High Court created a special relief fund for the disaster affected people in Himachal
Disaster Relief Fund: हिमाचल प्रदेश में इस बार का मानसून कहर बनकर टूटा है। भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन ने राज्यभर में जान-माल का भारी नुकसान पहुंचाया है। इस आपदा के बीच अब प्रदेश हाईकोर्ट ने भी आगे आकर राहत कार्यों में योगदान देने का बड़ा कदम उठाया है। न्यायपालिका ने “चीफ जस्टिस डिज़ास्टर रिलीफ फंड 2025” नाम से एक विशेष कोष की स्थापना की है, जिसके जरिए प्रभावित परिवारों तक सीधी मदद पहुंचाई जाएगी।
चीफ जस्टिस डिज़ास्टर रिलीफ फंड की शुरुआत
हाईकोर्ट की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया है कि इस राहत कोष में मुख्य न्यायाधीश, अन्य न्यायाधीश, अधिवक्ता, बार काउंसिल ऑफ हिमाचल प्रदेश के सदस्य और वकालत से जुड़े लोग अपनी ओर से उदारतापूर्वक योगदान करेंगे। इसके लिए यूको बैंक में विशेष खाता खोला गया है और योगदान देने में आसानी के लिए एक क्यूआर कोड भी जारी किया गया है।
इस फंड का संचालन हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार करेंगे जिन्हें नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। रजिस्ट्रार न केवल योगदान राशि का रिकॉर्ड रखेंगे, बल्कि इसे राज्य विधिक सेवाएं प्राधिकरण (State Legal Services Authority) के माध्यम से प्रभावित जिलों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी निभाएंगे।
नगद के साथ सामग्री का योगदान भी संभव
इस राहत कोष में केवल नगद राशि ही नहीं, बल्कि कपड़े, बर्तन और अन्य घरेलू उपयोग की वस्तुएं भी दान की जा सकती हैं। जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण के सचिव और सदस्य यह सुनिश्चित करेंगे कि राहत सामग्री उन परिवारों तक पहुंचे, जिन्होंने आपदा में अपना सब कुछ खो दिया है।
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हाईकोर्ट की इस पहल से न केवल न्यायपालिका की संवेदनशीलता झलकती है, बल्कि यह भी संदेश जाता है कि मुश्किल समय में हर संस्था और नागरिक को मिलकर पीड़ितों की मदद करनी चाहिए।
सभी से सहयोग की अपील
इस फंड के लिए हाईकोर्ट ने न केवल अपने न्यायाधीशों और अधिकारियों, बल्कि हिमाचल बार एसोसिएशन, जिला बार एसोसिएशन और कानून से जुड़े सभी लोगों से भी सहयोग की अपील की है। अधिसूचना में स्पष्ट कहा गया है कि यह राहत कार्य केवल पैसों का दान नहीं है, बल्कि आपदा से जूझ रहे परिवारों के जीवन को फिर से पटरी पर लाने का सामूहिक प्रयास है।
तबाही का बड़ा पैमाना
इस बार के मानसून में हिमाचल प्रदेश ने अप्रत्याशित तबाही देखी है। मंडी, कुल्लू, चंबा और किन्नौर जैसे जिलों में भूस्खलन और बादल फटने की घटनाओं ने भारी तबाही मचाई। सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक अब तक 4,000 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति का नुकसान हो चुका है। वहीं, सैकड़ों लोगों की मौत हुई है और हजारों परिवार बेघर हुए हैं।
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राज्य सरकार और केंद्र सरकार मिलकर राहत कार्य चला रही हैं, वहीं कई स्वयंसेवी संस्थाएं और सामाजिक संगठन भी मदद पहुंचाने में जुटे हुए हैं। अब हाईकोर्ट का यह कदम आपदा प्रभावितों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है।
पीएम मोदी करेंगे दौरा
आपदा की भयावहता को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी जल्द ही हिमाचल का दौरा करेंगे। पीएम प्रभावित जिलों का जायजा लेंगे और वहां के हालात पर स्थानीय प्रशासन व सरकार के साथ बैठक करेंगे। उम्मीद है कि केंद्र से मिलने वाली सहायता राशि और हाईकोर्ट जैसे संस्थानों के सहयोग से राज्य में राहत और पुनर्वास कार्य तेजी पकड़ेंगे।
संवेदनशील पहल की सराहना
विशेषज्ञों का कहना है कि अदालत का यह कदम समाज में जागरूकता का संदेश देगा। जब लोग देखेंगे कि न्यायपालिका जैसी संस्था भी आगे आ रही है, तो आम नागरिक और संगठन भी प्रेरित होंगे और योगदान देंगे।
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आगे की योजना
राज्य विधिक सेवाएं प्राधिकरण ने जिला स्तर पर विशेष टीमें बनाने का निर्णय लिया है। ये टीमें न केवल राहत सामग्री वितरण करेंगी बल्कि यह भी सुनिश्चित करेंगी कि किसी जरूरतमंद परिवार तक मदद पहुंचने से न छूटे। इसके अलावा यह भी योजना है कि प्रभावित क्षेत्रों में बच्चों की पढ़ाई और बुजुर्गों की स्वास्थ्य सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जाए।

