले क्षेत्र
भारत में नॉर्थ-ईस्ट के राज्य, पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश, उत्तर ओडिशा और उत्तर छत्तीसगढ़ सबसे ज्यादा संवेदनशील माने जाते हैं। यहां मानसून और प्री-मानसून सीजन के दौरान बिजली गिरने की घटनाएं सामान्य से कहीं अधिक होती हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि जलवायु परिवर्तन और अनियंत्रित शहरीकरण इस खतरे को और बढ़ा रहे हैं।
बचाव के जरूरी उपाय
मौसम वैज्ञानिकों और आपदा प्रबंधन विभाग की सलाह है कि आकाशीय बिजली से बचने के लिए लोगों को पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचना चाहिए। गरज या आंधी-तूफान के समय कंक्रीट शेल्टर में रहना सबसे सुरक्षित है। यदि शेल्टर उपलब्ध न हो तो खुले क्षेत्र में उकड़ू बैठना बेहतर है, ताकि शरीर का अधिक हिस्सा जमीन से संपर्क में न रहे।
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तकनीक से बचाव
भवनों पर तड़ित चालक (Lightning Rod) लगाना बिजली से सुरक्षा के लिए बेहद कारगर है। यह उपकरण बिजली के झटके को जमीन में समाहित कर देता है। केंद्र सरकार की ‘दामिनी ऐप’ भी समय रहते बिजली गिरने की चेतावनी देती है, जिसे हर ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में प्रचारित करने की जरूरत है। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रत्येक पंचायत स्तर पर चेतावनी प्रणाली विकसित करना और ग्रामीणों को जागरूक करना अनिवार्य है।
जागरूकता सबसे जरूरी
मौसम विशेषज्ञ नितिन सिंघवी का कहना है कि ग्रामीण इलाकों में अभी भी जागरूकता की भारी कमी है। लोग बारिश के समय पेड़ों के नीचे खड़े हो जाते हैं या खेतों में काम जारी रखते हैं। हाल ही में कोरबा जिले में ग्रामसभा के दौरान पेड़ के नीचे बिजली गिरने से एक व्यक्ति की मौत इसका उदाहरण है। ऐसे में समय पर चेतावनी और सही सलाह ही इस प्राकृतिक आपदा से बचाव का सबसे कारगर तरीका है।
रायपुर और आसपास के शहरी क्षेत्रों में लगातार बढ़ रही आकाशीय बिजली की घटनाएं बताती हैं कि यह अब केवल ग्रामीण समस्या नहीं रही। जलवायु परिवर्तन, अनियंत्रित शहरीकरण और मौसम के असामान्य पैटर्न ने इस खतरे को नई दिशा दे दी है। विशेषज्ञों की सलाह है कि लोग सावधानी बरतें, दामिनी ऐप का उपयोग करें और तड़ित चालक जैसी तकनीक को अपनाएं, ताकि आने वाले समय में जनहानि को कम किया जा सके।

