Uttarakhand Weather: उत्तराखंड में ठंड का प्रकोप चरम पर, गंगोत्री में पारा -20°C पहुंचा, भागीरथी जमी, केदारनाथ में बर्फबारी जारी
Uttarakhand Cold Wave: उत्तराखंड के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में शीतकाल अपने चरम पर पहुंच गया है। प्रदेश के प्रमुख तीर्थ स्थलों और हिमालयी इलाकों में पड़ रही भीषण ठंड ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित करना शुरू कर दिया है। विशेष रूप से उत्तरकाशी जनपद के गंगोत्री क्षेत्र में हालात बेहद कठोर हो गए हैं, जहां तापमान माइनस 20 डिग्री सेल्सियस तक गिर चुका है। अत्यधिक ठंड के चलते भागीरथी नदी के किनारे जम गए हैं, जिससे क्षेत्र में आवाजाही खतरनाक बन गई है।
गंगोत्री में शीतलहर का प्रचंड प्रहार
गंगोत्री धाम और आसपास के क्षेत्रों में शीतकाल के दौरान इस बार ठंड ने पुराने रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया है। बीते कुछ दिनों से लगातार तापमान में गिरावट दर्ज की जा रही है। शनिवार को गंगोत्री क्षेत्र का न्यूनतम तापमान माइनस 20 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जबकि अधिकतम तापमान भी माइनस 10 से 12 डिग्री सेल्सियस के बीच बना रहा। भीषण ठंड के कारण न केवल जनजीवन ठप पड़ गया है, बल्कि प्राकृतिक जलस्रोत भी जमने लगे हैं। भागीरथी नदी की जलधारा किनारों पर जम चुकी है, जिससे नदी के आसपास भारी फिसलन पैदा हो गई है। ऐसे में स्थानीय लोगों, सुरक्षाकर्मियों और वन विभाग की टीमों को भी बेहद सतर्कता के साथ आवाजाही करनी पड़ रही है।
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भागीरथी नदी के किनारे जमी बर्फ, बढ़ा खतरा
भागीरथी नदी के किनारों पर बर्फ जमने से हालात और अधिक जोखिमपूर्ण हो गए हैं। कई स्थानों पर नदी किनारे चलना जानलेवा साबित हो सकता है। बर्फ की पतली परत के नीचे तेज बहाव वाली जलधारा मौजूद है, जिससे फिसलने की स्थिति में गंभीर हादसे की आशंका बनी हुई है। शनिवार को गंगोत्री धाम क्षेत्र में गंगोत्री नेशनल पार्क की टीम को जमी हुई भागीरथी नदी के किनारे से गुजरना पड़ा। अत्यधिक जोखिम के बावजूद टीम ने अपनी गश्त जारी रखी। प्रशासन और वन विभाग ने लोगों को नदी किनारे जाने से बचने की सलाह दी है।
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स्थानीय लोगों की बढ़ी मुश्किलें
कड़ाके की ठंड का असर स्थानीय निवासियों की दिनचर्या पर भी साफ दिखाई दे रहा है। पानी की पाइपलाइनें जमने लगी हैं, जिससे पेयजल संकट की स्थिति बनने लगी है। घरों के भीतर भी तापमान बेहद कम बना हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों में लकड़ी और अन्य ईंधन की मांग बढ़ गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस बार ठंड का असर पहले की तुलना में ज्यादा तेज है। बुजुर्गों और बच्चों के लिए ठंड गंभीर परेशानी बन गई है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से लोगों को ठंड से बचाव के लिए विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।
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केदारनाथ धाम में दूसरे दिन भी हल्की बर्फबारी
इधर, रुद्रप्रयाग जनपद के केदारनाथ धाम और आसपास की ऊंची चोटियों पर दूसरे दिन भी हल्की बर्फबारी दर्ज की गई। शनिवार को सुबह मौसम साफ रहा, लेकिन दोपहर बाद अचानक मौसम ने करवट ली और हल्की बर्फबारी शुरू हो गई। बर्फबारी के चलते केदारनाथ धाम में शीतलहर और अधिक तेज हो गई है। हालांकि, वुड स्टोन प्रभारी सोबन सिंह बिष्ट के अनुसार केदारनाथ धाम में अभी तक इंचभर भी बर्फ जमा नहीं हुई है, लेकिन तापमान में लगातार गिरावट के चलते ठंड का असर बना हुआ है। तीखी हवाओं के कारण ठिठुरन और अधिक बढ़ गई है।
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निचले इलाकों में धूप, ऊंचाई पर ठंड का सितम
जहां एक ओर ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी और शीतलहर का असर जारी है, वहीं निचले इलाकों और जिला मुख्यालय रुद्रप्रयाग में बादलों के बीच चटख धूप खिली रही। दिन के समय धूप निकलने से लोगों को थोड़ी राहत जरूर मिली, लेकिन सुबह और शाम के समय ठंड का प्रकोप बना रहा।
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प्रशासन अलर्ट, अलाव की व्यवस्था
भीषण ठंड को देखते हुए जिला प्रशासन भी सतर्क हो गया है। ठंड से बचाव के लिए कई स्थानों पर अलाव की व्यवस्था की गई है। विशेष रूप से मजदूरों, राहगीरों और जरूरतमंद लोगों के लिए सार्वजनिक स्थानों पर अलाव जलाए जा रहे हैं। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अनावश्यक रूप से ऊंचाई वाले क्षेत्रों की यात्रा से बचें और मौसम पूर्वानुमान को ध्यान में रखते हुए ही बाहर निकलें। साथ ही, बर्फबारी और अत्यधिक ठंड के दौरान नदी, नालों और फिसलन वाले स्थानों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई है।
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आने वाले दिनों में और बढ़ सकती है ठंड
मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में भी पहाड़ी क्षेत्रों में ठंड से राहत मिलने की संभावना कम है। तापमान में और गिरावट दर्ज की जा सकती है, जबकि ऊंचाई वाले इलाकों में हल्की बर्फबारी की संभावना बनी हुई है। कुल मिलाकर, उत्तराखंड के गंगोत्री, केदारनाथ और आसपास के हिमालयी क्षेत्रों में शीतकाल का प्रचंड रूप देखने को मिल रहा है। ऐसे में प्रशासन और आम जनता दोनों को सतर्क रहकर मौसम की चुनौती का सामना करना होगा।

