Jhalawar School Incident: झालावाड़ हादसे पर टूटी प्रिंसिपल मीना गर्ग, वीडियो में कहा- 'वो सारे मेरे ही बच्चे थे'
Jhalawar School Incident: राजस्थान के झालावाड़ जिले में हुए दर्दनाक स्कूल हादसे ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। पिपलोदी गांव के सरकारी स्कूल की छत गिरने से सात मासूम बच्चों की जान चली गई। अब इस हादसे के बाद स्कूल की कार्यवाहक प्रिंसिपल मीना गर्ग का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वह हादसे के समय की पूरी कहानी बताते-बताते भावुक होकर रो पड़ती हैं। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है।
प्रिंसिपल ने कहा कि हादसे वाले दिन वह खुद उसी क्लास में थीं, लेकिन जैसे ही बाहर गईं, कुछ ही पलों में छत गिर गई। उन्होंने यह भी दावा किया कि स्कूल की इमारत जर्जर नहीं थी और इसकी मरम्मत हाल ही में करवाई गई थी। बावजूद इसके, शिक्षा विभाग ने उन्हें सस्पेंड कर दिया है।
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क्या कहा प्रिंसिपल मीना गर्ग ने?
वीडियो में मीना गर्ग ने बताया, “मैं सुबह साढ़े सात बजे स्कूल पहुंच गई थी। उस समय बारिश हो रही थी, इसलिए प्रार्थना क्लासरूम के अंदर करवाई गई। बच्चों को इकट्ठा किया गया। मैं उसी कमरे में थी, लेकिन जैसे ही दूसरे कमरे से बच्चों को बुलाने बाहर निकली, तभी हादसा हो गया।”
‘स्कूल जर्जर नहीं था, हाल ही में हुई थी मरम्मत’
मीना गर्ग ने दावा किया कि स्कूल की हालत खराब नहीं थी। उन्होंने कहा, “2022-23 में सरपंच की ओर से स्कूल की छत की मरम्मत करवाई गई थी। सिर्फ दो कमरों की छत से पानी टपकता था, जिन्हें हमने बंद कर रखा था और बच्चों को कभी वहां नहीं भेजा।”
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“वो सारे मेरे ही बच्चे थे…”
प्रिंसिपल वीडियो में भावुक हो उठती हैं और कहती हैं, “वो सारे मेरे ही बच्चे थे। मैं यहां 9 साल से पढ़ा रही थी। हर एक बच्चे का चेहरा मेरी आंखों के सामने आ रहा है।” यह कहते हुए वह रोने लगती हैं।
हादसे से पहले भी दी गई थीं कई शिकायतें
स्थानीय ग्रामीणों और छात्रों का आरोप है कि स्कूल की हालत को लेकर पहले भी कई बार शिकायतें की गई थीं। छत से कंकड़-पत्थर गिरने की घटनाएं आम थीं, लेकिन संबंधित अधिकारियों और सरपंच द्वारा शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया गया।
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दोषी शिक्षकों और अधिकारियों पर कार्रवाई
राज्य शिक्षा विभाग ने हादसे के तुरंत बाद कार्रवाई करते हुए कार्यवाहक प्रिंसिपल मीना गर्ग सहित पांच शिक्षकों को निलंबित कर दिया। इसके अगले ही दिन झालावाड़ के जिला शिक्षा अधिकारी नरसो मीणा सहित छह अन्य अधिकारियों को भी सस्पेंड कर दिया गया। विभाग ने इन सभी को प्रथम दृष्टया दोषी माना है।
हादसे ने खोली सरकारी स्कूलों की पोल
इस हृदयविदारक घटना ने सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति को एक बार फिर उजागर कर दिया है। अभिभावकों और ग्रामीणों में गहरी नाराजगी है। वे सवाल पूछ रहे हैं कि जब पहले से ही स्कूल की छत से कंकड़ गिरने की शिकायतें थीं, तो कार्रवाई क्यों नहीं की गई?

