Digvijay Singh takes a dig at PM Modi, demands high level investigation on MY Hospital case
Political Controversy: बिहार के दरभंगा में कांग्रेस के मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अभद्र भाषा के इस्तेमाल को लेकर मचे राजनीतिक घमासान के बीच, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने इंदौर में बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि इस विवाद में प्रधानमंत्री जिस तरह प्रतिक्रिया दे रहे हैं, उसकी उनसे उम्मीद नहीं थी। साथ ही एमवाय अस्पताल में चूहों के काटने से दो बच्चों की मौत पर भी उन्होंने सरकार को कठघरे में खड़ा किया।
“पीएम को लेकर इतनी गिरावट की उम्मीद नहीं थी”
इंदौर में अपने निजी कार्यक्रम के दौरान दिग्विजय सिंह ने कहा कि दरभंगा में कांग्रेस की सभा में गाली-गलौज करने वाला शख्स न तो कांग्रेस का कार्यकर्ता है और न ही पार्टी से उसका कोई संबंध है। उन्होंने कहा, “जिसने अपशब्द बोले, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि प्रधानमंत्री इस मामले में इतना नीचे गिरकर बयानबाजी करेंगे, इसका मुझे अंदेशा नहीं था।”
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कांग्रेस नेता ने तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री खुद भी कई मौकों पर विपक्ष के नेताओं को लेकर असंवेदनशील भाषा का प्रयोग कर चुके हैं। “मोदीजी ने सोनिया गांधी के लिए कितनी बार अपशब्द कहे, शशि थरूर और राहुल गांधी के खिलाफ क्या-क्या टिप्पणी नहीं की, लेकिन आज वे खुद को पीड़ित दिखा रहे हैं।”
“पूर्व प्रधानमंत्रियों के भाषणों में थी गरिमा”
देश की मौजूदा राजनीति की भाषा पर सवाल उठाते हुए दिग्विजय सिंह ने कहा कि आज के प्रधानमंत्री की तुलना जब नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, अटल बिहारी वाजपेयी और मनमोहन सिंह जैसे नेताओं से की जाती है तो अंतर साफ दिखता है।
उन्होंने कहा, “पहले के प्रधानमंत्रियों के भाषणों में न सिर्फ शालीनता थी, बल्कि दूरदर्शी सोच और विजन भी नजर आता था। लेकिन मौजूदा प्रधानमंत्री के भाषणों में उस स्तर की गरिमा और शिष्टता का अभाव है। यह हमारे लोकतंत्र के लिए चिंताजनक है।”
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एमवाय अस्पताल में बच्चों की मौत का मामला उठा
दिग्विजय सिंह ने इंदौर के एमवाय अस्पताल में चूहों के काटने से दो बच्चों की मौत की घटना को बेहद दुखद और शर्मनाक करार दिया। उन्होंने कहा कि यह प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलता है।
उन्होंने याद दिलाया कि “1994 में जब मोहंती कलेक्टर थे, तब एमवाय अस्पताल में चूहों की बढ़ती संख्या को खत्म करने के लिए ‘ऑपरेशन कायाकल्प’ चलाया गया था। उस समय करीब 12 हजार चूहे मारे गए थे। लेकिन अब तीन दशक बाद भी हालात जस के तस हैं।”
कांग्रेस नेता ने मुख्यमंत्री से सवाल पूछा कि इतनी बड़ी घटना के बाद भी अब तक कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाया गया। उन्होंने मांग की कि इस मामले की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए और अस्पताल के जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब तलब किया जाना चाहिए।
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“फिर से चलाया जाए बड़ा अभियान”
दिग्विजय सिंह ने कहा कि जिस तरह 1994 में चूहों के खात्मे के लिए अभियान चलाया गया था, उसी तरह एक बार फिर से व्यापक स्तर पर कार्रवाई की जरूरत है। उन्होंने कहा, “यह सिर्फ बच्चों की मौत का मामला नहीं है, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र की लापरवाही का नतीजा है। सरकार को जिम्मेदारी तय करनी चाहिए और दोषियों पर कार्रवाई करनी चाहिए।”
कांग्रेस-भाजपा में शब्दों की जंग तेज
दरभंगा की घटना के बाद से ही कांग्रेस और भाजपा के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। भाजपा इसे कांग्रेस की मानसिकता बता रही है, जबकि कांग्रेस का कहना है कि यह पार्टी का नहीं, किसी अज्ञात व्यक्ति का कृत्य था। अब दिग्विजय सिंह के बयान से यह मुद्दा और गरमा गया है।
इंदौर से दिग्विजय सिंह का यह बयान दो मुद्दों को लेकर सुर्खियों में रहा—पहला प्रधानमंत्री मोदी पर उनकी सीधी टिप्पणी और दूसरा एमवाय अस्पताल की लापरवाही को लेकर सरकार पर उठाए सवाल। एक ओर उन्होंने राजनीतिक भाषा की गिरावट पर चिंता जताई, वहीं दूसरी ओर प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की जरूरत पर जोर दिया।

