Insolvency and Bankruptcy Board of India: 1 अक्टूबर 2024 को भारतीय इंसोलवेंसी और दिवालियापन बोर्ड (IBBC) अपना आठवां वार्षिक दिवस (8th Annual Day) मना रहा है। इस अवसर पर मुख्य कार्यक्रम नई दिल्ली में आयोजित किया जा रहा है। राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (National Company Law Tribunal) के अध्यक्ष मुख्य न्यायाधीश (Chairman Chief Justice) (सेवानिवृत्त) श्री रामलिंगम सुधाकर (Mr. Ramalingam Sudhakar) मुख्य अतिथि (Chief Guest) होंगे और मुख्य भाषण (Keynote Address) देंगे। भारत के जी20 शेरपा (G20 Sherpa) और नीति आयोग (Policy Commission) के पूर्व सीईओ (Former CEOs) श्री अमिताभ कांत (Mr. Amitabh Kant) वार्षिक दिवस व्याख्यान (Annual Day Lecture) देंगे। इस अवसर पर वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance) के मुख्य आर्थिक सलाहकार (Chief Economic Adviser) डॉ. वी. अनंत नागेश्वरन (Dr. V. Anantha Nageswaran) और कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय (Ministry of Corporate Affairs) की सचिव (Secretary) सुश्री दीप्ति गौर मुखर्जी (Ms. Dipti Gaur Mukherjee) भी संबोधित करेंगी। वार्षिक दिवस व्याख्यान श्रृंखला और कई अन्य गतिविधियाँ भी समारोह का हिस्सा होंगी।
इस अवसर पर, एक वार्षिक प्रकाशन, “आईबीसी के आठ वर्ष: शोध एवं विश्लेषण” जारी किया जाएगा।
इसके अलावा, आईबीसी (दिवालियापन और दिवालियापन संहिता) पर 5वें राष्ट्रीय ऑनलाइन क्विज़ (5th National Online Quiz) के विजेताओं को योग्यता प्रमाणपत्र (Qualification Certificate), पदक (Medal) और नकद पुरस्कार (Cash Prizes) से सम्मानित किया जाएगा।
पिछले आठ वर्षों में, IBC ने दिवालियापन मामलों के समाधान में उल्लेखनीय रूप से तेज़ी लाई है। निवेशकों (Investors) और हितधारकों (Stakeholders) का विश्वास बढ़ाया है तथा व्यवसाय विकास (Business Development) के लिए अधिक अनुकूल वातावरण (Favorable Environment) को बढ़ावा दिया है। संहिता के निवारक प्रभाव ने कॉर्पोरेट देनदार के नियंत्रण के हस्तांतरण को सक्षम किया है, जिसने देनदार के व्यवहार को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित किया है। स्वामित्व हस्तांतरण का जोखिम एक मजबूत प्रोत्साहन है, जो अनुशासित प्रबंधन (Disciplined Management) को प्रोत्साहित करता है और दिवालियापन को बढ़ावा देने वाली कार्रवाइयों को हतोत्साहित करता है।
सरकार और नियामक निकायों के वरिष्ठ अधिकारी इस अवसर पर उपस्थित रहेंगे। इस अवसर पर दिवालियापन व्यवस्था के हितधारकों, अर्थात् दिवालियापन पेशेवरों, पंजीकृत मूल्यांकनकर्ताओं, अन्य पेशेवरों, देनदारों, लेनदारों, व्यापारिक नेताओं, शिक्षाविदों और शोधकर्ताओं की उपस्थिति देखी जाएगी।