Mohan Bhagwat News: राम मंदिर के बाद अब किसकी बारी? मोहन भागवत ने किया बड़ा खुलासा!

Mohan Bhagwat News: देश में अयोध्या में बने भव्य राम मंदिर के बाद अब एक नई चर्चा शुरू हो गई है। आखिर अगला बड़ा कदम क्या होगा? किस मंदिर का काम आगे बढ़ेगा? यह सवाल हर किसी के मन में था। इसी बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने इस बारे में बड़ा बयान देकर माहौल को और भी गर्म कर दिया है।
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राम मंदिर बन चुका… अब बारी है राष्ट्रीय मंदिर की
मंगलवार को पुणे के कोथरूड में आयोजित आभार समारोह में मोहन भागवत बोले-भव्य राम मंदिर बन चुका है। यह सबकी भलाई का प्रतीक है। अब समय है शानदार, शक्तिशाली और सुंदर राष्ट्रीय मंदिर बनाने का।
उनके इस बयान के बाद लोगों में अलग ही उत्सुकता पैदा हो गई आखिर यह राष्ट्रीय मंदिर क्या होगा? कहाँ बनेगा? इसका उद्देश्य क्या होगा?
हालांकि मोहन भागवत ने इसका स्पष्ट नाम नहीं लिया, लेकिन उन्होंने यह जरूर बताया कि देश को एकजुट करने वाले, समाज को प्रेरित करने वाले बड़े राष्ट्रीय प्रतीक की अब जरूरत है।
यह कार्यक्रम क्यों खास था?
यह समारोह आरएसएस के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था। मंच पर कई बड़े चेहरे मौजूद थे जैसे-जगद्गुरु शंकराचार्य विजयेंद्र सरस्वती स्वामी, आदित्य प्रतिष्ठान के अध्यक्ष शंकर अभ्यंकर और अपर्णा अभ्यंकर
मोहन भागवत ने कहा कि संघ समाज के लिए बिना किसी व्यक्तिगत स्वार्थ के काम करता है। उनके शब्द थे- संघ में न अहंकार है, न ही सत्ता की लालसा। संघ समाज को संगठित करने का काम करता है। एकजुट समाज ही खुशहाल देश बनाता है।
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समाज मजबूत होगा तभी देश मजबूत होगा
मोहन भागवत ने समाज की एकता पर जोर देते हुए कहा- अगर समाज मजबूत है तो देश अपने आप ऊपर उठेगा। उन्होंने बताया कि संघ इसलिए आगे बढ़ा क्योंकि कठिन समय में समाज ने संघ का साथ दिया।
उनके मुताबिक, संघ ने कभी यह दावा नहीं किया कि देश का भला सिर्फ वही करेगा, बल्कि उनका मानना है कि देश तभी आगे बढ़ेगा जब समाज एकजुट होगा।
हिंदू संस्कृति दुनिया को जोड़ती है
कार्यक्रम में आदित्य प्रतिष्ठान के अध्यक्ष शंकर अभ्यंकर ने कहा कि दुनिया में हमलों और संघर्षों के कारण कई सभ्यताएं खत्म हो गईं, लेकिन भारत की हिंदू संस्कृति, जो वसुधैव कुटुम्बकम यानी पूरी दुनिया को एक परिवार मानती है अब भी जीवित है।
उन्होंने यह भी कहा कि ब्रिटिश राज भी एक तरह का हमला था, जिसका उद्देश्य भारत की पहचान को कमजोर करना था।
सनातन संस्कृति ने बचाया लोकतंत्र
जगद्गुरु शंकराचार्य विजयेंद्र सरस्वती स्वामी ने कहा-भारत में लोकतंत्र इसलिए सफल है, क्योंकि लोकतंत्र के मूल मूल्य सनातन धर्म में मौजूद हैं।
उन्होंने कहा कि देश के अच्छे लोगों को और मजबूत करने की जरूरत है, ताकि लोकतंत्र और भी सशक्त बन सके।
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कार्यक्रम में हुए बड़े काम
इस कार्यक्रम में कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम हुए—
● वैश्विक संत भारती महाविष्णु मंदिर का शिलान्यास
● विश्वकोश खंड ‘भारतीय उपासना’ के तीसरे संस्करण का विमोचन
● ‘पंढरिश’ ऑडियो एल्बम का लॉन्च
ये सभी कार्यक्रम भारत की आध्यात्मिक विरासत और ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाने से जुड़े हुए हैं।
राष्ट्रीय मंदिर—यह क्या हो सकता है?
हालांकि मोहन भागवत ने कोई नाम नहीं बताया, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार यह ‘राष्ट्रीय मंदिर’ हो सकता है
भारत की संस्कृति और इतिहास का बड़ा केंद्र
ऐसा आध्यात्मिक स्थल जहां पूरी दुनिया से लोग आएं
ऐसा प्रतीक जो देश को एकजुट करे
कई लोग इसे किसी विशेष मंदिर से जोड़कर देख रहे हैं, लेकिन फिलहाल यह सिर्फ अनुमान है।
मोहन भागवत के बयान ने बढ़ा दी उत्सुकता
राम मंदिर के बाद पूरे देश की निगाहें अगली बड़ी धार्मिक परियोजना पर लगी हैं। मोहन भागवत का यह बयान संकेत देता है कि आने वाले समय में एक बहुत बड़ा सांस्कृतिक और राष्ट्रीय प्रोजेक्ट शुरू होने वाला है।
अब यह क्या होगा इसका खुलासा आने वाले समय में होगा। लेकिन इतना तय है कि इस बयान ने देश में नई बहस और नई उम्मीद जगाई है।

