Mamata Banerjee Resigns: बंगाल चुनाव से पहले ममता बनर्जी का बड़ा दांव, एक साथ 23 पदों से दिया इस्तीफा, जानें क्या है 'ऑफिस ऑफ प्रॉफिट' का पेंच?
Mamata Banerjee Resigns: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की रणभेरी बजने के साथ ही राज्य की सियासत में हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) सुप्रीमो ममता बनर्जी ने मंगलवार को एक चौंकाने वाले घटनाक्रम में विभिन्न सरकारी विभागों, बोर्डों और परिषदों के 23 महत्वपूर्ण पदों से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया है। राज्य प्रशासन द्वारा जारी एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, मुख्यमंत्री ने उन सभी निकायों से खुद को अलग कर लिया है जहाँ वे अध्यक्ष या सदस्य के रूप में कार्यरत थीं।
राजनीतिक गलियारों में इस कदम को ममता बनर्जी की एक सोची-समझजी रणनीति के रूप में देखा जा रहा है, ताकि नामांकन के दौरान किसी भी कानूनी अड़चन से बचा जा सके।
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क्यों दिया एक साथ इतने पदों से इस्तीफा?
ममता बनर्जी द्वारा इन पदों को छोड़ने के पीछे सबसे बड़ा कारण ‘ऑफिस ऑफ प्रॉफिट’ (लाभ का पद) का मामला बताया जा रहा है। भारतीय चुनाव नियमों के अनुसार, यदि कोई उम्मीदवार किसी ऐसे पद पर आसीन है जहाँ से उसे आर्थिक लाभ, भत्ता या विशेष शक्तियां प्राप्त होती हैं, तो उसे चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य ठहराया जा सकता है।
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सूत्रों का कहना है कि ममता बनर्जी भवानीपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं। नामांकन प्रक्रिया के दौरान विपक्षी दल उनके खिलाफ ‘लाभ के पद’ का मुद्दा न उठा सकें, इसी एहतियात के तौर पर उन्होंने इन 23 पदों को त्याग दिया है। राज्य के गृह विभाग ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिया है कि वे बुधवार शाम 4 बजे तक इन इस्तीफों को स्वीकार कर अनुपालन रिपोर्ट सौंपें।
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किन प्रमुख पदों को ममता बनर्जी ने छोड़ा?
मुख्यमंत्री ने जिन 23 पदों से इस्तीफा दिया है, उनमें स्वास्थ्य, शिक्षा, संस्कृति और उद्योग से जुड़े महत्वपूर्ण बोर्ड शामिल हैं। प्रमुख पदों की सूची इस प्रकार है:
- राज्य स्वास्थ्य मिशन: मिशन की प्रमुख के पद से इस्तीफा।
- राज्य वन्यजीव बोर्ड: अध्यक्ष पद का त्याग।
- पर्यावरण पर्यटन सलाहकार बोर्ड: बोर्ड की कमान छोड़ी।
- नेताजी सुभाष चंद्र बोस 125वीं जयंती समिति: अध्यक्ष पद से हटीं।
- पश्चिम बंगाल उर्दू अकादमी: शासी निकाय (Governing Body) की सदस्यता छोड़ी।
- अन्य: बांग्ला संगीत मेला आयोजन समिति, राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और राज्य औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन बोर्ड जैसे महत्वपूर्ण निकायों से भी इस्तीफा दे दिया है।
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भवानीपुर में महामुकाबला, ममता बनाम शुभेंदु
ममता बनर्जी इस बार अपनी पारंपरिक सीट भवानीपुर से चुनावी मैदान में हैं। यहाँ उनका सीधा मुकाबला राज्य के नेता प्रतिपक्ष और भाजपा के कद्दावर नेता शुभेंदु अधिकारी से माना जा रहा है। Mamata Banerjee Resigns from 23 Posts की यह खबर इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि शुभेंदु अधिकारी और भाजपा की लीगल टीम ममता के नामांकन पर पैनी नजर रखे हुए है। पिछली बार नंदीग्राम में हुए कड़े मुकाबले के बाद, ममता बनर्जी इस बार अपनी कागजी कार्यवाही में कोई भी कमी नहीं छोड़ना चाहतीं।
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प्रशासनिक सक्रियता, ‘ऑफिस ऑफ प्रॉफिट’ का डर
मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) ने गृह विभाग को स्पष्ट निर्देश दिया है कि यदि इस सूची के अलावा भी कोई अन्य पद शेष रह गया हो जहाँ मुख्यमंत्री की सदस्यता है, तो वहां से भी उनके इस्तीफे को स्वतः स्वीकार माना जाए।
- अयोग्य ठहराने का जोखिम: यदि कोई उम्मीदवार नामांकन भरते समय ‘लाभ के पद’ पर होता है, तो रिटर्निंग ऑफिसर उसका नामांकन रद्द कर सकता है।
- संवैधानिक मर्यादा: हालाँकि मुख्यमंत्री का पद लाभ के पद के दायरे से बाहर है, लेकिन विभिन्न बोर्डों के अध्यक्ष पद अक्सर विवादों का कारण बनते रहे हैं।
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विपक्ष का तंज, हार के डर से उठाया कदम
ममता बनर्जी के इस कदम पर विपक्षी दलों ने निशाना साधना शुरू कर दिया है। भाजपा नेतृत्व का कहना है कि मुख्यमंत्री को अपनी हार का अहसास हो गया है, इसलिए वे अब तकनीकी आधार पर खुद को सुरक्षित करने में जुटी हैं। वहीं, टीएमसी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि यह एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है जो हर चुनाव से पहले पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए अपनाई जाती है।

