West Bengal Loudspeaker Controversy as Calcutta High Court seeks government response over mosque loudspeaker removal claims
West Bengal Loudspeaker Controversy: पश्चिम बंगाल में धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर के इस्तेमाल को लेकर विवाद एक बार फिर अदालत तक पहुंच गया है। West Bengal Loudspeaker Controversy से जुड़ी जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा है कि क्या पुलिस ने मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने की कोई कार्रवाई की है। याचिका में दावा किया गया है कि हुगली समेत राज्य के कुछ अन्य जिलों में पुलिस ने कथित तौर पर बिना लिखित आदेश के धार्मिक स्थलों से लाउडस्पीकर हटवाए।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार का पक्ष जानना जरूरी बताया। कोर्ट ने कहा कि सरकार का जवाब सामने आए बिना इस स्तर पर कोई अंतरिम आदेश जारी करना उचित नहीं होगा। मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त को प्रस्तावित है।
करीब 4,000 मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने का दावा
याचिका की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बंद्योपाध्याय की ओर से दावा किया गया कि राज्य में करीब 4,000 मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाए गए हैं। आरोप लगाया गया कि कुछ स्थानों पर पुलिस ने कथित रूप से दबाव बनाकर लाउडस्पीकर हटवाए और इसके लिए संबंधित धार्मिक संस्थानों को लिखित नोटिस भी नहीं दिए गए।
हालांकि, यह संख्या फिलहाल याचिका में किए गए दावे के रूप में सामने आई है। अदालत के समक्ष राज्य सरकार की ओर से इस आंकड़े की पुष्टि या खंडन किया जाना अभी बाकी है।
इसी वजह से West Bengal Loudspeaker Controversy में अब राज्य सरकार के आधिकारिक जवाब को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत यह जानना चाहती है कि पुलिस और प्रशासन ने वास्तव में किन परिस्थितियों में कार्रवाई की और क्या इसके पीछे कोई आधिकारिक आदेश या कानूनी प्रक्रिया थी।
याचिका में पुलिस की कार्रवाई पर उठाए गए सवाल
मामले में दायर जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि पुलिस ने कुछ मस्जिदों और मंदिरों से लाउडस्पीकर हटाने के लिए कथित तौर पर मौखिक निर्देशों का इस्तेमाल किया। याचिकाकर्ता का कहना है कि कार्रवाई से पहले ध्वनि प्रदूषण के स्तर यानी डेसिबल की माप से जुड़ी प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए था।
याचिका में यह भी तर्क दिया गया है कि धार्मिक गतिविधियों से जुड़े अधिकारों को संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत संरक्षण प्राप्त है। हालांकि, धार्मिक स्वतंत्रता पूर्ण अधिकार नहीं है और सार्वजनिक व्यवस्था, स्वास्थ्य तथा अन्य कानूनी प्रतिबंधों के अधीन रहती है। इसी कानूनी संतुलन को लेकर अदालत के सामने कई सवाल उठ रहे हैं।
क्या सिर्फ मस्जिदों पर हुई कार्रवाई?
West Bengal Loudspeaker Controversy में एक अहम सवाल यह भी है कि यदि ध्वनि प्रदूषण के नियमों के उल्लंघन के कारण कार्रवाई की गई, तो क्या यह सभी धार्मिक स्थलों पर समान रूप से लागू हुई?
राज्य सरकार की ओर से अदालत में यह भी कहा गया कि शोर प्रदूषण से जुड़े नियमों के तहत कई मंदिरों से भी लाउडस्पीकर हटाए गए हैं। सरकार का रुख यह है कि कार्रवाई केवल किसी एक धर्म के धार्मिक स्थल तक सीमित नहीं थी।
ऐसे में अदालत के सामने यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन ने लाउडस्पीकर के खिलाफ कार्रवाई किस कानूनी आधार पर की और क्या सभी मामलों में समान प्रक्रिया अपनाई गई।
राज्य सरकार ने याचिका खारिज करने की मांग की
सुनवाई के दौरान राज्य के एडवोकेट जनरल सूरजित नाथ मित्रा ने याचिका को खारिज करने की मांग की। उनकी ओर से तर्क दिया गया कि याचिका में किसी विशेष पुलिस अधिकारी या किसी विशिष्ट मस्जिद का नाम नहीं बताया गया है।
सरकार की ओर से यह सवाल भी उठाया गया कि किसी प्रभावित इमाम या धार्मिक संस्था की ओर से अदालत में सीधे शिकायत सामने नहीं आई है। राज्य पक्ष के अनुसार याचिका मुख्य रूप से याचिकाकर्ता द्वारा प्राप्त जानकारी और लगाए गए आरोपों पर आधारित है।
अदालत ने इसके बावजूद सरकार से इस मामले पर स्पष्ट जवाब देने को कहा है। अदालत ने यह जानना चाहा कि क्या राज्य सरकार का रुख यह है कि लगाए गए आरोप पूरी तरह गलत हैं।
अदालत ने फिलहाल अंतरिम आदेश देने से किया इनकार
कलकत्ता हाईकोर्ट की पीठ ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि राज्य सरकार का पक्ष जाने बिना किसी तरह का अंतरिम आदेश देना उचित नहीं होगा। इसके लिए सरकार को संबंधित अधिकारियों से निर्देश लेने का समय दिया गया है।
अब अगली सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से यह स्पष्ट किया जा सकता है कि धार्मिक स्थलों से लाउडस्पीकर हटाने को लेकर प्रशासन ने क्या कार्रवाई की, किन नियमों के तहत कार्रवाई हुई और क्या इस संबंध में कोई लिखित निर्देश जारी किए गए थे।
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ध्वनि प्रदूषण के नियम भी रहेंगे केंद्र में
West Bengal Loudspeaker Controversy केवल धार्मिक अधिकारों का मामला नहीं है, बल्कि ध्वनि प्रदूषण से जुड़े नियम भी इस विवाद के केंद्र में हैं। सार्वजनिक स्थानों और धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर के इस्तेमाल को लेकर निर्धारित ध्वनि सीमा और अनुमति संबंधी प्रावधान लागू होते हैं।
याचिकाकर्ता का आरोप है कि कुछ मामलों में नियमों के तहत आवश्यक प्रक्रिया पूरी किए बिना कार्रवाई की गई। वहीं सरकार का पक्ष है कि ध्वनि प्रदूषण के नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई की गई और इसमें धार्मिक स्थलों के बीच भेदभाव नहीं किया गया।
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18 अगस्त को फिर होगी सुनवाई
मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त को होने की बात कही गई है। इस सुनवाई में राज्य सरकार का जवाब पूरे विवाद की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण हो सकता है।
फिलहाल करीब 4,000 मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाए जाने का दावा अदालत के सामने आरोप के रूप में है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि या आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। अदालत के समक्ष राज्य सरकार का विस्तृत जवाब आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कितने धार्मिक स्थलों पर कार्रवाई हुई, किस आधार पर हुई और क्या प्रक्रिया अपनाई गई।
West Bengal Loudspeaker Controversy अब धार्मिक स्वतंत्रता, ध्वनि प्रदूषण के नियमों और प्रशासनिक कार्रवाई के बीच कानूनी संतुलन का महत्वपूर्ण मामला बन गया है। अगले चरण में हाईकोर्ट की सुनवाई पर सभी की नजर रहेगी।

