Deep Depression over the Bay of Bengal bringing heavy rainfall, thunderstorms and flood alerts across eastern, central and northern India. (PC- Team)
Deep Depression: देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने बंगाल की खाड़ी के उत्तर-पश्चिम में बने Deep Depression को लेकर कई राज्यों के लिए भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग का कहना है कि यह सिस्टम पूर्वी भारत से आगे बढ़ते हुए मध्य और उत्तर भारत तक व्यापक असर डाल सकता है। इसके चलते ओडिशा, पश्चिम बंगाल, झारखंड, बिहार, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, हरियाणा और पंजाब समेत कई राज्यों में अगले कुछ दिनों तक तेज बारिश, आंधी और बिजली गिरने की संभावना बनी हुई है।
Deep Depression से बदलेगा मानसून का पैटर्न
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में विकसित हुआ Deep Depression इस समय मानसून की गतिविधियों का सबसे प्रमुख चालक बन गया है। 27 जुलाई की सुबह यह सिस्टम ओडिशा और पश्चिम बंगाल तट के निकट सक्रिय था और धीरे-धीरे उत्तर-उत्तर पश्चिम दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसके प्रभाव से अरब सागर और बंगाल की खाड़ी दोनों ओर से नमी लगातार भारतीय भूभाग में प्रवेश कर रही है, जिससे आने वाले दिनों में वर्षा की तीव्रता बढ़ने की संभावना जताई गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मौसम प्रणाली केवल तटीय क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसका प्रभाव मध्य भारत और उत्तर भारत तक महसूस किया जाएगा। इससे कई राज्यों में लंबे समय से बनी बारिश की कमी भी कुछ हद तक पूरी हो सकती है।
गुजरात की भारी बारिश से सुधरे राष्ट्रीय आंकड़े
पिछले कुछ दिनों में गुजरात में हुई रिकॉर्ड बारिश ने राष्ट्रीय स्तर पर मानसून के आंकड़ों में उल्लेखनीय सुधार किया है। हालांकि मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि केवल राष्ट्रीय औसत के आधार पर मानसून की वास्तविक स्थिति का आकलन करना सही नहीं होगा।
गुजरात में अत्यधिक बारिश होने से देश का औसत बेहतर दिखाई दे रहा है, लेकिन बिहार, झारखंड, पूर्वोत्तर राज्यों और उत्तर-पश्चिम भारत के कई हिस्सों में अब भी सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर वर्षा का वितरण कृषि, जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण के लिए कहीं अधिक महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ओडिशा और पश्चिम बंगाल में सबसे ज्यादा असर
Deep Depression का सबसे अधिक प्रभाव ओडिशा और पश्चिम बंगाल में देखने को मिल सकता है। IMD ने इन राज्यों के कई जिलों में भारी से अत्यधिक भारी वर्षा की संभावना जताई है। लगातार बारिश के कारण महानदी समेत कई नदियों का जलस्तर बढ़ रहा है।
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स्थिति को देखते हुए कई जिलों में प्रशासन अलर्ट मोड पर है। निचले इलाकों में जलभराव, स्थानीय बाढ़ और सड़क संपर्क प्रभावित होने की आशंका के चलते राहत एवं बचाव दलों को तैयार रखा गया है। कुछ संवेदनशील क्षेत्रों में स्कूलों को भी एहतियातन बंद किया गया है।
झारखंड, बिहार और पूर्वी भारत को मिलेगी राहत
मौसम विभाग का अनुमान है कि Deep Depression के आगे बढ़ने के साथ झारखंड और बिहार में भी अच्छी बारिश होगी। इन राज्यों में खरीफ की खेती के लिए यह वर्षा काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
हालांकि, अत्यधिक बारिश वाले क्षेत्रों में जलभराव और फसलों को नुकसान का खतरा भी बना रहेगा। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि संतुलित वर्षा किसानों के लिए फायदेमंद होगी, लेकिन कम समय में अत्यधिक बारिश नुकसानदायक साबित हो सकती है।
मध्य भारत में बढ़ेगी बारिश की गतिविधियां
मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और विदर्भ क्षेत्र में भी आने वाले दिनों में व्यापक वर्षा होने की संभावना है। IMD के अनुसार पश्चिमी मध्य प्रदेश में भारी बारिश जबकि पूर्वी मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के कई इलाकों में बहुत भारी बारिश दर्ज की जा सकती है।
यह बारिश जलाशयों के जलस्तर में सुधार, सिंचाई व्यवस्था मजबूत करने और खरीफ फसलों के विकास के लिए सकारात्मक मानी जा रही है। हालांकि संवेदनशील क्षेत्रों में बाढ़ और भूस्खलन की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
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उत्तर भारत में मानसून फिर होगा सक्रिय
उत्तर भारत में पिछले कई दिनों से मानसून अपेक्षाकृत कमजोर बना हुआ था। अब Deep Depression के प्रभाव से मानसून ट्रफ उत्तर की ओर खिसकने की संभावना है, जिससे दिल्ली, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में अच्छी बारिश हो सकती है।
मौसम विभाग ने इन राज्यों में गरज-चमक के साथ बारिश, तेज हवाएं और कुछ स्थानों पर भारी वर्षा की संभावना जताई है। पहाड़ी राज्यों में भूस्खलन और नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
पूर्वोत्तर भारत में चुनौती बरकरार
राष्ट्रीय स्तर पर बारिश के आंकड़ों में सुधार के बावजूद पूर्वोत्तर भारत में स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश के कई हिस्सों में एक ओर बाढ़ की स्थिति बनी हुई है, वहीं कुछ क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश की समस्या भी सामने आ रही है।
असम में हालिया बाढ़ ने लाखों लोगों को प्रभावित किया है और कई जिलों में राहत एवं बचाव कार्य लगातार जारी है। विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण मानसून का स्वरूप लगातार अधिक अस्थिर होता जा रहा है।
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दक्षिण भारत में भी जारी रहेगी बारिश
केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, यनम और लक्षद्वीप में भी मानसूनी गतिविधियां सक्रिय बनी रहेंगी। पश्चिमी तट पर भारी बारिश की संभावना के चलते मछुआरों और समुद्री गतिविधियों से जुड़े लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
मौसम विशेषज्ञों की सलाह
विशेषज्ञों का मानना है कि अब केवल राष्ट्रीय औसत वर्षा को देखकर मानसून की स्थिति का आकलन करना पर्याप्त नहीं है। जिला स्तर पर वर्षा का वितरण, जलाशयों की स्थिति, भूजल स्तर और कृषि आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर ही वास्तविक तस्वीर सामने आती है।
Deep Depression के कारण आने वाले सप्ताह में देश के कई हिस्सों में बारिश की तीव्रता बढ़ने की उम्मीद है, लेकिन इसका वितरण असमान रह सकता है। इसलिए प्रशासन और आम लोगों दोनों को मौसम विभाग की ताजा चेतावनियों पर लगातार नजर रखने और आवश्यक सावधानियां अपनाने की आवश्यकता है। आने वाले कुछ दिन विशेष रूप से पूर्वी, मध्य और उत्तर भारत के लिए महत्वपूर्ण रहने वाले हैं, जहां भारी बारिश के साथ बाढ़ और भूस्खलन जैसी परिस्थितियां भी उत्पन्न हो सकती हैं।

