UP News: गुलदस्ता लेकर DM-SSP को ठगने पहुंचा ‘फर्जी IAS’, बातचीत के बीच ही खुली पोल
Fake IAS Officer Arrested: सरकारी दफ्तरों में अक्सर लोग अपनी समस्याएं लेकर पहुंचते हैं, लेकिन जब कोई खुद को बड़ा अफसर बताकर अधिकारियों को ही ठगने की कोशिश करे, तो हड़कंप मच जाता है। कुछ ऐसा ही चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक युवक खुद को आईएएस अधिकारी बताकर जिलाधिकारी और एसएसपी से मिलने पहुंच गया। शुरुआत में उसकी चालाकी कामयाब होती दिखी, लेकिन जिलाधिकारी की एक-एक सवाल भरी पूछताछ ने उसकी सारी सच्चाई उजागर कर दी।
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खुद को मेरठ में तैनात IAS बताकर पहुंचा समाहरणालय
यह पूरा मामला सोमवार का है, जब एक युवक अपने भाई के साथ समाहरणालय पहुंचा। उसने पूरे आत्मविश्वास के साथ खुद को उत्तर प्रदेश के मेरठ में तैनात एक आईएएस अधिकारी बताया। उसका नाम रितेश कुमार है, जो मुफस्सिल थाना क्षेत्र के बसाढ़ी गांव का रहने वाला बताया जा रहा है। बड़े रौब-रुतबे के साथ वह अधिकारियों के दफ्तर में दाखिल हुआ, मानो वह सच में कोई बड़ा अफसर हो।
गुलदस्ता देकर SSP को किया प्रभावित
रितेश सबसे पहले वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP) विनीत कुमार से मिलने पहुंचा। उसने खुद को आईएएस अधिकारी बताते हुए बड़े अदब से एसएसपी को गुलदस्ता भेंट किया। अचानक आए इस ‘अफसर’ के आत्मविश्वास और व्यवहार को देखकर शुरुआत में किसी को कोई शक नहीं हुआ। एसएसपी से मुलाकात के बाद उसका हौसला और बढ़ गया।
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DM से मिलने पहुंचते ही बदला माहौल
एसएसपी से मिलने के बाद रितेश सीधे जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव के चैंबर में पहुंच गया। उसने वहां भी खुद को एक आईएएस अधिकारी बताया और सामान्य बातचीत करने लगा। लेकिन यहीं से उसकी मुश्किलें शुरू हो गईं। जिलाधिकारी ने जब उससे प्रशासनिक अनुभव, पोस्टिंग और कामकाज से जुड़े सामान्य सवाल पूछे, तो वह घबरा गया।
सवालों में उलझा, जवाब नहीं दे पाया ‘साहब’
डीएम के सवालों के सामने रितेश का आत्मविश्वास धीरे-धीरे टूटने लगा। वह सवालों से बचता रहा, कभी इधर-उधर की बातें करने लगा, तो कभी अस्पष्ट जवाब देने लगा। जिलाधिकारी को तभी शक हो गया कि मामला कुछ गड़बड़ है। उन्होंने बातचीत के बीच ही अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को बुला लिया और युवक की सच्चाई की जांच कराने का निर्देश दे दिया।
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कुछ ही देर में खुल गई पूरी सच्चाई
जांच शुरू होते ही रितेश के दावे झूठे साबित होने लगे। न तो उसके पास कोई पहचान पत्र था, न ही वह अपनी पोस्टिंग और सेवा से जुड़ी जानकारी सही तरीके से बता पा रहा था। आखिरकार यह साफ हो गया कि युवक कोई आईएएस अधिकारी नहीं, बल्कि फर्जी पहचान के सहारे अधिकारियों तक पहुंचने की कोशिश कर रहा था।
मौके पर ही पुलिस के हवाले, भाई भी हिरासत में
सच्चाई सामने आते ही जिलाधिकारी के निर्देश पर युवक को तुरंत पुलिस के हवाले कर दिया गया। उसके साथ मौजूद भाई से भी पूछताछ की गई। समाहरणालय परिसर में इस घटना के बाद कुछ देर के लिए अफरातफरी का माहौल बन गया। लोग हैरान थे कि कोई इतनी हिम्मत कैसे कर सकता है।
परिजनों ने बताया मानसिक रोगी, नहीं दिखा पाए सबूत
युवक के पकड़े जाने की सूचना मिलते ही उसके परिजन थाने पहुंचे। उन्होंने दावा किया कि रितेश यूपीएससी की तैयारी कर रहा है और उसे बड़े अधिकारियों से मिलने का जुनून है। परिजनों ने यह भी कहा कि वह मानसिक रूप से बीमार है, लेकिन पुलिस द्वारा मांगे जाने पर वे कोई भी मेडिकल प्रमाण पत्र नहीं दिखा सके।
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ठगी की मंशा की भी जांच कर रही पुलिस
पुलिस को शक है कि युवक का मकसद सिर्फ मिलने तक सीमित नहीं था। आशंका है कि वह फर्जी आईएएस बनकर लोगों को प्रभावित करना और ठगी करना चाहता था। इसी वजह से पुलिस अब उसके पुराने रिकॉर्ड, फोन कॉल्स और संपर्कों की गहन जांच कर रही है।
पुलिस बोली- कड़ी कार्रवाई की जाएगी
नगर थाना प्रभारी ने बताया कि युवक के खिलाफ फर्जी पहचान, सरकारी अधिकारियों को गुमराह करने और धोखाधड़ी से जुड़ी धाराओं में कार्रवाई की जा रही है। यदि जांच में यह सामने आता है कि उसने पहले भी इस तरह की हरकत की है, तो उसके खिलाफ और सख्त कदम उठाए जाएंगे।
अधिकारियों की सतर्कता से टली बड़ी ठगी
इस पूरे मामले में जिलाधिकारी की सतर्कता ने एक बड़ी ठगी को समय रहते रोक लिया। यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि सरकारी पदों का रौब दिखाकर धोखाधड़ी करने वालों पर प्रशासन की नजर पैनी है और कानून से कोई नहीं बच सकता।

