IAS Officer Caught Taking 10 Lakh
IAS Officer Caught Taking 10 Lakh: ओडिशा की प्रशासनिक व्यवस्था और राजनीतिक गलियारों में उस समय हलचल तेज हो गई, जब राज्य सरकार ने भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों से घिरे एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी पर बड़ा फैसला लिया। पिछले साल जून महीने में 10 लाख रुपये की भारी-भरकम रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किए गए ओडिशा कैडर के आईएएस (IAS) अधिकारी धीमान चकमा को सरकार ने करीब 11 महीने के निलंबन (IAS Officer Caught Taking 10 Lakh) के बाद सेवा में बहाल कर दिया है। इतनी बड़ी कार्रवाई और दागदार छवि के बावजूद उन्हें सीधे सचिवालय में एंट्री देते हुए राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग (Revenue and Disaster Management Department) में उप सचिव (Deputy Secretary) के बेहद महत्वपूर्ण पद पर तैनात किया गया है।
गौरतलब है कि धीमान चकमा की इस बहाली ने सोशल मीडिया से लेकर मुख्यधारा के मीडिया तक एक नई बहस को जन्म दे दिया है। भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति का दावा करने वाली व्यवस्था में एक ऐसे अधिकारी को दोबारा मुख्यधारा में लाना, जिसके ठिकानों से छापेमारी के दौरान लाखों रुपये की अघोषित नकदी (IAS Officer Caught Taking 10 Lakh) बरामद हुई थी, लोगों के गले नहीं उतर रहा है। प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से जांच एजेंसियों के मनोबल पर असर पड़ सकता है, जबकि सरकार ने इस बहाली के पीछे तकनीकी और सेवा नियमों का हवाला दिया है।
सरकारी आवास पर विजिलेंस ने बिछाया था जाल
इस पूरे मामले की शुरुआत जून 2025 में हुई थी, जब धीमान चकमा कालाहांडी जिले के धर्मगढ़ में सब-कलेक्टर (Sub-Collector) के पद पर तैनात थे। आरोप था कि उन्होंने क्षेत्र में चल रहे एक स्टोन (IAS Officer Caught Taking 10 Lakh) क्रशर संचालक से उसका काम बिना किसी बाधा के जारी रखने के एवज में ₹20 लाख की मोटी घूस मांगी थी। पीड़ित व्यवसायी ने इसकी शिकायत सीधे ओडिशा विजिलेंस (Odisha Vigilance) विभाग से कर दी।
विजिलेंस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत जाल बिछाया और 8 जून 2025 को धीमान चकमा को उनके सरकारी आवास पर ही रिश्वत की पहली किस्त के रूप में ₹10 लाख नकद लेते हुए रंगे हाथ (IAS Officer Caught Taking 10 Lakh) दबोच लिया। एक सिटिंग आईएएस अधिकारी की इस तरह की गिरफ्तारी से पूरे राज्य के प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया था।
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छापेमारी में घर से उगलवाए ₹47.47 लाख कैश
गिरफ्तारी के तुरंत बाद विजिलेंस की विशेष टीमों ने धीमान चकमा के सरकारी आवास सहित उनके कई अन्य संभावित ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की थी। इस तलाशी अभियान के दौरान जांच अधिकारियों की आंखें उस वक्त फटी की फटी रह गईं, जब आईएएस के घर से ₹47.47 लाख से अधिक की बेहिसाब नकदी (IAS Officer Caught Taking 10 Lakh) बरामद हुई। विजिलेंस के कड़े सवालों के बावजूद अधिकारी इस विशाल रकम के कानूनी स्रोत या आमदनी के संबंध में कोई भी संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए थे। इस काली कमाई के उजागर होने के बाद राज्य सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से सेवा से निलंबित (Suspend) कर दिया था।
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हाई कोर्ट से मिली थी जमानत
गिरफ्तारी और निलंबन के बाद आईएएस धीमान चकमा को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया था। करीब डेढ़ महीने तक सलाखों के पीछे दिन काटने के बाद, 24 जुलाई 2025 को उन्हें उड़ीसा हाई कोर्ट से नियमित जमानत (Bail) मिल सकी थी। वर्तमान में यह पूरा मामला अदालत के विचाराधीन है और उनके खिलाफ भ्रष्टाचार (IAS Officer Caught Taking 10 Lakh) निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के तहत मुकदमे (IAS Officer Caught Taking 10 Lakh) की नियमित सुनवाई जारी है। इसके साथ ही, शासन के स्तर पर चल रही विभागीय जांच (Departmental Inquiry) भी अभी तक मुकाम पर नहीं पहुंची है।

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‘बहाली का मतलब क्लीन चिट नहीं’
चारों तरफ से उठ रहे सवालों और चौतरफा घिरने के बाद राज्य सरकार के शीर्ष अधिकारियों ने इस फैसले पर अपनी तकनीकी सफाई पेश की है। सरकार का तर्क है कि सेवा नियमों (Service Rules) के प्रावधानों के तहत निलंबन अवधि की अनिवार्य समीक्षा के बाद ही उनकी बहाली का आदेश जारी किया गया है। सरकार के आधिकारिक सूत्रों ने (IAS Officer Caught Taking 10 Lakh) साफ किया है- ‘इस बहाली का अर्थ कतई यह नहीं निकाला जाना चाहिए कि अधिकारी को आरोपों से मुक्ति मिल गई है या उन्हें क्लीन चिट दे दी गई है। अदालत और विभागीय जांच का (IAS Officer Caught Taking 10 Lakh) जो भी अंतिम फैसला आएगा, उसी के आधार पर उनकी भविष्य की सेवा और सख्त दंडात्मक कार्रवाई तय की जाएगी।’

