Crude Oil: Stock Market Today showing Sensex falling 240 points and Nifty trading lower amid weak global markets and rising prices.
Crude Oil: भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार की शुरुआत कमजोर रही। वैश्विक बाजारों से मिले नकारात्मक संकेत, पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में Crude Oil की कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी का असर घरेलू निवेशकों की धारणा पर साफ दिखाई दिया। कारोबार शुरू होते ही बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स करीब 240 अंक की गिरावट के साथ खुला, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी भी लाल निशान में कारोबार करता नजर आया।
विश्लेषकों का कहना है कि मौजूदा समय में Crude Oil की बढ़ती कीमतें, विदेशी निवेशकों की सतर्कता और वैश्विक अनिश्चितताओं ने बाजार में दबाव बढ़ा दिया है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत कंपनियों में लंबी अवधि का निवेश करने वालों के लिए यह गिरावट अवसर भी बन सकती है।
गिरावट के साथ हुई बाजार की शुरुआत
गुरुवार को शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 239.95 अंक फिसलकर 76,515.10 के स्तर पर खुला। वहीं, एनएसई निफ्टी 91.45 अंक टूटकर 23,904.80 पर कारोबार करता दिखाई दिया।
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बाजार खुलते ही अधिकांश सेक्टरों में बिकवाली का दबाव देखने को मिला। निवेशकों ने जोखिम वाले शेयरों में मुनाफावसूली को प्राथमिकता दी, जिससे शुरुआती घंटों में बाजार का रुख कमजोर बना रहा।
Crude Oil की कीमतों ने बढ़ाई बाजार की चिंता
बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर Crude Oil की कीमतों में आई तेजी मानी जा रही है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और लाल सागर क्षेत्र में तेल आपूर्ति से जुड़े जोखिमों ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित किया है।
बेंचमार्क ब्रेंट Crude Oil की कीमत 96 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड भी 88 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर कारोबार करता दिखाई दिया।
भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में Crude Oil महंगा होने से आयात बिल बढ़ने, महंगाई पर दबाव आने और चालू खाते के घाटे पर असर पड़ने की आशंका बढ़ जाती है। यही कारण है कि तेल की कीमतों में तेजी का सीधा असर भारतीय शेयर बाजार पर भी दिखाई देता है।
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किन सेक्टरों पर सबसे ज्यादा असर पड़ा?
गुरुवार के कारोबार में सबसे अधिक दबाव ऑयल एंड गैस सेक्टर पर देखने को मिला। Crude Oil की बढ़ती कीमतों के बीच निफ्टी ऑयल एंड गैस इंडेक्स लगभग एक प्रतिशत तक टूट गया।
इसके अलावा फार्मा, रियल्टी, हेल्थकेयर, पीएसयू बैंक और प्राइवेट बैंकिंग सेक्टर के शेयरों में भी बिकवाली देखने को मिली। निवेशकों ने इन सेक्टरों में सतर्क रुख अपनाया।
हालांकि पूरी तरह नकारात्मक माहौल के बीच एफएमसीजी और मिडस्मॉल आईटी एंड टेलीकॉम सेक्टर में सीमित खरीदारी देखने को मिली। इन सेक्टरों ने बाजार को कुछ हद तक सहारा देने की कोशिश की।
इन दिग्गज शेयरों में आई बड़ी गिरावट
निफ्टी के प्रमुख शेयरों में डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज, इंटरग्लोब एविएशन (इंडिगो), इंफोसिस, बजाज फाइनेंस, सिप्ला, टाटा स्टील और लार्सन एंड टुब्रो (L&T) सबसे अधिक दबाव में रहे।
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इनमें से कुछ शेयर शुरुआती कारोबार में लगभग चार प्रतिशत तक टूट गए। विशेषज्ञों के अनुसार विदेशी निवेशकों की बिकवाली और वैश्विक अनिश्चितताओं का असर इन बड़ी कंपनियों के शेयरों पर भी देखने को मिला।
वैश्विक बाजारों का मिला-जुला संकेत
अमेरिकी शेयर बाजारों में आई कमजोरी का असर एशियाई बाजारों पर भी दिखाई दिया। जापान का निक्केई मामूली बढ़त के साथ कारोबार करता नजर आया, जबकि ताइवान और सिंगापुर के प्रमुख सूचकांक दबाव में रहे।
दूसरी ओर हांगकांग का हैंगसेंग और दक्षिण कोरिया का कोस्पी बेहतर प्रदर्शन करते हुए बढ़त में कारोबार कर रहे थे। इसके बावजूद भारतीय बाजार पर Crude Oil और भू-राजनीतिक घटनाक्रम का प्रभाव अधिक देखने को मिला।
विदेशी निवेशकों की रणनीति पर रहेगी नजर
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी।
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यदि Crude Oil की कीमतें लगातार ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं और वैश्विक तनाव कम नहीं होता, तो विदेशी निवेशकों की बिकवाली बढ़ सकती है। वहीं घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) की खरीदारी बाजार को संतुलित रखने में मदद कर सकती है।
लंबी अवधि के निवेशकों के लिए क्या है रणनीति?
विश्लेषकों का कहना है कि मौजूदा गिरावट से घबराने की बजाय निवेशकों को मजबूत कंपनियों पर ध्यान देना चाहिए। यदि किसी निवेशक का नजरिया लंबी अवधि का है, तो ऐसी गिरावट में अच्छे फंडामेंटल वाले शेयरों को चरणबद्ध तरीके से पोर्टफोलियो में शामिल किया जा सकता है।
हालांकि विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि Crude Oil की कीमतों, वैश्विक आर्थिक संकेतकों, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों और भू-राजनीतिक घटनाओं पर लगातार नजर रखना जरूरी होगा।
आगे बाजार की दिशा किन बातों पर निर्भर करेगी?
आने वाले कारोबारी सत्रों में भारतीय शेयर बाजार की दिशा कई महत्वपूर्ण कारकों से तय होगी। इनमें Crude Oil की अंतरराष्ट्रीय कीमतें, वैश्विक बाजारों का प्रदर्शन, विदेशी निवेशकों की खरीद-बिक्री, कंपनियों के तिमाही नतीजे और घरेलू आर्थिक आंकड़े प्रमुख रहेंगे।
यदि पश्चिम एशिया में तनाव कम होता है और तेल की कीमतों में नरमी आती है, तो बाजार में रिकवरी देखने को मिल सकती है। लेकिन यदि Crude Oil लगातार महंगा बना रहता है, तो निवेशकों की चिंता बढ़ सकती है और बाजार पर दबाव कुछ समय तक जारी रह सकता है।
फिलहाल निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण सलाह यही है कि वे जल्दबाजी में निर्णय लेने से बचें, जोखिम प्रबंधन पर ध्यान दें और केवल मजबूत कंपनियों में ही दीर्घकालिक निवेश की रणनीति अपनाएं।

