Court Fine on Menka Gandhi: कोर्ट की सख्ती, मेनका गांधी को जब्त कुत्तों को न छोड़ना पड़ा भारी, संजय गांधी एनिमल केयर सेंटर पर लगा जुर्माना
Court Fine on Menka Gandhi: यह मामला जगत पुरी थाना क्षेत्र में दर्ज एक FIR से जुड़ा है, जिसमें विशाल नाम के व्यक्ति को आरोपी बनाया गया था। जांच के दौरान पुलिस ने उसके 10 पालतू कुत्तों को जब्त कर संजय गांधी एनिमल केयर सेंटर (SGACC) की कस्टडी में सौंप दिया था। 13 जनवरी को कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया था कि सभी जब्त कुत्तों को उनके मालिक विशाल को सौंप दिया जाए। इसके बावजूद आदेश का पूरी तरह पालन नहीं हुआ।
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कोर्ट ने क्यों लगाया जुर्माना?
गुरुवार को सुनवाई के दौरान इन्वेस्टिगेटिंग ऑफिसर (IO) ने कोर्ट को बताया कि सिर्फ 8 कुत्ते ही मालिक को लौटाए गए, जबकि 2 कुत्ते अब भी SGACC की कस्टडी में हैं। इस पर एडिशनल सेशंस जज सुरभि शर्मा वत्स ने नाराजगी जताई और SGACC पर 5,000 रुपये का जुर्माना लगाया। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि यह रवैया न्यायिक आदेशों की अवहेलना, घोर लापरवाही और जानबूझकर गलतबयानी को दर्शाता है।
कौन से कुत्ते अब भी वापस नहीं मिले?
IO के मुताबिक, जो दो कुत्ते अब तक नहीं लौटाए गए, उनमें शामिल हैं-
- एक पूडल नस्ल का कुत्ता,
- और एक माल्टीज़ नस्ल का कुत्ता।
SGACC के वकील ने कोर्ट में दलील दी कि पूडल कुत्ते को लेने से विशाल ने मना कर दिया, क्योंकि उसके अनुसार वह उसका कुत्ता नहीं था। इस पर कोर्ट ने पूरे मेडिकल और पहचान संबंधी रिकॉर्ड पेश करने का निर्देश दिया। हालांकि, SGACC ने यह भी स्वीकार किया कि माल्टीज़ नस्ल के कुत्ते का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड या लोकेशन नहीं मिल पाई है, जो कोर्ट के लिए और भी गंभीर चिंता का विषय बना।
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लौटाए गए कुत्तों पर भी उठे सवाल
मालिक विशाल की ओर से पेश हुए वकील मयंक शर्मा ने कोर्ट को बताया कि लौटाए गए 8 कुत्तों में से 4 घायल अवस्था में थे, और दो कुत्ते अब भी गायब हैं। उन्होंने यह भी कहा कि SGACC की ओर से दिखाया गया पूडल कुत्ता उनके क्लाइंट का नहीं था, इसलिए उसकी कस्टडी लेने से इनकार किया गया।
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कोर्ट के ताजा निर्देश
सभी दलीलों को सुनने के बाद कोर्ट ने SGACC को निर्देश दिया कि पूडल कुत्ते को मालिक की कस्टडी में सौंपा जाए, माल्टीज़ कुत्ते को लेकर एक विस्तृत रिपोर्ट अगली सुनवाई में दाखिल की जाए। मामले की अगली सुनवाई 4 फरवरी को तय की गई है।
बदला हुआ एंगल – सवाल सिस्टम पर
यह मामला सिर्फ दो कुत्तों का नहीं, बल्कि एनिमल शेल्टर की जवाबदेही और न्यायिक आदेशों के पालन पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। कोर्ट की टिप्पणी साफ संकेत देती है कि समाजसेवा के नाम पर चल रहे संस्थानों से भी कानून के तहत पारदर्शिता और जिम्मेदारी की पूरी उम्मीद की जाती है।

