Delhi News: हर दिन दिल्ली से 27 लोग हो रहे लापता, सिर्फ 9 को ही खोज पा रही पुलिस
Missing Children in Delhi 2026: देश की राजधानी दिल्ली एक बार फिर डराने वाले आंकड़ों को लेकर चर्चा में है। साल 2026 की शुरुआत के साथ ही लापता लोगों के मामलों ने सभी को चिंता में डाल दिया है। सिर्फ 27 दिनों में 800 से ज्यादा लोग अचानक गायब हो गए। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इनमें बड़ी संख्या बच्चों और किशोरियों की है। पुलिस कोशिशें कर रही है, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि हर दिन जितने लोग लापता हो रहे हैं, उससे कहीं कम लोग ही वापस मिल पा रहे हैं।
हर दिन 27 लापता, लेकिन मिल रहे सिर्फ 9 लोग
दिल्ली पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, साल 2026 के पहले 27 दिनों में कुल 807 लोग लापता दर्ज किए गए। यानी औसतन हर दिन करीब 27 लोग गायब हो रहे हैं। हालांकि पुलिस ने इनमें से 235 लोगों को ट्रेस कर लिया है, लेकिन 572 लोग अब भी लापता हैं। यह संख्या अपने आप में राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करती है।
191 बच्चे लापता, पुलिस अब तक सिर्फ 48 तक पहुंच पाई
इन मामलों में बच्चों की संख्या सबसे ज्यादा चिंता बढ़ाने वाली है। कुल लापता लोगों में 191 नाबालिग शामिल हैं। इनमें से सिर्फ 48 बच्चों को ही पुलिस खोज पाई है, जबकि 137 बच्चे अब भी लापता हैं। यानी हर दिन कई परिवार अपने बच्चों की तलाश में दर-दर भटकने को मजबूर हैं। बच्चों के लापता होने के मामलों में सबसे ज्यादा संख्या लड़कियों की है, जो हालात को और गंभीर बना देती है।
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137 में से 120 लड़कियां लापता, किशोरियों की सुरक्षा पर सबसे बड़ा सवाल
आंकड़ों के मुताबिक, लापता 137 बच्चों में 120 लड़कियां हैं। इसका मतलब साफ है कि किशोरियां सबसे ज्यादा खतरे में हैं। यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि सैकड़ों परिवारों की टूटी उम्मीदों और बढ़ती बेचैनी की कहानी है। पुलिस के लिए भी यह बड़ी चुनौती बनता जा रहा है कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में बच्चियां कहां और कैसे गायब हो रही हैं।
वयस्क भी सुरक्षित नहीं, महिलाएं भी तेजी से हो रहीं लापता
वयस्कों के मामलों पर नजर डालें तो हालात वहां भी बेहतर नहीं हैं। पहले 27 दिनों में 616 वयस्क लापता हुए। इनमें से 181 लोगों को ट्रेस किया जा सका, लेकिन 435 वयस्क अब भी लापता हैं। ट्रेस किए गए लोगों में 90 पुरुष और 91 महिलाएं शामिल हैं। यानी महिलाओं के लापता होने के मामले भी पुरुषों के लगभग बराबर हैं, जो राजधानी में महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल उठाते हैं।
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12 से 18 साल के बच्चे सबसे ज्यादा खतरे में
उम्र के हिसाब से देखें तो सबसे ज्यादा मामले 12 से 18 साल के बच्चों के सामने आए हैं। इस आयु वर्ग के 169 बच्चे सिर्फ 27 दिनों में लापता हो गए। इनमें से 48 बच्चों को ढूंढ लिया गया, लेकिन 121 बच्चे अब भी गायब हैं। 0 से 8 साल के 9 बच्चे और 8 से 12 साल के 13 बच्चे भी लापता हुए, जिनमें से बहुत कम को ही खोजा जा सका। यह साफ दिखाता है कि जैसे-जैसे उम्र बढ़ रही है, लापता होने का खतरा भी बढ़ता जा रहा है।
11 साल में 6,931 बच्चे आज भी लापता, जवाब अब तक नहीं
अगर हालिया आंकड़े डराने वाले हैं, तो पिछले 11 सालों की तस्वीर और भी भयावह है। साल 2016 से 2026 के बीच दिल्ली से 18 साल से कम उम्र के 60,694 बच्चे लापता हुए। इनमें से 53,763 बच्चों को तो पुलिस ने खोज लिया, लेकिन 6,931 बच्चों का आज तक कोई पता नहीं चल पाया। यानी करीब 11 प्रतिशत बच्चे हमेशा के लिए सिस्टम की पकड़ से बाहर रह गए।
साल दर साल सरकारें बदलीं, योजनाएं बनीं, तकनीक भी आगे बढ़ी, लेकिन लापता लोगों और बच्चों के आंकड़े कम नहीं हो सके। सबसे बड़ा सवाल आज भी वही है जो बच्चे और लोग वापस नहीं मिले, उनके साथ आखिर हुआ क्या? क्या वे कभी अपने परिवारों तक लौट पाएंगे या नहीं, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। राजधानी दिल्ली के ये आंकड़े सिर्फ खबर नहीं हैं, बल्कि एक गंभीर चेतावनी हैं, जिसे नजरअंदाज करना अब और खतरनाक साबित हो सकता है।

